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Chandra Grahan 2026: कल इतने बजे लगेगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण, नोट कर लें अभी से टाइमिंग

Chandra Grahan 2026: 28 अगस्त को लगने वाला ग्रहण आंशिक चंद्र ग्रहण है. भारतीय समयानुसार, चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को सुबह 6 बजकर 55 मिनट पर शुरू हो जाएगा. साल के आखिरी चंद्र ग्रहण की अवधि 5 घंटे 38 की रहेगी.

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28 अगस्त को चंद्र ग्रहण सुबह 6 बजकर 55 मिनट से शुरू होगा (Photo: ITG)
28 अगस्त को चंद्र ग्रहण सुबह 6 बजकर 55 मिनट से शुरू होगा (Photo: ITG)

Chandra Grahan 2026: सावन पूर्णिमा का दिन इस बार खगोलीय घटना के लिहाज से खास रहने वाला है. द्रिक पंचांग के अनुसार, 28 अगस्त 2026 को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. हालांकि, भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां रहने वाले लोगों को इसके सूतक काल को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है. खास बात यह है कि यह एक उपच्छाया (Penumbra) चंद्र ग्रहण है, जो विश्व में आंशिक (Partial) रूप से दिखाई देगा.

वहीं, जो लोग पूर्णिमा का व्रत रखते हैं, उनके लिए भी इस बार तारीख को लेकर थोड़ा बदलाव रहेगा. आइए जानते हैं चंद्र ग्रहण कहां-कहां दिखाई देगा, किस समय नजर आएगा और ग्रहण के दौरान किन धार्मिक कार्यों को शुभ माना जाता है.

कितने बजे लगेगा भारत में चंद्र ग्रहण? (Chandra Grahan 2026 Date & Timings)

सावन मास की पूर्णिमा यानी 28 अगस्त को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा. इस दौरान चंद्रमा के एक हिस्से पर पृथ्वी की छाया पड़ती हुई दिखाई देगी. भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा. ऐसे में भारतीय समय के अनुसार ग्रहण को लेकर किसी तरह की घबराने की आवश्यकता नहीं है.

पंचांग के अनुसार, वैसे तो चंद्र ग्रहण की शुरुआत सुबह 6 बजकर 55 मिनट से हो जाएगी. लेकिन, चंद्र ग्रहण का आंशिक रूप सुबह 8 बजकर 4 मिनट पर दिखाई देगा. इस ग्रहण की पीक टाइमिंग सुबह 9 बजकर 43 मिनट रहेगी. वहीं, ग्रहण का समापन दोपहर 12 बजकर 30 मिनट रहेगी. 

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पूर्णिमा का व्रत कब रखा जाएगा? (Sawan Purnima 2026 Date)

जिन लोगों के लिए पूर्णिमा का व्रत महत्वपूर्ण है, उन्हें इस बार तिथि को लेकर विशेष ध्यान रखना चाहिए. चंद्र ग्रहण के कारण पूर्णिमा का व्रत 27 अगस्त को रखने की बात कही जा रही है. व्रत और पूजा से जुड़े नियमों का पालन करते समय अपने क्षेत्र के पंचांग को जरूर देख लें, क्योंकि स्थानीय गणना के आधार पर तिथि और समय में थोड़ा अंतर हो सकता है.

भारत में नहीं दिखेगा चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2026 In India or not)

इस चंद्र ग्रहण की सबसे खास बात यह है कि भारत में यह दिखाई नहीं देगा. ग्रहण पश्चिमी एशिया के कुछ हिस्सों के अलावा दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका और यूरोप के कई क्षेत्रों में देखा जा सकेगा.

जहां ग्रहण दिखाई देता है, वहां धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण शुरू होने से करीब 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू माना जाता है. लेकिन भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा. इसका मतलब यह है कि भारत में रहने वाले लोग ग्रहण और सूतक के कारण शुभ या मांगलिक कार्यों को रोकने के लिए बाध्य नहीं होंगे.

चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें? (Chandra Grahan Dos)

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जिन स्थानों पर चंद्र ग्रहण दिखाई देता है, वहां धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ और मंत्र जाप करने का महत्व बताया गया है. इस दौरान व्यक्ति अपने आराध्य देव का ध्यान कर सकता है और धार्मिक ग्रंथों का पाठ कर सकता है.

ग्रहण के समय महामृत्युंजय मंत्र, चंद्र देव के मंत्र, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने की परंपरा भी बताई जाती है. श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ या भगवान के नाम का जाप भी किया जा सकता है. मान्यता है कि ग्रहण के दौरान मन को शांत रखने और आध्यात्मिक गतिविधियों में समय बिताने से सकारात्मक भाव बना रहता है.

ग्रहण से पहले खाने-पीने की चीजों में डालें तुलसी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण से पहले भोजन, पानी और दूध जैसी चीजों में तुलसी की पत्तियां डालने की परंपरा है. हालांकि, यह एक धार्मिक मान्यता है और इसका पालन व्यक्ति अपनी आस्था के अनुसार कर सकता है.

ग्रहण खत्म होने के बाद क्या करें?

ग्रहण समाप्त होने के बाद धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्नान करना शुभ माना जाता है. इसके बाद घर की साफ-सफाई करने और पूजा स्थल को व्यवस्थित करने की परंपरा है.

घर में गंगाजल का छिड़काव किया जा सकता है. मंदिर की सफाई करने के बाद भगवान को स्वच्छ वस्त्र अर्पित किए जाते हैं. इसके बाद विधि-विधान से पूजा और प्रार्थना की जा सकती है.

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भारत में सूतक नहीं, फिर भी क्या सावधानी रखें?

क्योंकि यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं माना जाएगा. ऐसे में आम लोगों को ग्रहण के नाम पर अपने सामान्य धार्मिक या शुभ कार्य रोकने की जरूरत नहीं है. फिर भी, अगर कोई व्यक्ति ग्रहण से जुड़े पारंपरिक नियमों और धार्मिक मान्यताओं का पालन करना चाहता है, तो वह अपनी आस्था के अनुसार पूजा-पाठ, मंत्र जाप और स्नान आदि कर सकता है.

क्या चंद्र ग्रहण का रक्षाबंधन पर कोई असर पड़ेगा?

28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाएगा और इसी दिन उपच्छाया चंद्र ग्रहण भी होगा. लेकिन रक्षाबंधन के पर्व पर इस ग्रहण का कोई विशेष प्रभाव नहीं माना जा रहा है.

रक्षाबंधन में मुख्य रूप से भद्रा काल का विचार किया जाता है. इस बार 28 अगस्त को भद्रा की बाधा नहीं रहेगी. वहीं यह उपच्छाया चंद्र ग्रहण है और भारत में दिखाई भी नहीं देगा. इसलिए, इसे लेकर सूतक या किसी विशेष धार्मिक प्रतिबंध की बात नहीं है. ऐसे में बहनें सुबह से शाम तक अपनी सुविधा और शुभ समय के अनुसार भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं. ग्रहण के कारण रक्षाबंधन की पूजा या त्योहार मनाने में कोई रुकावट नहीं मानी जाएगी.

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यानी इस बार रक्षाबंधन को लेकर किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है. उपच्छाया चंद्र ग्रहण का भारत में सूतक नहीं होगा और रक्षाबंधन का पर्व पूरे उत्साह और प्रेम के साथ मनाया जा सकेगा.

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