शशि थरूर की कांग्रेस आलाकमान से हुई मुलाकात काफी महत्वपूर्ण है. हर लिहाज है, और हर पक्ष के लिए महत्वपूर्ण है. शशि थरूर के लिए. राहुल गांधी के लिए - और कांग्रेस अध्यक्ष होने के नाते मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए भी.
ये मुलाकात कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण इसलिए भी है, क्योंकि केरल में अप्रैल-मई में ही विधानसभा के लिए चुनाव होने हैं, जहां से शशि थरूर लगातार चौथी बार सांसद हैं. और, मुलाकात के बाद पूछे जाने पर शशि थरूर ने खुद का सांसद होना ही महत्वपूर्ण बताया है.
शशि थरूर केरल के ही तिरुवनंतपुरम से सांसद हैं. और, हाल ही में केरल के बड़े नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक को शशि थरूर ने स्किप किया था. जिस मीटिंग से शशि थरूर दूर रहे, उसी मीटिंग में विधानसभा चुनावों के लिए रणनीतियों को अंतिम रूप दिया गया था.
शशि थरूर की राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ मुलाकात करीब दो घंटे चली, और उसके बाद कांग्रेस सांसद ने सोशल साइट X पर लिखा, '...सब कुछ ठीक है और सब साथ साथ हैं.'
मुलाकात हुई, क्या बात हुई
आज (29 फरवरी, 2026) की मुलाकात शशि थरूर के लिए कांग्रेस में होने के हिसाब से दुर्लभ अवसरों में शुमार की जाएगी. ऐसा ही मौका सितंबर, 2022 में दर्ज किया गया था. जब शशि थरूर कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ने से पहले परमिशन के लिए सोनिया गांधी से मिलने गए थे.
लेकिन, शशि थरूर उस मीटिंग में भी नहीं पहुंच सके, जो कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी के आवास पर बुलाई गई थी. ये मीटिंग संसद के बजट सत्र से पहले पार्टी की संसदीय रणनीति समूह की थी. सूत्रों के अनुसार आई खबर के मुताबिक, शशि थरूर को दुबई से दिल्ली पहुंचने में रात के 8 बज गए थे. शशि थरूर एक साहित्य समारोह में हिस्सा लेने दुबई गए हुए थे. सुना है कि शशि थरूर की मीटिंग में गैरहाजिरी को सोनिया गांधी ने भी नोटिस किया था.
पिछली बैठक में भी शामिल न हो पाने की वजह शशि थरूर ने दुबई का ट्रेवल प्लान फाइनल हो जाना बताया था. शशि थरूर ने बताया था कि मीटिंग का बुलावा दो दिन पहले ही मिला था, जब जाने का कार्यक्रम वो फाइनल कर चुके थे.
शशि थरूर और गांधी परिवार का 36 का रिश्ता तो काफी पुराना है. अक्सर कांग्रेस नेतृत्व शशि थरूर के बयानों से परेशान रहता है, लेकिन हाल फिलहाल वो खुद राहुल गांधी के व्यवहार से आहत बताए जा रहे थे. कुछ दिन पहले ही राहुल गांधी केरल के दौरे पर थे, और कोच्चि के एक कार्यक्रम में मौजूद होने के बावजूद मंच से शशि थरूर का नाम नहीं लिया था. अपनी नाराजगी के कारण ही वो उस मीटिंग में भी शामिल नहीं हुए थे, जिसके बाद उनके पार्टी की बैठक से दूरी बनाने को लेकर सवाल उठाया गया.
हालांकि, नाराजगी के सवाल पर शशि थरूर ने कहा था कि जो भी मुद्दे हैं, वो कांग्रेस आलाकमान तक खुद पहुंचाएंगे. बोले, मुझे जो भी मुद्दे उठाने हैं, मैं उन्हें सीधे पार्टी लीडरशिप तक पहुंचाऊंगा... कोई शक नहीं कि मुझे वह मौका मिलेगा, खासकर तब जब संसद सत्र के दौरान सभी साथ होंगे.
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलने के बाद शशि थरूर ने सोशल साइट एक्स पर लिखा है, 'आज कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी के साथ विभिन्न विषयों पर हुई गर्मजोशी भरी और रचनात्मक विमर्श के लिए धन्यवाद... देश की जनता की सेवा में आगे बढ़ते हुए, हम सभी एक सोच और एक ही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.'
'वोटर का भरोसा हासिल है'
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात के बाद मीडिया ने शशि थरूर से केरल चुनाव से पहले ये जानना चाहा कि उनकी नाराजगी कम हुई या नहीं. वो चुनाव प्रचार करेंगे या नहीं? क्या केरल का मुख्यमंत्री बनने में भी उनकी दिलचस्पी है - शशि थरूर ने हर सवाल पर राजनीतिक बयान जारी किया.
चुनाव कैंपेन को लेकर शशि थरूर बोले, मैंने हमेशा पार्टी के लिए प्रचार किया है... मैंने कहां प्रचार नहीं किया है?
मुख्यमंत्री बनने को लेकर भी अपने मन की बात बताई. न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में शशि थरूर ने कहा, नहीं. यह कभी मुद्दा नहीं था... सच कहूं तो, मुझे किसी भी चीज के लिए उम्मीदवार बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है. मैं एक सांसद हूं, और मुझे संसद में वोटर्स का भरोसा हासिल है... यही मेरा काम है.
बातों ही बातों में शशि थरूर ने ये भी बता दिया कि वो लगातार चार बार से लोकसभा का चुनाव तिरुवनंतपुरम से जीत रहे हैं.और, ये भी जताने की कोशिश की कि 2024 में तो बीजेपी उम्मीदवार राजीव चंद्रशेखर को भी हराकर चुनाव जीते हैं.
केरल चुनाव से पहले शशि थरूर और कांग्रेस के बीच कोई भी विवाद दोनों के लिए घातक है, ये बात शशि थरूर और कांग्रेस आलाकमान भी समझता है. शशि थरूर ने कहा भी था कि जो भी इश्यू है, वो सीधे आलाकमान को ही बताएंगे, और बता भी दिया. आलाकमान ने भी मिलने और पूरी बात सुनने के लिए लंबा वक्त निकाला.
2026 में जिन राज्यों में भी विधानसभा के लिए चुनाव होने जा रहे हैं, केरल ही ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस के लिए स्कोप भी है. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने नो-एंट्री का बोर्ड लगा रखा है, तमिलनाडु में डीएमके नेता एमके स्टालिन बिहार से ज्यादा कुछ तो देने से रहे, असम में रस्मअदायगी के लिए वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा को भेज ही दिया गया है - ले देकर केरल ही बचता है, जहां 2021 में परंपरा तोड़ते हुए पी. विजयन ने सत्ता में वापसी कर ली थी, लेकिन बार बार तो वैसा होने से रहा.