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फूड, फॉरेस्ट और वाटर... किस-किस चीज पर अल-नीनो कैसे डालेगा असर?

वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट के मुताबिक अल-नीनो का असर सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रहेगा. बारिश के पैटर्न में बदलाव से पानी की मौजूदी, खाद्य उत्पादन और जंगलों की सेहत प्रभावित हो सकती है.

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अल-नीनो की वजह से क्लाइमेट चेंज हो रहा है, जिससे कई देशों के जंगलों में आग लगने की संभावना है. (File Photo: PTI)
अल-नीनो की वजह से क्लाइमेट चेंज हो रहा है, जिससे कई देशों के जंगलों में आग लगने की संभावना है. (File Photo: PTI)

अल-नीनो के बीच वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (WRI) ने चेतावनी दी है कि इसका असर पानी, खेती और जंगलों पर पड़ सकता है. कई क्षेत्रों में सूखा और पानी की कमी बढ़ सकती है, जबकि कुछ इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है. बढ़ती वैश्विक गर्मी के बीच इसका असर खाद्य उत्पादन और जंगलों में आग की घटनाओं पर भी दिख सकता है.

अल-नीनो की वजह से दुनिया के कई हिस्सों में बारिश का पैटर्न बदल सकता है. कैरेबियन, मध्य अमेरिका, उत्तरी ब्राजील, दक्षिणी अफ्रीका, इंडोनेशिया, फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया और भारत के कुछ हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है. इससे जलाशयों और भूजल पर दबाव बढ़ सकता है. 

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वहीं पेरू, इक्वाडोर, पूर्वी अफ्रीका और मध्य एशिया के कुछ इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है. इससे बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है और कई जगहों पर बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है.

खेती पर असर

अल-नीनो तापमान और बारिश दोनों को प्रभावित करता है, जिसका सीधा असर खेती पर पड़ता है. बारिश पर निर्भर क्षेत्रों में फसल उत्पादन घट सकता है. दक्षिणी अफ्रीका में पिछले अल-नीनो के दौरान अनाज उत्पादन में कमी दर्ज की गई थी, जिसके बाद कई देशों को खाद्यान्न आयात बढ़ाना पड़ा था. 

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El Nino food forest water

दुनिया पिछले कई सालों से लगातार बढ़ती गर्मी का सामना कर रही है. पिछले 11 साल सबसे ज्यादा गर्म रहे हैं. ऐसे में तापमान बढ़ने से मिट्टी तेजी से सूख सकती है और फसलों को नुकसान पहुंच सकता है.

सूखा, बाढ़ और ज्यादा गर्मी का असर खाद्य उत्पादन पर पड़ सकता है. इससे कई देशों में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं. WRI के मुताबिक, ईंधन और खादों की ऊंची कीमतें भी स्थिति को और मुश्किल बना सकती हैं. इससे किसानों की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर फसल उत्पादन पर पड़ सकता है.

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जंगलों में आग का खतरा

अल-नीनो कई क्षेत्रों में मौसम को ज्यादा गर्म और सूखा बना सकता है. इससे जंगलों में आग लगने और उसके तेजी से फैलने का खतरा बढ़ जाता है. दक्षिण अमेरिका में इसका असर सबसे ज्यादा देखा जाता है. 2015-16 और 2023-24 के मजबूत अल-नीनो के दौरान ब्राजील में जंगलों में आग की घटनाएं काफी बढ़ गई थीं. आंकड़ों के मुताबिक, 2016 और 2024 में 23 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जंगल आग से प्रभावित हुए. यह 2001 से 2025 के औसत के मुकाबले चार गुना ज्यादा था.

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किन क्षेत्रों में ज्यादा असर?

El Nino food forest water

WRI के अनुसार दक्षिण अमेरिका, दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा उन क्षेत्रों में शामिल हैं जहां अल-नीनो की वजह से सूखे और जंगलों में आग का खतरा बढ़ सकता है. वहीं कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं.

वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर इस बार सुपर अल-नीनो बनता है, तो इसका असर पहले के मुकाबले ज्यादा गंभीर हो सकता है. इसकी वजह यह है कि दुनिया पहले से ही बढ़ती गर्मी का सामना कर रही है. ऐसे में सूखा, फसलों को नुकसान और जंगलों में आग जैसी घटनाएं ज्यादा देखने को मिल सकती हैं.                                                                                                          रिपोर्ट: साक्षी प्रजापति 

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