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श्री नर्मदा आरती (Shri Narmada Aarti)

श्री नर्मदा आरती

मां नर्मदा की आरती करने या सुनने से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलने की धार्मिक मान्यता है. आरती के दिव्य वातावरण से तनाव कम होने का अनुभव होता है. माना जाता है कि नर्मदा जी की आराधना से पापों का नाश, सुख-समृद्धि और जीवन में आध्यात्मिक संतुलन प्राप्त होता है.

श्री नर्मदा आरती
श्री नर्मदा आरती

ॐ जय जगदानन्दी,मैया जय आनंद कन्दी।
ब्रह्मा हरिहर शंकर रेवा,शिव हरि शंकर रुद्री पालन्ती॥
ॐ जय जगदानन्दी...॥

 

देवी नारद शारद तुम वरदायक,अभिनव पदचण्डी।
सुर नर मुनि जन सेवत,सुर नर मुनि शारद पदवन्ती॥
ॐ जय जगदानन्दी...॥

 

देवी धूमक वाहन राजत,वीणा वादयन्ती।
झूमकत झूमकत झूमकत,झननन झननन रमती राजन्ती॥
ॐ जय जगदानन्दी...॥

 

देवी बाजत ताल मृदंगा,सुरमण्डल रमती।
तोड़ीतान तोड़ीतान तोड़ीतान,तुरड़ड़ तुरड़ड़ तुरड़ड़ रमती सुरवन्ती॥
ॐ जय जगदानन्दी...॥

 

देवी सकल भुवन पर आप विराजत,निशदिन आनन्दी।
गावत गंगा शंकर, सेवत रेवाशंकर तुम भव मेटन्ती॥
ॐ जय जगदानन्दी...॥

 

मैया जी को कंचन थाल विराजत,अगर कपूर बाती।
अमरकंठ में विराजत,घाटन घाट कोटी रतन जोती॥
ॐ जय जगदानन्दी...॥

 

मैया जी की आरती निशदिन पढ़ि गावें,हो रेवा जुग जुग नर गावें।
भजत शिवानंद स्वामी,जपत हरि मन वांछित फल पावें॥
ॐ जय जगदानन्दी...॥

 

-----समाप्त-----

समाप्त

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