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Mars के चांद से धरती पर आएगी मिट्टी... जापान ने लॉन्च किया खास मिशन MMX

जापान की अंतरिक्ष एजेंसी JAXA ने मंगल के चांद फोबोस की खोज के लिए MMX मिशन लॉन्च किया है. H3 रॉकेट से रवाना हुआ यह अंतरिक्ष यान अगस्त 2027 में मंगल के पास पहुंचेगा. मिशन का लक्ष्य फोबोस की सतह से 10 ग्राम मिट्टी और चट्टानों के नमूने इकट्ठा करना है.

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जापान का MMX मिशन मंगल के चांद फोबोस के लिए रवाना हो गया है. (Photo: Jaxa)
जापान का MMX मिशन मंगल के चांद फोबोस के लिए रवाना हो गया है. (Photo: Jaxa)

जापान ने मंगल ग्रह के चांद फोबोस की खोज के लिए अपना खास अंतरिक्ष मिशन लॉन्च किया है. इसका नाम मार्टियन मून्स एक्सप्लोरेशन (MMX) है. जापान की अंतरिक्ष एजेंसी JAXA के नेतृत्व में यह मिशन मंगल के चांद की सतह से मिट्टी और चट्टानों के सैंपल इकट्ठा करेगा. इसके बाद इन नमूनों को धरती पर लाया जाएगा.

यह अंतरिक्ष यान H3 रॉकेट की मदद से जापान के तानेगाशिमा स्पेस सेंटर से आज रवाना हुआ. मिशन का लक्ष्य अगस्त 2027 में मंगल के पास पहुंचना है. इसके बाद यान फोबोस का करीब से अध्ययन करेगा. नमूनों को धरती पर लाने का लक्ष्य साल 2031 रखा गया है. 

मंगल के चांद कैसे बने, इसका जवाब खोजेगा मिशन

मंगल के दो चांद हैं. इनके नाम फोबोस और डीमोस हैं. सांइसटिस्ट लंबे समय से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि ये दोनों चांद कैसे बने. वैज्ञानिकों के बीच इस बात पर दो मुख्य विचार हैं. एक संभावना है कि ये दोनों चांद पहले छोटे क्षुद्रग्रह थे, जो मंगल के गुरुत्वाकर्षण के कारण उसके आसपास घूमने लगे. दूसरी संभावना है कि मंगल की किसी बड़ी खगोलीय पिंड से टक्कर हुई और उससे निकले मलबे से ये चांद बने.

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MMX मिशन इन सवालों के जवाब खोजने में मदद करेगा. स्पेसक्रॉर्ट फोबोस की सतह, उसकी बनावट, अंदरूनी संरचना और गुरुत्वाकर्षण का अध्ययन करेगा. इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि मंगल और उसके चांद किस तरह विकसित हुए.

इस मिशन का सबसे बड़ा टारगेट फोबोस की सतह से कम से कम 10 ग्राम मिट्टी और चट्टानों के नमूने इकट्ठा करना है. इसके लिए अंतरिक्ष यान को फोबोस की सतह पर उतरने की योजना है. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इन सैंपल्स की धरती पर लैब्स में जांच करने से फोबोस की उत्पत्ति को समझने में मदद मिलेगी. अगर उसकी सतह पर मंगल से आए पुराने पदार्थ मौजूद हुए, तो उनसे मंगल के इतिहास के बारे में भी नई जानकारी मिल सकती है.

मिशन के प्लेन के मुताबिक, नमूनों को लेकर लौटने वाला कैप्सूल साल 2031 में धरती के वायुमंडल में एंट्री करेगा. इसके बाद इसे ऑस्ट्रेलिया में वापस हासिल करने की योजना है. 

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दरअसल, MMX मिशन में इडेफिक्स नाम का एक छोटा रोवर भी शामिल है. इसे फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी CNES और जर्मन एयरोस्पेस सेंटर DLR ने मिलकर तैयार किया है. यह रोवर फोबोस की सतह की जांच करेगा. इसका काम जमीन की बनावट और वहां मौजूद संभावित मुश्किलों का पता लगाना है. इससे मुख्य अंतरिक्ष यान को नमूने इकट्ठा करने के लिए सही जगह चुनने में मदद मिलेगी. मिशन के दौरान अंतरिक्ष यान मंगल के दूसरे चांद डीमोस का भी अध्ययन करेगा. इससे वैज्ञानिकों को मंगल के दोनों चांदों की तुलना करने का मौका मिलेगा.

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NASA समेत कई अंतरिक्ष एजेंसियां शामिल

इस मिशन में जापान के अलावा अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी NASA, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ESA, फ्रांस की CNES और जर्मनी का DLR भी सहयोग कर रहे हैं. NASA ने इस मिशन के लिए MEGANE नाम का एक खास उपकरण दिया है. यह फोबोस की सतह पर मौजूद तत्वों की पहचान करने में मदद करेगा. इससे वैज्ञानिकों को पता चल सकेगा कि वहां किस तरह के पदार्थ मौजूद हैं.

मिशन की योजना करीब पांच साल की है. नमूने इकट्ठा करने और मंगल के दोनों चांदों का अध्ययन करने के बाद अंतरिक्ष यान मंगल के आसपास के क्षेत्र से निकलकर धरती की ओर लौटेगा.

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वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि फोबोस से मिलने वाले सैंपल मंगल और उसके चांदों के बनने की कहानी समझने में अहम साबित होंगे. इनसे यह भी पता लगाने में मदद मिल सकती है कि सौरमंडल के शुरुआती दौर में ग्रहों और उनके आसपास घूमने वाले पिंडों का विकास कैसे हुआ. 

अगर मिशन अपने लक्ष्य में सफल रहता है, तो मंगल के चांद से नमूने धरती पर लाने वाला यह पहला अभियान होगा. इन सैंपल्स की स्टडी से भविष्य में मंगल की खोज से जुड़े अंतरिक्ष अभियानों के लिए भी नई जानकारी मिल सकती है.

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