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महिलाएं ही क्यों, पुरुष क्यों नहीं रखते करवा चौथ का व्रत? ज्योतिषी ने बताई वजह

करवा चौथ पर सुहागनों के व्रत रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. लेकिन कई बार ऐसी बहस भी सामने आती हैं जहां कहा जाता है कि महिलाएं ही क्यों करवा चौथ का व्रत रखती हैं. यह व्रत पुरुष क्यों नहीं रखते हैं. प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आचार्य राज मिश्रा ने इस सवाल का जवाब दिया है.

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29 अक्टूबर को देशभर में सुहागनें पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखेंगी. (Photo: ITG)
29 अक्टूबर को देशभर में सुहागनें पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखेंगी. (Photo: ITG)

29 अक्टूबर यानी कल देशभर में महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखेंगी. कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को शास्त्रों में एक पवित्र तिथि माना गया है. इसलिए सुहागनें अपने पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं. शाम को चांद देखने से पहले महिलाएं पानी का एक घूंट भी गले के नीचे नहीं उतारती हैं. करवा चौथ पर सुहागनों के व्रत रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. लेकिन कई बार ऐसी बहस भी सामने आती हैं जहां कहा जाता है कि महिलाएं ही क्यों करवा चौथ का व्रत रखती हैं. यह व्रत पुरुष क्यों नहीं रखते हैं. प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आचार्य राज मिश्रा ने बड़ी ही सहजता के साथ इस सवाल का जवाब दिया है.

आचार्य राज मिश्रा कहते हैं, 'सनातन धर्म में महिलाओं को इतना खास दर्जा दिया गया है, जिसकी कोई कल्पना भी नहीं सकता. शास्त्रों, ग्रंथों में हर जगह धर्मपत्नी का वर्णन मिलता है. कहीं भी धर्म पति का जिक्र नहीं किया गया है. इसलिए धर्म पत्नी द्वारा किया गया कोई भी सिद्ध कार्य घर के लोगों के जीवन को बदल देने वाला होता है. करवा चौथ, अहोई अष्टमी और सकट चतुर्थी जैसे महत्वपूर्ण व्रत महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखते हैं.' उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि महिलाएं अगर करवा चौथ, सकट चौथ या अहोई अष्टमी जैसी तिथियों पर व्रत न करें तो पुरुषों का जीवन संकट में पड़ सकता है. और कोई एक ऐसा व्रत नहीं है कि पति न करे तो पत्नी के नाखून भी  दर्द हो जाए.

हिंदू धर्म में स्त्रियों को देवी का दर्जा
सनातन धर्म की परंपरा में स्त्री को सृजन, शक्ति, ज्ञान, समृद्धि और करुणा का प्रतीक माना गया है. स्त्री को देवी का दर्जा देने के पीछे उसके त्याग, सृजन शक्ति, करुणा और मातृत्व जैसे गुणों को सम्मान देना है. इसलिए धर्म ग्रंथों में देवी उपासना के साथ-साथ स्त्री के सम्मान का वर्णन भी मिलता है. ऐसी मान्यता है कि जहां स्त्रियों का सम्मान होता है, वहां देवता हमेशा प्रसन्न रहते हैं. उनकी मौजूदगी के बिना कोई भी शुभ कार्य, रस्म, संस्कार पूरे नहीं किए जा सकते हैं. घर में लगभग सभी शुभ कार्य स्त्रियों के हाथ से कराने की परंपरा ही चली आ रही है.

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करवा चौथ 2026 की तिथि
करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है. इस साल चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को रात 1 बजकर 6 मिनट पर शुरू होगी और उसी दिन रात 10 बजकर 9 मिनट पर समाप्त हो जाएगी. ऐसे में करवा चौथ का व्रत 29  अक्टूबर दिन गुरुवार को रखा जाएगा.

करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त
करवा चौथ पर पूजा के लिए शुभ समय शाम 5 बजकर 38 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक रहेगा. इस दौरान महिलाएं विधि-विधान से पूजा करती हैं और व्रत कथा सुनती हैं. ध्यान रखें कि पूजा के मुहूर्त में शहर के अनुसार अंतर हो सकता है. ऐसे में व्रत और पूजा की तैयारी करने से पहले अपने स्थानीय पंचांग में समय जरूर देख लें.

करवा चौथ पर कितने बजे निकलेगा चांद?
करवा चौथ के दिन चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है. इस साल चांद रात करीब सवा 8 बजे निकलने की संभावना है. दिल्ली में चंद्रमा के दर्शन लगभग रात 8 बजकर 12 मिनट पर हो सकते हैं. हालांकि, चंद्रोदय का समय हर शहर में एक जैसा नहीं होता. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, मुंबई, जम्मू और अहमदाबाद समेत अलग-अलग शहरों में चांद निकलने के समय में अंतर हो सकता है.

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