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MP और आंध्र में बड़ा 'वाइल्डलाइफ एक्सचेंज'... देंगे बाघ, बदले में लेंगे जंगली कुत्ते; राजस्थान से 'सोन चिरैया' भी लौटेगी

मध्य प्रदेश के बाघ और गौर आंध्र प्रदेश को मिलेंगे, बदले में आएंगे जंगली कुत्ते. जुलाई में गांधी सागर में चीते छोड़े जाएंगे. जानिए सोन चिरैया प्रोजेक्ट की पूरी डिटेल...

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घाटीगांव और गांधी सागर में छोड़ी जाएगी सोन चिरैया.(Photo:ITG)
घाटीगांव और गांधी सागर में छोड़ी जाएगी सोन चिरैया.(Photo:ITG)

मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण को और मजबूत करने के लिए कई बड़े फैसले लिए गए हैं. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वन विभाग की समीक्षा बैठक में आंध्र प्रदेश को बाघ और गौर (भारतीय बाइसन) देने और बदले में वहां से जंगली कुत्ते या अन्य वन्यजीव प्रजातियां लाने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं. वहीं राजस्थान से सोन चिरैया (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) लाकर उन्हें घाटीगांव और गांधी सागर के जंगलों में छोड़ा जाएगा.

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से मध्यप्रदेश से बाघ और गौर देने का अनुरोध किया गया है. आंध्र प्रदेश को बाघ और गौर उपलब्ध कराने की वैधानिक कार्रवाई की जाए और इसके बदले में वहां से जंगली कुत्ते या अन्य दुर्लभ वन्यप्राणी मध्यप्रदेश लाने के प्रयास किए जाएं.

घाटीगांव और गांधी सागर में छूटेगी सोन चिरैया
इसी प्रकार, राजस्थान सरकार द्वारा लुप्तप्राय 'सोन चिरैया' (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) देने पर सहमति बन गई है. राजस्थान से सोन चिरैया प्राप्त कर उन्हें ग्वालियर के घाटीगांव और मंदसौर के गांधी सागर के जंगलों में उनके अनुकूल वातावरण में छोड़ा जाएगा.

वीरांगना दुर्गावती बनेगा चीतों का तीसरा घर
वन विभाग के प्रमुख सचिव संदीप यादव ने बैठक में चीता प्रोजेक्ट को लेकर बेहद अहम अपडेट शेयर किए. उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में वर्तमान में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 52 हो गई है, जिनमें से 32 चीतों का जन्म कूनो नेशनल पार्क में ही हुआ है. 

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गांधी सागर में जुलाई में आएंगे चीते
मंदसौर जिले के गांधी सागर अभ्यारण्य को चीतों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार कर लिया गया है. यहां जुलाई 2026 में नर-मादा चीतों के दो जोड़े छोड़े जाएंगे.

इसके साथ ही, सागर जिले के 'वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व' को प्रदेश में चीतों के तीसरे घर के रूप में तेजी से विकसित किया जा रहा है. वर्तमान में बाघ, चीता, तेंदुआ, भेड़िया, घड़ियाल और गिद्धों की आबादी के मामले में मध्यप्रदेश पूरे देश में नंबर वन पर है.

मानव-वन्यजीव संघर्ष घोषित होगा 'राज्य आपदा'
वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा को डिजिटल और मैन्युअल रूप से मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने कई बड़े प्रशासनिक बदलावों को मंजूरी दी.संगठित वन अपराधों और अवैध उत्खनन पर सख्ती से लगाम कसने के लिए 'स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स' की तर्ज पर एक नई 'राज्य स्तरीय टास्क फोर्स' का गठन किया जाएगा.

वन मुख्यालय स्तर पर अत्याधुनिक तकनीक से लैस 'कमांड एवं कंट्रोल रूम' स्थापित किया जाएगा. मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष को 'राज्य आपदा' घोषित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रशासन, पुलिस, वन विभाग और SDRF मिलकर त्वरित आपदा प्रबंधन कर सकें.

हाथियों के लिए रेडियो कॉलर
जंगली हाथियों के प्रबंधन को सीखने के लिए वन विभाग की टीम पश्चिम बंगाल भेजी गई है. केंद्र सरकार ने मध्यप्रदेश की सीमा में मौजूद 6 हाथियों को 'रेडियो कॉलर' लगाने की अनुमति दे दी है. हाथियों की देखरेख के लिए सहायक महावतों के पद भी बढ़ाए जाएंगे.

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30 साल बाद लौटा 'साल बोरर' का खतरा
प्रमुख सचिव ने बताया कि अनूपपुर और डिंडोरी जिलों के जंगलों में 'साल बोरर' (साल के पेड़ों को खोखला करने वाला कीड़ा) का प्रकोप देखा गया है.यह बीमारी बेहद दुर्लभ है और लगभग 30 साल में एक बार आती है. इससे पहले यह 1997 में देखी गई थी. इस आपदा से निपटने के लिए अतिरिक्त बजट से संक्रमित वृक्षों की कटाई की जाएगी ताकि अन्य पेड़ सुरक्षित रहें.

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