यूपी में बहराइच के कतर्नियाघाट जंगल में बाढ़ और जलभराव ने इंसानों के साथ-साथ जानवरों की मुश्किलें भी बढ़ा दी है. जंगल में पानी भरने के बाद सुरक्षित जमीन की तलाश में तेंदुए और मगरमच्छ आबादी वाले इलाकों तक पहुंच रहे हैं.
इसके बाद वन विभाग को लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ रहा है. 21 जुलाई से अब तक 15 तेंदुओं और 2 मगरमच्छों को आबादी वाले इलाकों से रेस्क्यू कर जंगल के ऐसे हिस्सों में छोड़ा गया है, जहां बाढ़ का पानी नहीं है.
जंगल में पानी बढ़ा तो बाहर निकले तेंदुए
अधिकारियों के मुताबिक नेपाल में लगातार हो रही बारिश और बैराजों से छोड़े गए पानी के कारण कतर्नियाघाट के जंगल में पानी का स्तर बढ़ गया. कई हिस्सों में जलभराव होने के बाद वन्यजीव आबादी वाले इलाकों की तरफ बढ़ने लगे. जिससे बाढ़ प्रभावित इलाकों में अब लोगों के बीच डर बना हुआ है.
कतर्नियाघाट वाइल्डलाइफ डिविजन के डीएफओ अपूर्व दीक्षित के ने बताया कि प्रभावित इलाकों में पिंजरों की मदद से लगाकर तेंदुओं को सुरक्षित पकड़ा जा रहा है.
मंगलवार सुबह मिहींपुरवा के वार्ड नंबर 6 में सिंचाई विभाग के बंद स्टोर में एक करीब 10 साल का नर तेंदुआ पिंजरे में फंस गया. उसका वजन करीब 50 से 55 किलो बताया गया है. इससे एक दिन पहले ककरहा रेंज के रामसहाय पुरवा से भी एक वयस्क नर तेंदुए को रेस्क्यू किया गया था.
घरों में घुस रहे मगरमच्छ
तेंदुओं के साथ मगरमच्छ भी पानी के बहाव के कारण आबादी तक पहुंच गए. मंगलवार को पैरुआ गांव के एक घर और मिहींपुरवा नगर क्षेत्र में दो मगरमच्छों को भी पकड़ा गया. इसके लिए खास मगरमच्छ पकड़ने वाले पिंजरों का इस्तेमाल किया गया और बाद में दोनों को नदी में छोड़ दिया गया. वन विभाग के मुताबिक 1 जनवरी से अब तक 20 तेंदुओ को रेस्क्यू कर सुरक्षित ठिकानों में छोड़ा जा चुका है.
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हाल के दिनों में तेंदुए के हमलों में महबूबनगर के 28 साल के रामसिंह के अलावा मटेही और आनंद नगर के दो बच्चों की जान गई है. ऐसे में जंगली जानवरों के रिहायशी इलाकों में पहुंचने से खतरा और बढ़ गया है.
वन विभाग ने लोगों से बाढ़ वाले इलाकों, नदियों और नालों के पास जाने से बचने की अपील की है. किसी जंगली जानवर को देखने पर उसके आसपास भीड़ लगाने या उसे परेशान करने के बजाय तुरंत वन विभाग को सूचना देने को कहा गया है.