MP News: गुना में आजीविका मिशन के नाम पर करोड़ों का घोटाला सामने आया है. घोटाले में आजीविका मिशन की DPM सोनू सुशीला यादव पर गंभीर आरोप लगे हैं. 3.74 करोड़ रुपए के घोटाले में घिरी महिला अधिकारी को बर्खास्त करने के लिए कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने ग्रामीण आजीविका मिशन के सीईओ को पत्र भी लिखा है. लेकिन महिला अधिकारी के हाइप्रोफाइल कनेक्शन के कारण अब तक कार्रवाई नहीं हो सकी.
कलेक्टर ने 22 जुलाई 2026 को पत्र लिखा था. पत्र में DPM के 4 चार के विवादित कार्यकाल का उल्लेख किया गया है. जांच में पाया गया कि सोनू सुशीला यादव के अलावा अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है जबकि महिला अधिकारी की भूमिका संदिग्ध रही है. लेकिन पत्र लिखने के तीन हफ्ते बाद भी महिला अधिकारी के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि दूसरे स्टाफ में अटैचमेंट कर पल्ला झाड़ने की कोशिश की गई. घोटालेबाज महिला अधिकारी के हाइप्रोफाइल राजनीतिक कनेक्शन भी चर्चाओं में हैं.
कलेक्टर के पत्र में खुलासा हुआ है कि जिला आजीविका मिशन कार्यालय गुना द्वारा पंजाब नेशनल बैंक की शाखा में अवैध खाता क्रमांक 18600010028097 संचालित किया जा रहा था. उक्त खाते में सरकारी राशि का गबन किया गया।
घोटाले के शुरुआत तब पकड़ी गई, जब जिला प्रबंधक सूक्ष्म वित्त सेवाराम कुशवाह ने 30 दिसंबर 2025 को एक आवेदन देकर बताया कि नेशनल MIS के FDM पोर्टल पर प्रतिज्ञा CLF ब्लॉक गुना के लिए 90.25 लाख रुपए की राशि प्राप्त हुई है. लेकिन जब वास्तविक बैंक पासबुक से मिलान किया गया तो पता चला कि ये राशि आजीविका मिशन के बैंक खाते में आई ही नहीं. इस राशि को अवैध खाते में ट्रांसफर किया गया.
इस मामले में DPM सोनू सुशीला यादव की भूमिका पूरी तरह संदिग्ध पाई गई. जब 90.25 लाख रुपए के घोटाले की फाइलें और नोटशीट मांगी गई तो DPM ने 5 दिसंबर को लिखित में आवेदन दे दिया कि सामुदायिक निवेश निधि CIF की फाइलें नोटशीट कार्यालय से गुम हो गई हैं. लेकिन उसके बाद भी DPM ने थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई.
कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने सख्त लहजे में टिप्पणी करते हुए लिखा है कि आजीविका मिशन के खातों का प्रतिवर्ष ऑडिट किया जाता है. इसके बावजूद पिछले चार वर्षों से DPM के घोटालों की जानकारी नहीं मिली. बैंक में समानांतर अवैध खाता संचालित होता रहा. ये घोर लापरवाही अक्षमता और संदिग्ध निष्ठा को दर्शाता है.