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2025 में मौसम की हदें पार, आसमानी आफतों से गईं 2700 से ज्यादा जान

2025 में चरम मौसम घटनाओं से भारत में 2760 से ज्यादा लोगों की मौत हुई. उत्तर प्रदेश सबसे प्रभावित (410 मौतें), उसके बाद मध्य प्रदेश (350) और महाराष्ट्र (270+). भारी बारिश-बाढ़ से 1370 जानें गईं. हिमालयी क्षेत्रों में क्लाउडबर्स्ट और भूस्खलन घातक हो गए हैं. ये आंकड़े जलवायु परिवर्तन की गंभीर चेतावनी हैं.

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हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले का पंचवक्त्र शिव मंदिर पर बाढ़ का पानी पहुंच गया था. (File Photo: PTI)
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले का पंचवक्त्र शिव मंदिर पर बाढ़ का पानी पहुंच गया था. (File Photo: PTI)

साल 2025 में देशभर में भारी बारिश, बाढ़, आकाशीय बिजली और अन्य चरम मौसमीय घटनाओं ने हजारों लोगों ने अपनी जान गवा दी. ये आपदाएं इस बात का साफ संकेत हैं कि भारत में मौसम तेजी से बदल रहा है और इसके असर अब और ज्यादा घातक होते जा रहे हैं.

2025 की भयावह तस्वीर

साल 2025 के आंकड़ों की समीक्षा से पता चलता है कि चरम मौसमीय घटनाओं के कारण देशभर में औसतन 2,760 लोगों की मौत हुई. इनमें आकाशीय बिजली, आंधीतूफान, भारी बारिश, बाढ़, हीट वेव, लैंडस्लाइड और कोल्ड वेव जैसी घटनाएं शामिल हैं.

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उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा प्रभावित

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश 2025 में सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य रहा. यहां चरम मौसमीय घटनाओं के कारण कुल 410 लोगों की मौत दर्ज की गई, जिनमें से 79 मौतें केवल भारी बारिश और बाढ़ के चलते हुईं.

India extreme weather 2025

मध्य प्रदेश दूसरे स्थान पर रहा, जहां 350 लोगों की जान गई. इनमें आकाशीय बिजली, आंधीतूफान, भारी बारिश, बाढ़, तेज हवाएं और हीट वेव शामिल रहीं. इनमें से 150 मौतें भारी बारिश, क्लाउडबर्स्ट और भूस्खलन के कारण हुईं.

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महाराष्ट्र में 270 से अधिक लोगों की मौत दर्ज की गई, जिनकी मुख्य वजह भारी बारिश, बाढ़, आकाशीय बिजली, आंधीतूफान, हीट वेव और ओलावृष्टि रही.

पूर्वी और मध्य भारत में भी भारी नुकसान

पूर्वी और मध्य भारत के कई राज्यों में भी जानमाल का भारी नुकसान हुआ. झारखंड में 200 लोगों की मौत हुई, जबकि बिहार में 174 लोगों ने जान गंवाई. इन मौतों की बड़ी वजह ऐसे चरम मौसमीय घटनाएं रहीं, जिन्हें अक्सर कम आंका जाता है, लेकिन ये भारत में सबसे घातक साबित होती हैं.

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हिमालयी क्षेत्र की बात करें तो जम्मूकश्मीर में 168 और हिमाचल प्रदेश में 166 मौतें दर्ज की गईं. यहां भारी बारिश, क्लाउडबर्स्ट, बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई, जो पहाड़ी इलाकों की बढ़ती संवेदनशीलता को दर्शाता है.

भारी बारिश और बाढ़ से सबसे ज्यादा तबाही

अगर केवल भारी बारिश, बाढ़, क्लाउडबर्स्ट और भूस्खलन से हुई मौतों को देखें तो हालात और भी गंभीर नजर आते हैं. 2025 में इन वजहों से कुल 1,370 लोगों की जान गई.

महाराष्ट्र इस श्रेणी में भी सबसे ऊपर रहा, जहां 210 मौतें दर्ज की गईं. इसके बाद हिमाचल प्रदेश (160) और जम्मूकश्मीर (155) का स्थान रहा. जम्मूकश्मीर में कुछ सबसे घातक घटनाएं सामने आईं, जिनमें किश्तवाड़ क्लाउडबर्स्ट में 63 और रियासी लैंडस्लाइड में 32 लोगों की मौत शामिल है.

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India extreme weather 2025

मध्य प्रदेश में भारी बारिश और बाढ़ के कारण 150 लोगों की जान गई. उत्तराखंड में भी स्थिति गंभीर रही, जहां 105 मौतें दर्ज की गईं. इनमें खीरगंगा क्लाउडबर्स्ट की घटना खास तौर पर भयावह रही, जिसमें 67 लोग या तो मारे गए या लापता हो गए. यह हादसा बताता है कि पहाड़ी इलाकों में अचानक और तेज बारिश कितनी खतरनाक साबित हो सकती है.

यहां तक कि आमतौर पर शुष्क माने जाने वाले राजस्थान और पंजाब भी इससे अछूते नहीं रहे. राजस्थान में 74 और पंजाब में 59 लोगों की मौत बाढ़ के कारण हुई.

2026 के लिए चेतावनी

2025 के आंकड़े एक कड़वी सच्चाई को सामने रखते हैं चरम मौसमीय घटनाएं अब पहले से कहीं ज्यादा बार, ज्यादा तीव्रता के साथ और ज्यादा जानलेवा हो रही हैं. मैदानी इलाकों में आकाशीय बिजली आज भी बड़ी जानलेवा बनी हुई है, जबकि तटीय और पहाड़ी राज्यों में बाढ़ और भूस्खलन सबसे ज्यादा मौतों की वजह बन रहे हैं.

जैसे ही भारत 2026 में कदम रख रहा है, ये आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं हैं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी हैं अगर समय रहते तैयारी और अनुकूलन नहीं किया गया, तो आने वाले साल और भी ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं.

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