असम में आगे चलकर मुख्य चुनावी मुद्दा जो भी बने, लेकिन फिलहाल तो महिलाओं के खाते में भेजे गए 9 हजार रुपयों का मामला सबसे ज्यादा चर्चा में है. हिमंता बिस्वा सरमा की इस पहल की तुलना बिहार चुनाव में नीतीश कुमार की स्कीम से हो रही है. बिहार चुनाव के दौरान नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना के तहत 10-10 हजार भेजे थे - असम विधानसभा के लिए 9 अप्रैल को चुनाव होने जा रहे हैं.
जैसे पश्चिम बंगाल में बीजेपी को ऐसे मुद्दों पर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस से जूझना पड़ता है, असम में सामने से कांग्रेस और बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF है. हिमंता बिस्व सरमा कांग्रेस नेता गौरव गोगोई को 'पाकिस्तानी एजेंट' बोलकर टार्गेट कर रहे हैं, तो असम की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा कांग्रेस के 'पीपुल्स चार्जशीट' के जरिए बीजेपी के मुख्यमंत्री को कठघरे में खड़ा कर रही हैं - हिमंता बिस्वा सरमा सत्ता में वापसी और बीजेपी की हैट्रिक की कोशिश में जुटे हुए हैं.
बीजेपी असम और पश्चिम बंगाल में घुसपैठियों के मामले को बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है, और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के भाषणों में बार बार ‘मियां मुस्लिम’ शब्द सुनने को मिलता है. और, हमेशा ही उनके ऐसे बयान विवाद की वजह बनते हैं.
मियां-मुस्लिम बनाम मुसलमान वोटर
‘मियां’ शब्द, असम में मूल रूप से बंगाली बोलने वाले मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाता है. जो बंगाली भाषा नहीं बोलते उनको आम तौर पर बांग्लादेशी प्रवासी बताया जाता है - असम में करीब 22 विधानसभा सीटों पर ‘मियां मुस्लिम’ बुलाए जाने वाले लोगों का प्रभाव है, और चुनावों में वे निर्णायक भूमिका निभाते हैं.
हाल ही में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने दावा किया था, असम का मुस्लिम समुदाय राजनीतिक तौर पर मियां-मुसलमानों के खिलाफ है. लगे हाथ हिमंता बिस्वा सरमा ने यह भी दावा किया कि स्थानीय मुस्लिम समुदाय का एक तबका अब बीजेपी का समर्थन कर रहा है.
हिमंता बिस्वा सरमा समझाते हैं, असम के मुसलमानों ने समय-समय पर साफ किया है कि उनका धर्म एक हो सकता है, लेकिन वे मियां-मुसलमानों से सांस्कृतिक रूप से अलग हैं - और हिमंता बिस्वा सरमा अपना स्टैंड भी साफ करते हुए कहते हैं कि असम के आम मुस्लिम समुदाय से उनको कोई दिक्कत नहीं है.
भारत के धर्मनिरपेक्ष देश होने की दुहाई देते हुए एक कार्यक्रम में हिमंता बिस्वा सरमा कहते हैं, मुसलमानों से मुझे कैसी प्रॉब्लम हो सकती है. लेकिन, जब बांग्लादेशी मुसलमान और घुसपैठियों की बात आती है तब प्रॉब्लम जरूर होती है.
हिमंता बिस्वा सरमा न तो ईद पर किसी मुस्लिम के घर जाने, न ही टोपी पहनने को गलत मानते हैं. जिक्र आने पर बताते हैं कि उनके दफ्तर के 30 फीसदी लोग मुसलमान हैं. यहां तक कि, बताते हैं, 30 साल से उनका जो ड्राइवर है, वो भी मुस्लिम है.
कहते हैं, तकलीफ तब होती है कि जब बांग्लादेशी मुसलमानों की बात आती है, जो भारत में आकर हमारे डेमोग्राफी में गड़बड़ी करते हैं.
बीजेपी विधानसभा चुनाव में असमिया अस्मिता और घुसपैठ को बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है. कुछ दिनों पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने असम दौरे में कहा था कि वहां के 7 जिलों पर 64 लाख घुसपैठियों का दबदबा हो गया है.
बीजेपी को फिर से असम में सरकार बनाने का मौका देने की अपील करते हुए अमित शाह ने कहा था, अगर आप घुसपैठ रोकना चाहते हैं, तो आने वाले चुनाव में एक बार फिर बीजेपी का समर्थन करें और यहां बीजेपी की सरकार बनाएं.
घुसपैठ का मामला असम में अलग, लेकिन कैसे
पंचायत आजतक असम में जब हिमंता बिस्वा सरमा को अमित शाह के बयान की याद दिलाई गई, तो उनका कहना था कि असम में घुसपैठियों का मामला देश के बाकी राज्यों से अलग है. मुख्यमंत्री को याद दिलाया गया कि अमित शाह ने घुसपैठियों से निजात पाने के लिए एक मंत्र दिया था - 'डिटेक्ट डिटेन एंड डिपोर्ट.'
अमित शाह के मंत्र पर हिमंता बिस्वा सरमा से सवाल था, आप जिस तरीके से कह रहे हैं, उसमें न डिटेक्ट दिखता है, न डिटेन दिखता है, न डिपोर्ट दिखता है. आप कह रहे हैं कि भाई हम सिर्फ डराना चाहते हैं उनको, तो ये पॉलिसी
शिफ्ट कहां से हो गया दो महीने के भीतर?
हिमंता बिस्वा सरमा बोले, देखिए, जो असम की हालत है देश से अलग है... और, देश के लोगों के लिए बांग्लादेशी मुद्दे के लिए देश के लोगों की जो सोच है... और असम का जो एक्सपीरियंस है, ये दोनों बिल्कुल अलग मामला है... अमित शाह जी देश के होम मिनिस्टर हैं... देश के लिए बोलते हैं, लेकिन असम की समस्या अलग है... मैंने यह 70 लाख कहां से निकाला है... 90 के दशक में केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया था कि 30 लाख लोग हैं... मैं उसी का प्रोजेक्शन करके बोल रहा हूं.
असम के मुख्यमंत्री का कहना है कि 70 लाख लोगों को डिटेक्ट करके डिपोर्ट करना, ये कोई मामूली काम नहीं है. महाराष्ट्र में हो सकता है. गुजरात में हो सकता है. डिटेक्ट, डिटेन और डिपोर्ट पूरे देश में लागू हो सकता है, लेकिन असम में गृह मंत्री जी भी जानते हैं कि वहां का मामला पूरी तरह अलग है.
अमित शाह के 3D फैक्टर को मुश्किल टास्क बताते हुए हिमंता बिस्वा सरमा कहते हैं, उनको कानूनन जो सुविधा मिल रही है... पहले उससे वंचित करना पड़ेगा. फिर वे लोग जो कब्जा करके बैठे हैं, गैरकानूनी तरीके से उनको निकालना होगा... हमने जैसे 50 हजार एकड़ जमीन से उन लोगों को एविक्ट किया... जब ऐसा माहौल बनेगा... बांग्लादेश पड़ोसी मुल्क है, वे लोग खुद चले जाएंगे... तो असम में हमें अलग तरीका अपनाना पड़ेगा, न कि कोई सीधा सपाट फॉर्मूला.