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साइंस न्यूज़

अल-नीनो ने दिखाया खतरनाक ट्रेलर, रिकॉर्ड गर्मी अभी से; 2027 में आएगा असली असर!

el nino record temperature
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प्रशांत महासागर में बन रहा सुपर अल-नीनो इस समय बहुत मजबूत हो चुका है. जलवायु वैज्ञानिक जेम्स हैनसन के मुताबिक, भूमध्य रेखा के पास प्रशांत महासागर की ऊपरी 300 मीटर परत में जमा गर्मी 1997-98 के बेहद मजबूत अल-नीनो से भी ज्यादा हो गई है. खास बात यह है कि इस अल-नीनो का सबसे मजबूत दौर अभी आना बाकी है. Photo: AP

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इसका असर 2026 के आखिर और 2027 में दुनिया के तापमान और मौसम पर पड़ सकता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, अल-नीनो के दौरान समुद्र की ज्यादा गर्मी हवा में पहुंचती है. ऐसे में पहले से गर्म हो रही धरती का तापमान और बढ़ सकता है. ब्रिटेन के मौसम विभाग के वैज्ञानिकों ने भी कहा है कि अगर मौजूदा अनुमान सही रहे तो यह अल-नीनो हाल के सबसे मजबूत अल-नीनो में शामिल हो सकता है. Photo: AP

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वैज्ञानिक अल-नीनो की ताकत जानने के लिए समुद्र के अलग-अलग हिस्सों के तापमान को मापते हैं. जेम्स हैनसन के मुताबिक, समंदर की ऊपरी 300 मीटर परत में इस समय जमा गर्मी 1997-98 के बड़े अल-नीनो से भी ज्यादा है. हालांकि, अल-नीनो को मापने वाले निनो 3.4 पैमाने को लेकर वैज्ञानिकों की राय थोड़ी अलग है. Photo: AP

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मेट ऑफिस के वैज्ञानिक एडम स्काइफ के मुताबिक, इस क्षेत्र का तापमान अभी सामान्य से करीब 2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है. यह काफी ज्यादा है, लेकिन 1997-98 के पीक के दौरान करीब 2.5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी से अभी कम है. वहीं वैज्ञानिक डेनियल स्वेन का कहना है कि इस समय निनो 3.4 का स्तर साल के इस समय के हिसाब से रिकॉर्ड पर सबसे ज्यादा है. Photo: AP

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मौजूदा अल-नीनो को लेकर सबसे बड़ी चिंता यह है कि इसकी ताकत अभी और बढ़ सकती है. मेट ऑफिस के वैज्ञानिकों के मुताबिक, उनके पूर्वानुमानों में इससे पहले इतनी मजबूत अल-नीनो स्थिति नहीं देखी गई. Photo: AP
 

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अगर ये अनुमान सही रहते हैं तो 2026 के आखिरी महीनों और 2027 की शुरुआत में इसका असर ज्यादा दिखाई दे सकता है. वैज्ञानिक केविन ट्रेंबर्थ ने भी मौजूदा अल-नीनो को रिकॉर्ड पर सबसे बड़ा बताया है. हालांकि, इसे अब तक का सबसे मजबूत अल-नीनो कहने को लेकर वैज्ञानिकों में पूरी सहमति नहीं है. Photo: AP
 

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अल-नीनो का असर दुनिया के औसत तापमान पर भी पड़ता है. इसके दौरान समुद्र की गर्मी का कुछ हिस्सा हवा में पहुंच जाता है. इससे वैश्विक तापमान बढ़ सकता है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2027 में दुनिया का औसत तापमान काफी बढ़ सकता है और 2024 के रिकॉर्ड को भी चुनौती मिल सकती है. Photo: AP

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अल-नीनो बारिश और मौसम के पैटर्न को भी बदल सकता है. भारत समेत कई देशों में बारिश कम या ज्यादा हो सकती है. कुछ इलाकों में सूखा और ज्यादा गर्मी भी देखने को मिल सकती है. Photo: AP

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इस बार अल-नीनो ऐसे समय में मजबूत हो रहा है जब इंसानी गतिविधियों के कारण धरती पहले से ही गर्म है. इसलिए वैज्ञानिकों की चिंता सिर्फ अल-नीनो को लेकर नहीं है. अल-नीनो और ग्लोबल वार्मिंग का असर एक साथ पड़ने से तापमान और बढ़ सकता है. Photo: AP

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आने वाले महीनों में वैज्ञानिक समुद्र के तापमान और अल-नीनो की ताकत पर नजर रखेंगे. अगर मौजूदा अनुमान सही साबित होते हैं तो यह अल-नीनो पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ सकता है और 2027 में दुनिया की गर्मी को और बढ़ा सकता है. Photo: AP

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