पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के शेखूपुरा जिले में ईंट भट्ठों पर काम करने वाले मजदूर भीषण गर्मी के बीच काम कर रहे हैं. यहां बाहर का तापमान 40°C से ऊपर पहुंच जाता है, जबकि ईंट पकाने वाली भट्ठियों का तापमान 1000°C से ज्यादा होता है. Photo: AFP
मजदूरों को भट्ठे का तापमान बनाए रखने के लिए लगातार कोयला डालना और निगरानी करनी पड़ती है. तेज धूप, धूल, धुआं और भट्ठे की गर्मी के बीच उन्हें कई घंटे काम करना पड़ता है. बढ़ती गर्मी ने इन हालात को और मुश्किल बना दिया है. Photo: AFP
पाकिस्तान में पारंपरिक ईंट भट्ठों में ईंटों को पकाने के लिए बहुत ज्यादा तापमान की जरूरत होती है. मजदूर भट्ठे के छोटे छेदों से नीचे जल रहे हिस्से में कोयला डालते हैं और आग को लगातार बनाए रखते हैं. Photo: AFP
शेखूपुरा पाकिस्तान के बड़े ईंट उत्पादन वाले इलाकों में से एक है. यहां बड़ी संख्या में मजदूर इस काम पर निर्भर हैं. निर्माण का काम बढ़ने के साथ ईंटों की मांग भी बनी हुई है. Photo: AFP
इस काम के बदले कई मजदूरों को करीब 3 डॉलर प्रतिदिन यानी लगभग 250 रुपये मिलते हैं. कम आमदनी के बावजूद परिवार चलाने के लिए उन्हें लगातार काम करना पड़ता है. Photo: AFP
गर्मी के साथ लंबे समय तक भट्ठे के पास काम करने से शरीर पर गर्मी का असर बढ़ सकता है. धूल और कोयले के धुएं के कारण काम करने की जगह की स्थिति और कठिन हो जाती है. Photo: AFP
क्लाइमेट एंड क्लीन एयर कोइलेशन के 2018 के आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान में 18,000 से ज्यादा ईंट भट्ठे थे और इस सेक्टर में 10 लाख से ज्यादा लोग काम करते थे. ईंट भट्ठों में कोयला जलाने से धुआं और ब्लैक कार्बन भी निकलता है. इससे वायु प्रदूषण बढ़ता है और आसपास रहने वाले लोगों के साथ मजदूरों पर भी इसका असर पड़ता है. Photo: AFP
पाकिस्तान क्लाइमेट चेंज के असर से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में शामिल है. बढ़ते तापमान और हीटवेव के कारण बाहर खुले में काम करने वाले मजदूरों के लिए जोखिम लगातार बढ़ रहा है. Photo: AFP
ईंट भट्ठों पर काम करने वालों के लिए समस्या इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि उन्हें तेज गर्मी में भी काम रोकना आसान नहीं होता. रोज की कमाई रुकने का सीधा असर उनके परिवार की जरूरतों पर पड़ता है. Photo: AFP
गर्मी बढ़ने के साथ ऐसे कामगारों के लिए सुरक्षित कामकाजी माहौल बनाना जरूरी हो गया है. भट्ठों में कम प्रदूषण वाली तकनीक के इस्तेमाल के साथ मजदूरों को पानी, आराम और गर्मी से बचाव की सुविधाएं भी मिलनी चाहिए. Photo: AFP