2.50 मिनट के सेल्फी वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया, वह था देश के छात्रों का भरोसा. NEET पेपर लीक को लेकर कई दिनों से चल रहे गुस्से और विरोध के बीच उन्होंने साफ कहा कि पेपर लीक कोई मामूली अपराध नहीं है. दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. सरकार की तरफ से पहली बार प्रधानमंत्री ने खुद कैमरे के सामने आकर इस मुद्दे पर बात की, इसलिए इसका असर भी अलग है. वीडियो रात करीब 12 बजे आया, यानी टाइमिंग भी Gen-Z के लिहाज से परफेक्ट रही. शाम 4 बजे तक यह वीडियो 3 करोड़ से ज्यादा बार देखा जा चुका है. करीब 35 हजार लोगों ने इस पर कमेंट किया है, और करीब 60 हजार बार इसे शेयर किया गया है. इस वीडियो को लाइक करने वालों की तादाद 2 लाख तक पहुंच रही है.
इस वीडियो की मैसेजिंग के अलावा इसकी एक और बात पर जमकर चर्चा हुई. वह थी वीडियो की फ्रेमिंग. प्रधानमंत्री ने संदेश तो भरोसा दिलाने वाला दिया, लेकिन कैमरा पकड़ने का तरीका वीडियो को उतना असरदार नहीं बना पाया, जितना वह हो सकता था.
वीडियो में मोबाइल कैमरा चेहरे के काफी करीब दिखाई देता है. इसकी वजह से चेहरा फ्रेम का बड़ा हिस्सा घेर लेता है. कैमरा नीचे की तरफ से भी रिकॉर्ड करता दिखता है. ऐसे एंगल में माथा छोटा, ठुड्डी बड़ी और चेहरे का आकार थोड़ा बदला हुआ नजर आता है. दर्शक का ध्यान कई बार बात से हटकर चेहरे की बनावट और कैमरे के मूवमेंट पर चला जाता है.
यह कोई राजनीतिक सवाल नहीं, बल्कि कैमरे की सामान्य तकनीक का मामला है. आज ज्यादातर कंटेंट क्रिएटर और प्रोफेशनल फोटोग्राफर यही सलाह देते हैं कि अगर आप सीधे लोगों से बात कर रहे हैं, तो कैमरे की पोजिशन बहुत मायने रखती है. सही एंगल भरोसा बढ़ाता है और गलत एंगल ध्यान भटका सकता है. पीएम मोदी के वीडियो में मोबाइल कैमरा इतना नजदीक आ गया है कि देखने वाले के लिए उनकी बातों से ज्यादा उनकी सफेदी हावी हो रही थी.
कैमरा एंगल पर एक्सपर्ट टिप...
दुनिया के जाने-माने पोर्ट्रेट और मोबाइल फोटोग्राफर पीटर मैकिनन अक्सर बताते हैं कि सेल्फी या वीडियो रिकॉर्ड करते समय कैमरा आंखों के बराबर या उससे थोड़ा ऊपर होना चाहिए. इससे चेहरा स्वाभाविक दिखता है और देखने वाले को ऐसा लगता है कि सामने वाला सीधे उसी से बात कर रहा है. वहीं मोबाइल फोटोग्राफी के एक्सपर्ट डैनियल बेडा भी सलाह देते हैं कि कैमरा चेहरे से लगभग 50 से 70 सेंटीमीटर दूर हो तो चेहरे का अनुपात ज्यादा नेचुरल दिखाई देता है. बहुत पास लाने पर वाइड एंगल लेंस चेहरे को हल्का विकृत कर देता है.
अगर प्रधानमंत्री मोदी के इस वीडियो की बात करें, तो कैमरा करीब आधा से एक फुट ज्यादा दूर रखा जाता और उसे आंखों की सीध में या हल्का ऊपर रखा जाता, तो वीडियो और भी प्रभावी दिखता. इससे चेहरे की बनावट सामान्य रहती, बैकग्राउंड भी थोड़ा नजर आता और दर्शक का पूरा ध्यान उनके शब्दों पर रहता.
मोदी जानते हैं, लेकिन...
एक और बात ध्यान देने वाली है. प्रधानमंत्री मोदी मंच से भाषण देने में बेहद अनुभवी हैं. उनकी बॉडी लैंग्वेज, आंखों का संपर्क और आवाज का उतार-चढ़ाव उनकी ताकत माने जाते हैं. लेकिन सेल्फी वीडियो का मीडियम बिल्कुल अलग है. यहां कैमरे के पीछे कोई कैमरामैन नहीं होता, इसलिए सारी जिम्मेदारी मोबाइल पकड़ने वाले पर होती है. यही वजह है कि दुनिया के बड़े नेता भी अक्सर ऐसे वीडियो रिकॉर्ड करते समय छोटा ट्राइपॉड, सेल्फी स्टिक या किसी स्थिर सहारे का इस्तेमाल करते हैं.
इस वीडियो में चलते हुए रिकॉर्डिंग करने की वजह से हल्का कंपन भी महसूस होता है. हालांकि यह वीडियो को सहज और बिना बनावट वाला बनाता है, लेकिन अगर उद्देश्य देशभर के छात्रों को भरोसा देना हो, तो थोड़ा स्थिर फ्रेम संदेश को और ज्यादा गंभीर बना सकता था.
खैर, वीडियो ने अपना काम तो कर ही दिया
फिर भी इस वीडियो की सबसे बड़ी ताकत इसकी सादगी है. इसमें कोई बड़ा सेट नहीं है. हां, पीएम मोदी ने X पर जब यह वीडियो पोस्ट किया तो उस पर कई यूजर ये बहस कर रहे थे कि प्रधानमंत्री टेलीप्रॉम्प्टर से पढ़ रहे हैं. जबकि कुछ यूजर ऐसा भी लिख रहे हैं कि लगता है कि प्रधानमंत्री सीधे मोबाइल उठाकर छात्रों से बात कर रहे हैं.
आखिर में यही कहा जा सकता है कि इस वीडियो का सबसे मजबूत हिस्सा उसका मैसेज था. प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि पेपर लीक को सामान्य अपराध नहीं माना जाएगा और छात्रों के भविष्य से खेलने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी. यह संदेश उन लाखों छात्रों तक पहुंचा, जो पिछले कई दिनों से जवाब का इंतजार कर रहे थे.
हां, अगर कैमरा चेहरे से लगभग 60 सेंटीमीटर दूर होता, आंखों की सीध में या करीब 10 से 15 डिग्री ऊपर रखा जाता और वीडियो थोड़ा ज्यादा स्टेबल होता, तो यह सिर्फ मजबूत मैसेज ही नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से भी एक बेहतरीन सेल्फी वीडियो माना जाता. कई बार छोटे-से कैमरा एंगल का फर्क बड़े संदेश की ताकत को और बढ़ा देता है.