तीज-त्योहारों पर घर की रसोई में विशेष पकवान बनाने और चूल्हे पर कड़ाही चढ़ाने का विशेष महत्व है. विशेषकर पंचदिवसीय दीपोत्सव में पांचों दिन घर के चूल्हे पर कड़ाही जरूरी चढ़ानी चाहिए. इस साल पंचदिवसीय दीपोत्सव 6 नवंबर से लेकर 11 नवंबर तक रहेगी. इस दौरान धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दिवाली, गोवर्धन और भाई दूज जैसे बड़े त्योहार मनाए जाएंगे. इन त्योहारों पर घर में अग्नि प्रज्ज्वलित करके शुद्ध भोजन और पकवान तैयार करने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. परिवार के लोगों में भी एक दूसरे के प्रति लगाव व प्रेम बढ़ता है.
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में अग्नि तत्व का प्रमुख स्थान दक्षिण-पूर्व यानी आग्नेय कोण से लेकर दक्षिण दिशा तक माना जाता है. सामान्यतः इसी क्षेत्र में रसोई का निर्माण करना अनुकूल माना जाता है. रसोई घर का वह स्थान है, जहां अग्नि के माध्यम से कच्चा अन्न भोजन के रूप में परिवर्तित होता है. अग्नि को ऊर्जा, शुद्धता और परिवर्तन का प्रतीक माना गया है. यह स्थान आपकी समृद्धि और आर्थिक स्थिति को भी दर्शाता है. इसलिए विशेष रूप से त्योहारों के अवसर पर रसोई में अग्नि का प्रज्ज्वलित रहना और घर में पकवान बनना शुभ माना जाता है.
रेडीमेड फूड बदल रहा त्योहारों का स्वरूप
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में त्योहार मनाने का तरीका भी बदल रहा है. पहले दीपावली और अन्य तीज-त्योहारों पर घरों में कई दिनों पहले से पकवान बनाने की तैयारियां शुरू हो जाती थीं. घर की महिलाएं और परिवार के अन्य सदस्य मिलकर मिठाइयां, नमकीन और विशेष व्यंजन तैयार करते थे. इससे रसोई में पूरे दिन चहल-पहल रहती थी और त्योहार का उत्साह घर के प्रत्येक सदस्य तक पहुंचता था.
लेकिन अब समय की कमी और सुविधा के चलते लोग बाजार से रेडीमेड मिठाइयां, नमकीन और भोजन मंगाने लगे हैं. यहां तक कि दीपावली जैसे प्रमुख त्योहार के दिन भी कई परिवार घर में भोजन बनाने के बजाय बाहर से खाना मंगाना पसंद करते हैं. वास्तु के अनुसार त्योहारों पर इस परंपरा को पूरी तरह अपना लेना उचित नहीं है. कम से कम इन विशेष दिनों में घर की रसोई में कड़ाही जरूर चढ़नी चाहिए और परिवार के लिए कुछ न कुछ विशेष पकवान तैयार करना चाहिए.
5 दिन 5 अलग-अलग पकवान
पंचदिवसीय दीपोत्सव में धनतेरस, रूप चौदस, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज जैसे पर्व आते हैं. इन पांचों दिनों में घर की रसोई में अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार अलग-अलग पकवान बनाए जा सकते हैं. जरूरी नहीं कि प्रतिदिन बहुत अधिक व्यंजन तैयार किए जाएं. एक मिठाई, कोई पारंपरिक पकवान या परिवार की पसंद का विशेष भोजन भी पर्याप्त है. मुख्य उद्देश्य घर की रसोई में अग्नि प्रज्ज्वलित करना और परिवार के लिए अपने हाथों से भोजन तैयार करना है.
यह परंपरा केवल वास्तु में अग्नि तत्व को सक्रिय रखने की मान्यता से ही नहीं जुड़ी है, बल्कि परिवार को एक साथ जोड़ने का भी माध्यम है. घर में तैयार भोजन में अपनापन और त्योहार की आत्मीयता होती है. इसलिए दीपोत्सव पर बाजार के व्यंजनों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय पांचों दिन घर के चूल्हे पर कड़ाही चढ़ाएं. इससे त्योहार की पारंपरिक गरिमा भी बनी रहेगी और घर में उत्सव का उल्लास भी बढ़ेगा.