मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव सोमवार को ओरछा में थे. ओरछा में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रसिद्ध जहांगीर महल का नाम बदलकर वीर सिंह महल किए जाने के संकेत दिए हैं. सीएम ने कहा कि इस महल का निर्माण बुंदेल शासक राजा वीर सिंह ने कराया था, इसलिए इसके नाम पर भी विचार किया जाना चाहिए.
उनके इस बयान के बाद ओरछा की ऐतिहासिक विरासत और मुगल दौर से जुड़े नामों को लेकर चर्चा तेज हो गई है. मोहन यादव ओरछा में बीजेपी की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में शामिल होने पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने रामराजा सरकार मंदिर में दर्शन किए और रामराजा लोक में चल रहे विकास कार्यों का जायजा लिया. इसके बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने जहांगीर महल के नाम को लेकर अपनी बात रखी.
जब सीएम से पूछा गया कि क्या अब जहांगीर महल को वीर सिंह महल के नाम से जाना जाएगा, तो उन्होंने इसका जवाब हां में दिया. उन्होंने कहा कि महल राजा वीर सिंह ने बनवाया था. साथ ही उन्होंने कहा कि इतिहास के कई ऐसे पहलू हैं, जिन्हें सामने लाने की जरूरत है.
नरोत्तम मिश्रा ने भी किया समर्थन
पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने महल बनवाया, उसके नाम पर ही इसका नाम होना चाहिए. उनके मुताबिक, ऐतिहासिक विरासत के साथ अतीत में हुई छेड़छाड़ को ठीक करने की जरूरत है.
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क्या है जाहांगीर महल का इतिहास?
बेतवा नदी के किनारे बसा ओरछा अपने महलों और मंदिरों के लिए मशहूर है. इतिहासकारों के मुताबिक, राजा वीर सिंह ने 1518 में अपने दोस्त जहांगीर यानी सलीम के लिए यह महल बनवाया था. हालांकि, जहांगीर यहां कभी रहने नहीं आए. जाहांगीर महल में बुंदेला और मुगल वास्तुकला का अनोखा मेल दिखाई देता है.
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इस महल की खास पहचान चारों कोनों पर गोल गुंबद और ऊंची छत पर बने बड़े गुंबद हैं. महल में करीब 236 कमरे हैं. वीर सिंह बुंदेला राजा मधुकर शाह के चौथे बेटे थे. इतिहासकारों के मुताबिक, वीर सिंह मुगल बादशाह अकबर का विरोध करते थे, लेकिन अकबर के बेटे सलीम से उनकी गहरी दोस्ती थी. यही दोस्ती आगे चलकर जहांगीर महल के निर्माण की वजह बनी.