मध्य प्रदेश बीजेपी के सीनियर नेता और पूर्व सांसद डॉ ढालसिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है. सोमवार रात जब वो डिनर के बाद पोते के साथ खेल रहे थे तभी भोपाल से एक मित्र ने फ़ोन कर बधाई दी और बताया कि आपके राज्यपाल बनने की खबर न्यूज़ चैनल में चल रही है. इसके बाद लगातार फोन की घंटियां बजने लगी और घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया.
डॉ ढालसिंह ने बताया, ''ये खबर सुनकर वो खुद हतप्रभ रह गए. ये उम्मीद से ज्यादा और जो सोचा भी नहीं उतना बड़ा दायित्व मिलने जैसा है. परिवार के लोगों को भरोसा नहीं हुआ. उन्हें ये बात सुनकर सपने जैसा लग रहा था. ये भाजपा है. चौंकाती है. प्रधानमंत्री जी चौंकाते हैं.
पार्टी ने जो भी दायित्व दिया है, उसे बड़ी जिम्मेदारी से पूरा किया है. ये संवैधानिक पद है तो पद के अनुरूप उत्तराखंड में जनता की सेवा करेंगे और सरकार का सहयोग करेंगे. इससे पहले डॉ. बिसेन विधायक, कैबिनेट मंत्री और सांसद समेत कई अहम पदों पर रह चुके हैं.''
14 मई 1952 को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के पिपरिया में जन्में ढाल सिंह बिसेन आयुर्वेदिक डॉक्टर के साथ ही किसान भी हैं. उनका राजनीतिक सफर काफी लंबा रहा है.
डॉ. बिसेन ने सबसे पहले साल 1990 में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की और विधायक बने. इसके बाद वे 1993, 1998 और 2003 में लगातार बरघाट विधानसभा सीट से जीतते रहे. इसके बाद हुए परिसीमन में बरघाट विधानसभा अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हुई तो ढालसिंह बिसेन ने साल 2008 और 2013 में सिवनी जिले की केवलारी विधानसभा से चुनाव लड़ा लेकिन कामयाबी नहीं मिली
साल 2003 में डॉ. ढाल सिंह बिसेन मध्य प्रदेश की उमा भारती सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाए गए. इस दौरान उन्होंने वन, परिवहन, स्कूल-शिक्षा, खनिज और जेल जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाली. इसके बाद साल 2011 से 2013 तक वे मध्य प्रदेश में राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष बनाए गए.
2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें बालाघाट सीट से टिकट दिया. चुनाव जीतकर वे सांसद बने और दिल्ली पहुंचे. हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया, लेकिन अब उन्हें उत्तराखंड का राज्यपाल बनाया गया है.
डॉ ढाल सिंह बिसेन पवार समाज से आते हैं. ओबीसी वर्ग में आने पवार समाज की मौजूदगी बालाघाट के साथ ही सिवनी जिले में भी अच्छी संख्या में है.