सावन का पवित्र महीना शुरू हो चुका है, जो 28 अगस्त तक रहेगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पूरा महीना भगवान शिव की उपासना और तपस्या के लिए सबसे शुभ माना जाता है. ज्योतिषाचार्य शैलेंद्र पांडेय कहते हैं कि इसी महीने समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष का भगवान शिव ने पान किया था. विष की गर्मी शांत करने के लिए देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया था. तभी से सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है. हालांकि इस पवित्र महीने में शिवलिंग पर और भी कई दिव्य चीजें चढ़ाई जाती हैं, जिनके प्रयोग से व्यक्ति का भाग्य चमक जाता है. आइए जानते हैं.
शिवलिंग पर हर रोज चढ़ाएं ये चीज
सावन के प्रत्येक सोमवार का उपवास रखिए. यदि ऐसा संभव न हो पाए तो एक काम जरूर कर लीजिएगा. भगवान शिव के मंदिर जाकर शिलिंग पर एक लोटा जल और बेलपत्र जरूर अर्पित करें. मान्यता है कि शिवलिंग पर रोजाना जल और बेलपत्र चढ़ाने से मनोवांछित फल की प्राप्ति हो जाती है. आप चाहें तो जल की जगह दूध भी अर्पित कर सकते हैं. लेकिन ख्याल रखें की दूध चढ़ाने के लिए ताम्बे के लोटे या पात्र का उपयोग नहीं करना है. शिवलिंग पर जल या दूध और बेलपत्र चढ़ाने के बाद शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ करें.
इसके अलावा, सावन में भगवान शिव का चंदन, शहद, दही, घी, और पंचामृत से अभिषेक भी किया जा सकता है. शिवजी को धतूरा, भांग, आक के फूल (आकड़ा) और भस्म भी अत्यंत प्रिय है. इन चीजों से शिवलिंग का श्रृंगार करना न भूलें.
सावन में किन लोगों को करनी चाहिए शिवजी की पूजा
ज्योतिषविद मानते हैं कि सावन का महीना चातुर्मास के दौरान आता है. इस दौरान सृष्टि का संचालन भगवान शिव के हाथों में ही होता है. इसलिए पृथ्वी पर मौजूद हर प्राणी को भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए. हालांकि जिन लोगों के विवाह या जिनकी कुंडली में स्वास्थ्य व आयु से संबंधी समस्याएं हों, उन्हें इस महीने विशेष रूप से पूजा-अर्चना करनी चाहिए. सावन में शनि पूजा और विभिन्न ग्रह दोषों की शांति के उपाय भी विशेष फलदायी माने जाते हैं.
सावन में खान-पान को लेकर बरतें सावधानी
सावन के दौरान खान-पान को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. इस महीने पत्तेदार सब्जियां यानी साग खाने से बचने की बात कही गई है. कच्चे फल और कच्ची सब्जियां भी कम खाने की सलाह दी जाती है. भोजन को अच्छी तरह पकाकर खाने और नियमित रूप से गुनगुना पानी पीने की सलाह दी गई है. ताकि मौसम के कारण होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचा जा सके.