भारतीय क्रिकेट टीम के चयनकर्ताओं पर पूर्व कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज दिलीप वेंगसरकर ने बड़ा सवाल खड़ा किया है. वेंगसरकर इस बात से बेहद नाराज हैं कि घरेलू क्रिकेट (रणजी ट्रॉफी) में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भारतीय टीम में वह मौका नहीं मिल रहा जिसके वे हकदार हैं.
दिलीप वेंगसरकर का साफ कहना है कि अगर घरेलू टूर्नामेंट्स के दम पर इंटरनेशनल टीम में एंट्री नहीं मिलती तो इस टूर्नामेंट को कराने का कोई मतलब ही नहीं है. एक मीडिया चैनल से बातचीत के दौरान वेंगसरकर ने तीखे अंदाज में कहा कि अगर आपको लगता है कि ये घरेलू मैच सिलेक्शन का आधार नहीं हैं तो रणजी ट्रॉफी को बंद कर दीजिए. इसे मत खेलिए.
उन्होंने आगे कहा कि खिलाड़ी इतनी कड़ी मेहनत करते हैं, मैच जिताते हैं, विकेट चटकाते हैं. अगर इसके बाद भी उन्हें टीम इंडिया की कैप नहीं मिलती तो यह सिर्फ समय की बर्बादी है.
वेंगसरकर ने खास तौर पर जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी का जिक्र किया, जिन्होंने रणजी ट्रॉफी 2025-26 में तहलका मचा दिया था. वह वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे टीम में शामिल हैं, लेकिन अभी उनको अपने डेब्यू का इंतजार है.
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दिग्गज गेंदबाज मोहम्मद शमी को टीम से बाहर रखे जाने पर भी वेंगसरकर हैरान नजर आए. शमी ने हालिया रणजी सीजन में 37 विकेट चटकाए थे और उनका औसत 17 से भी कम का रहा था. इसके अलावा उन्होंने दलीप ट्रॉफी 2026 में भी ईस्ट जोन को चैम्पियन बनाने में अपनी गेंदबाजी से अहम योगदान दिया था.
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मोहम्मद शमी जून 2023 से टेस्ट टीम से और मार्च 2025 से इंटरनेशनल क्रिकेट से दूर चल रहे हैं. वेंगसरकर ने न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली आगामी टेस्ट सीरीज के लिए शमी को टीम में शामिल किए जाने की पुरजोर वकालत करते हुए कहा कि सच कहूं तो मुझे समझ नहीं आता कि शमी को क्यों साइडलाइन किया गया है.
उन्होंने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों जगह शानदार प्रदर्शन किया है. वे एक बेहतरीन गेंदबाज हैं और उन्हें भारतीय टीम का अहम हिस्सा होना चाहिए.