ओडिशा की सियासत में इन दिनों पहली से लेकर आठवीं तक की किताबों में गलतियों पर तूफान मचा हुआ है. इन किताबों में महान वैज्ञानिक आइजक न्यूटन को पायलट बताया गया है. दावा किया गया है कि इन किताबों में 1600 से अधिक गलतियां हैं.
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने नई किताबों में इन त्रुटियों के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित करने का आदेश दिया है. साथ ही उन्होंने स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) के पूर्व निदेशक मनोज पाधी सहित चार वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित करने और तीन सहायक निदेशकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए.
वहीं बीजू जनता दल ने इसे शर्मनाक बताते हुए स्कूल एवं जनशिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की मांग की. साथ ही इस मामले की सीबीआई से जांच कराने की डिमांड की.
बीजेडी की युवा शाखा के अध्यक्ष चिन्मय साहू ने कहा कि पाठ्यपुस्तकों में महान वैज्ञानिक आइजक न्यूटन को पायलट के रूप में बताना ओडिशा के लिए शर्मनाक है. कुछ अधिकारियों का निलंबन केवल दिखावा है. मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए.
चिन्मय साहू ने दावा किया कि पाठ्यपुस्तकों में कुल 1,768 त्रुटियां पाई गई हैं. इन पुस्तकों के प्रकाशन में 380 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है. ऐसे में पूरे मामले की सीबीआई जांच कराई जाए. दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई हो.
वहीं, बीजेडी स्टूडेंट विंग की प्रेसिडेंट इप्सिता साहू ने मुख्यमंत्री से तत्काल सीबीआई जांच की सिफारिश करने की मांग की. उन्होंने कहा कि जब तक पाठ्यपुस्तकों की त्रुटियों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा.
कांग्रेस नेता यासिर नवाज ने कहा कि पाठ्यपुस्तकों की त्रुटियों से हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों से कराई जाए.
हालांकि विपक्ष की मांगों को खारिज करते हुए बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद मनमोहन सामल ने कहा कि सरकार पहले ही कार्रवाई कर रही है. चार अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है. छह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है. उन्होंने मामले की सीबीआई जांच की मांग को भी खारिज कर दिया.