आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में भारतीय दल की तस्वीर बेहद खास होने वाली है. एक ओर 50 साल के अनुभवी निशानेबाज मेराज अहमद खान हैं, जो तीन दशक से ज्यादा समय से इंटरनेशनल शूटिंग में जलवा बिखेर रहे हैं. दूसरी ओर 15 साल के क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी हैं, जिनके लिए यह एशियन गेम्स अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बड़ा पड़ाव होगा. उम्र में 35 साल का अंतर होने के बावजूद दोनों के सामने एक ही लक्ष्य है. वो लक्ष्य है- भारत के लिए शानदार प्रदर्शन.
भारत ने हांगझोउ एशियन गेम्स 2023 में 107 पदक जीते थे, जो इन खेलों में उसका अब तक का सर्वश्रेष्ठ परफॉर्मेंस है. इस बार भारत की कोशिश उस रिकॉर्ड को और बेहतर करने पर होगी. 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जापान में होने वाले इन खेलों में 45 देशों और रीजन्स के खिलाड़ी 43 खेलों में हिस्सा लेंगे.
मेराज साधेंगे मेडल पर निशाना
मेराज अहमद खान भारतीय स्कीट शूटिंग के सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में शामिल हैं. 50 साल की उम्र में भी वह पूरी तरह सक्रिय हैं और आइची-नागोया में अपने एशियन गेम्स करियर का पहला पदक जीतने के इरादे से उतरेंगे. मेराज तीन बार वर्ल्ड कप में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं. इसके अलावा उनके नाम एशियन चैम्पियनशिप और कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप का स्वर्ण भी है. वह दो ओलंपिक में हिस्सा ले चुके हैं और 2016 रियो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाले पहले भारतीय स्कीट शूटर बने थे.
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एशियन गेम्स से पहले मेराज अहम खान समेत शॉटगन खिलाड़ियों का प्रैक्टिस कैम्प चल रहा है. 14 सितंबर तक चलने वाले इस कैम्प में ट्रैप और स्कीट के छह-छह निशानेबाज हिस्सा ले रहे हैं. शॉटगन स्पर्धाएं 21 सितंबर से टोयोटा सिटी की आइची प्रीफेक्चुरल जनरल शूटिंग गैलरी में शुरू होंगी.
वैभव उड़ाएंगे गर्दा, टीम इंडिया से गोल्ड की आस
दूसरी तरफ भारतीय दल में सबसे कम उम्र के खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी होंगे. महज 15 साल की उम्र में एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम का हिस्सा बनना उनकी तेजी से बढ़ती क्रिकेट यात्रा को दिखाता है. वैभव मेन्स टी20I टीम के साथ भारत के अभियान का हिस्सा होंगे. भारत पिछले एशियन गेम्स में जीता हुआ मेन्स टी20I खिताब बचाने उतरेगा और इस बार टीम की कप्तानी श्रेयस अय्यर करेंगे.
वैभव सूर्यवंशी ने इस साल इंग्लैंड दौरे के जरिए के इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया था. फिर जिम्बाब्वे सीरीज में 151 रन बनाकर उन्होंने अपनी प्रतिभा की एक बार फिर झलक दिखाई. दलीप ट्रॉफी 2026-27 में भी वैभव ने शानदार प्रदर्शन किया और ईस्ट जोन की खिताबी जीत के अहम किरदार रहे. अब वैभव एशियन गेम्स में धूम मचाना चाहेंगे.
जहां मेराज अहमद खान के पास तीन दशक से ज्यादा का अंतरराष्ट्रीय अनुभव है, जबकि वैभव सूर्यवंशी अभी अपने करियर के शुरुआती दौर में हैं. यही अंतर आइची-नागोया में भारतीय दल की खास तस्वीर पेश करेगा. एक खिलाड़ी अपने लंबे करियर में हासिल किए अनुभव के साथ पदक की तलाश करेगा, तो दूसरा कम उम्र में मिले बड़े मंच को अपनी पहचान मजबूत करने के मौके के तौर पर देखेगा.