ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने भगवान जगन्नाथ मंदिर की संपत्ति के ऐतिहासिक विस्तार को लेकर ध्यान खींचा है. ओडिशा सरकार ने श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन से जुड़ी जमीन की पहचान, सत्यापन और उसे वापस लेने के लिए बड़े स्तर पर अभियान शुरू करने का फैसला किया है. खास बात यह है कि ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बताया कि भगवान जगन्नाथ की कुछ जमीन मौजूदा पाकिस्तान के सिंध इलाके में भी स्थित है.
सरकार का यह अभियान सिर्फ ओडिशा तक सीमित नहीं रहेगा. मंदिर प्रशासन की जिन जमीनों पर राज्य के भीतर या राज्य के बाहर कब्जा है, उनकी पहचान की जाएगी. इसके बाद रिकॉर्ड की जांच और जमीन की स्थिति का सत्यापन किया जाएगा. सरकार का उद्देश्य मंदिर की ऐतिहासिक संपत्तियों की सुरक्षा करना और उन्हें फिर से श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के नियंत्रण में लाना है.
गुरुवार को ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई. इसमें मंदिर की जमीन के रिकॉर्ड, अवैध कब्जों, जमीन के निपटारे की नीति और मंदिर की संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी कदमों की समीक्षा की गई. कानून मंत्री के मुताबिक, प्रशासन अब तक भगवान जगन्नाथ से जुड़ी करीब 36 हजार एकड़ जमीन की पहचान कर चुका है. अधिकारियों ने बताया कि इस पहचान की गई जमीन में लगभग 25 से 26 फीसदी हिस्सा फिलहाल कब्जे में है.
करीब 36 हजार एकड़ जमीन की पहचान
अब सरकार इन जमीनों का विस्तृत सत्यापन करेगी. रिकॉर्ड और जमीन की स्थिति की जांच के बाद कब्जे वाली संपत्तियों को वापस लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी. सरकार का मानना है कि इससे श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन की जमीन की संपत्ति मजबूत होगी और मंदिर के लिए भविष्य में एक मजबूत कोष तैयार करने में मदद मिलेगी. समीक्षा बैठक के दौरान कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने जगन्नाथ मंदिर की संपत्तियों के भौगोलिक विस्तार को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया. उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ की जमीन भारत के अलग-अलग हिस्सों में है और कुछ जमीन पाकिस्तान के सिंध इलाके में भी मौजूद है.
मंत्री ने कहा कि भारत के अलग-अलग हिस्सों में बहुत सी जमीन है. पाकिस्तान के सिंध इलाके में भी अब तक कुछ जमीन मौजूद है. हम धीरे-धीरे उन जमीनों की पहचान शुरू करेंगे. यानी सरकार अब उन जमीनों की भी पहचान करने की बात कह रही है, जो पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र में होने का दावा किया जा रहा है. हालांकि, ऐसी जमीन का सटीक विवरण और उसकी मौजूदा कानूनी स्थिति ऐतिहासिक और आधिकारिक भूमि रिकॉर्ड के जरिए सत्यापित करनी होगी.
कब्जेदारों के लिए भी निपटारे का रास्ता
ओडिशा सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि मंदिर की जमीन पर लंबे समय से रह रहे वास्तविक कब्जेदारों के दावों पर कानूनी प्रावधानों के तहत विचार किया जा सकता है. सरकार का कहना है कि अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई होगी, लेकिन लंबे समय से जमीन पर रह रहे लोगों के मामलों में कानूनी और संतुलित तरीका अपनाया जाएगा. कानून मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य भगवान जगन्नाथ के हितों और उनकी संपत्तियों की सुरक्षा करना है. साथ ही, लंबे समय से ऐसी जमीन पर रह रहे लोगों के मामलों को लागू कानूनी प्रावधानों के तहत निपटाने की कोशिश की जाएगी.
मंत्री ने यह भी कहा कि साल 2003 में लागू की गई समान जमीन निपटारा नीति में संशोधन की जरूरत है. सरकार का मानना है कि बदलाव के बाद जमीन से जुड़े मामलों के निपटारे की प्रक्रिया तेज और प्रभावी हो सकेगी. मौजूदा व्यवस्था में बदलाव को लेकर कई समीक्षा बैठकें पहले ही हो चुकी हैं. सरकार अब जमीन के निपटारे की मौजूदा व्यवस्था में संशोधन तैयार कर रही है. इसका उद्देश्य लंबित मामलों का तेजी से निपटारा करना और जगन्नाथ मंदिर की संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाना है.
2003 की नीति में बदलाव की तैयारी
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पात्र कब्जेदारों को कानूनी प्रक्रिया के जरिए अपने कब्जे को नियमित कराने का अवसर दिया जा सकता है. पात्र मामलों का निपटारा होने के बाद बची हुई कब्जाई गई जमीन को वापस लेने और उसे श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन को सौंपने की योजना है. सरकार को उम्मीद है कि इस पूरी पहल से मंदिर प्रशासन की जमीन से जुड़ी संपत्तियां मजबूत होंगी. इससे राजस्व बढ़ाने में मदद मिल सकती है और भगवान जगन्नाथ से जुड़ी ऐतिहासिक जमीनों की बेहतर सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी.