पेरू के एंडीज इलाके में वैज्ञानिकों को छिपकली की एक नई प्रजाति मिली है. यह छिपकली दक्षिणी पेरू के अरेक्विपा इलाके में 4800 मीटर से ज्यादा की ऊंचाई पर मिली है. इसका नाम लिओलेमस आर्किपेंसिस रखा गया है. यह छिपकली काफी छोटी है और इसकी लंबाई 6 से 8 सेंटीमीटर के बीच है.
इस छिपकली के शरीर पर खास तरह के निशान हैं. नर और मादा के निशान एक जैसे नहीं हैं. मादा की पीठ पर चौकोर धब्बे होते हैं, जबकि नर की पीठ पर तिरछे धब्बे पाए जाते हैं. नर के शरीर पर सफेद स्केल्स भी हैं. ये उसे चट्टानों के बीच छिपने में मदद करते हैं. यह छिपकली पौधे खाने के साथ मकड़ियों, बीटल, ट्रू बग्स और कीड़ों के लार्वा जैसे छोटे जीव भी खाती है.
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यह नई छिपकली दक्षिणी पेरू के अरेक्विपा इलाके में एंडीज के पहाड़ों पर मिली है. यह जगह समुद्र तल से 4,800 मीटर से ज्यादा ऊंची है. यहां काफी ठंड होती है और कई जगहों पर चट्टानी जमीन है. वैज्ञानिकों ने इस इलाके में मिली छिपकली के शरीर और उसके रंग-रूप का ध्यान से स्टडी की. इसके शरीर पर बने निशानों और दूसरी खासियतों की तुलना पहले से पहचानी गई छिपकलियों से की गई. इसके बाद वैज्ञानिकों ने इसे एक नई प्रजाति माना.

नर और मादा दिखते हैं अलग
लिओलेमस आर्किपेंसिस की लंबाई सिर्फ 6 से 8 सेंटीमीटर है. लेकिन नर और मादा को उनके शरीर पर बने निशानों से अलग पहचाना जा सकता है. मादा की पीठ पर चौकोर धब्बे होते हैं. वहीं नर की पीठ पर तिरछे धब्बे होते हैं. नर के शरीर पर सफेद स्केल्स भी होते हैं. ये स्केल्स उसे चट्टानों के बीच छिपने में मदद करते हैं. इससे वह आसपास की चट्टानों में आसानी से मिल जाती है.
क्या खाती है ये छिपकली?
यह छिपकली पौधे भी खाती है और छोटे जीव भी. इसके खाने में मकड़ियां, बीटल, ट्रू बग्स और कीड़ों के लार्वा शामिल हैं. यह छिपकली अपने आसपास आसानी से मिलने वाले खाने पर निर्भर करती है. इतनी ऊंचाई पर रहने के बावजूद उसके इलाके में छोटे कीड़े और दूसरे जीव मौजूद हैं, जिन्हें वह खा सकती है.
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पेरू में छिपकलियों की 296 प्रजातियां
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस खोज से पेरू में पाई जाने वाली छिपकलियों के बारे में जानकारी बढ़ी है. रिसर्च का नेतृत्व करने वाली बायोलॉजिस्ट लिंग हुआमानी-वाल्देरामा ने कहा कि नई प्रजाति की खोज देश की जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण है. उनके मुताबिक, पेरू में अब तक छिपकली की 296 प्रजातियां दर्ज की जा चुकी हैं. अब लिओलेमस आर्किपेंसिस भी इस सूची में शामिल हो गई है.
इस नई प्रजाति पर की गई रिसर्च स्विस वैज्ञानिक जर्नल डाइवर्सिटी में प्रकाशित हुई है. वैज्ञानिकों के लिए ऐसी खोज इसलिए जरूरी होती है क्योंकि इससे पता चलता है कि अलग-अलग जीव कहां रहते हैं और अपने आसपास के माहौल में कैसे रहते हैं.