अल-नीनो के प्रभाव से यूरोप और अमेरिका में एक बार फिर भीषण हीटवेव का खतरा बढ़ गया है. WMO और विभिन्न मौसम विभागों की चेतावनियों के अनुसार, तेजी से डेवलप हो रहे अल-नीनो के कारण इन महाद्वीपों में तापमान में असामान्य वृद्धि हो रही है. दिन की तेज गर्मी के साथ रातें भी गर्म रहने वाली हैं, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है. Photo: AFP
यूरोप में 23 जून से शुरू हुई हीटवेव ने कई देशों को अपनी चपेट में ले लिया है. फ्रांस ने 23 जून को अपना सबसे गर्म दिन दर्ज किया, जहां औसत तापमान 29.3 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया. कई विभागों में रेड अलर्ट जारी किया गया. स्पेन के कुछ इलाकों में 44 डिग्री तक तापमान पहुंचने की आशंका है. Photo: AFP
स्विट्जरलैंड, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली समेत 20 से ज्यादा देशों में लाल चेतावनी जारी की गई है. WMO के क्षेत्रीय केंद्र के अनुसार, अगले दो हफ्तों में पश्चिमी, मध्य और दक्षिणी यूरोप में गर्मी फैलेगी. तापमान सामान्य से 3 से 10 डिग्री ज्यादा रहने की संभावना है. कई जगहों पर 40 डिग्री से ऊपर पहुंच सकता है. Photo:AP
सबसे बड़ी चिंता गर्म रातों को लेकर है. ट्रॉपिकल नाइट- वह रात होती है जब तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गिरता. WMO और WHO के विशेषज्ञों के अनुसार, दिन में शरीर गर्म होने के बाद रात में ठंडक मिलनी चाहिए, लेकिन गर्म रातों में शरीर को आराम नहीं मिल पाता. इससे हृदय पर दबाव बढ़ता है. नींद खराब होती है. बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएं और आउटडोर वर्कर्स सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. Photo: Reuters
अमेरिका के मिडवेस्ट, डीप साउथ और दक्षिण-पश्चिमी इलाकों में भी भीषण गर्मी आने वाली है. नेशनल वेदर सर्विस (NWS) ने चेताया है कि आने वाले दिनों में मेजर से एक्सट्रीम हीट रिस्क रहेगा. सिर्फ दिन की गर्मी ही नहीं, रातें भी असामान्य रूप से गर्म रहेंगी. इससे शरीर को रिकवर होने का मौका नहीं मिलेगा. मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने, खासकर संवेदनशील समूहों की देखभाल करने की अपील की है. Photo: AFP
लंबे समय तक गर्मी और गर्म रातों से हीट स्ट्रेस बढ़ता है. शरीर पसीने और खून के फ्लो से ठंडा होता है, लेकिन नमी और लगातार गर्मी में यह प्रक्रिया प्रभावित होती है. इससे थकान, चक्कर, उल्टी और गंभीर मामलों में मौत तक हो सकती है. शहरों में अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव के कारण तापमान और भी ज्यादा रहता है. Photo: AP
WMO के अनुसार, पुरानी इमारतें, कम हरियाली और कंक्रीट की वजह से शहर ग्रामीण क्षेत्रों से ज्यादा गर्म हो जाते हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने लंदन क्लाइमेट वीक में कहा कि हमने अब तक के 11 सबसे गर्म साल देखे हैं और अल-नीनो का असर और बढ़ेगा. Photo: AP
WMO ने Early Warnings for All पहल के तहत समय पर चेतावनी देने पर जोर दिया है. WHO के साथ मिलकर हीट-हेल्थ अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं. Photo: AP
वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण हीटवेव अधिक आम और खतरनाक होती जा रही हैं. यूरोप और अमेरिका में यह सिर्फ मौसमी घटना नहीं, बल्कि जलवायु संकट का हिस्सा है. जरूरत है बेहतर पूर्वानुमान, शहरी नियोजन, हरित क्षेत्र बढ़ाने और लोगों को जागरूक करने की. Photo: AFP
अल-नीनो के कारण यूरोप और अमेरिका में फैल रही यह भीषण गर्मी हमें जलवायु परिवर्तन की वास्तविकता याद दिलाती है. दिन-रात का तापमान बढ़ना, स्वास्थ्य जोखिम और आर्थिक नुकसान - ये सब आने वाले समय की चेतावनी हैं. समय रहते तैयारियां और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ही हम इस संकट का सामना कर सकते हैं. Photo: AFP