मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में तीन दिन से जारी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल खत्म हो गई है. मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात के बाद कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया. कर्मचारियों की 10 मांगों पर मुख्यमंत्री से चर्चा हुई, जिनमें से 8 पर सहमति बनी है. नियमितीकरण के मुद्दे पर कमेटी गठित करने का फैसला लिया गया है.
मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों को एक महीने के भीतर उनकी मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है. इसके बाद कर्मचारियों ने तत्काल प्रभाव से काम पर लौटने का निर्णय लिया. हड़ताल खत्म होने से भोपाल के लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है.
10 मांगों पर चर्चा, 8 पर बनी सहमति
यूनियन अध्यक्ष मगनलाल झांझोट के मुताबिक, मुख्यमंत्री के साथ बैठक में कर्मचारियों की 10 मांगें रखी गईं. इनमें से 8 मांगों पर सहमति बनी है. नियमितीकरण के लिए कमेटी बनाई जाएगी, जो इस संबंध में विचार करेगी.
मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि कमेटी के जरिए कर्मचारियों की मांगों पर काम किया जाएगा. कर्मचारियों को एक महीने का समय दिया गया है. इसी भरोसे के बाद यूनियन ने हड़ताल समाप्त करने का फैसला लिया.
तीन दिन से भोपाल में लगा था कचरे का ढेर
हड़ताल के चलते राजधानी के 85 वार्डों और 21 जोन में सफाई व्यवस्था प्रभावित हो गई थी. डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन बंद होने से न्यू मार्केट, वल्लभ भवन और वीआईपी कॉलोनी 4 इमली सहित कई इलाकों में कचरे के ढेर लग गए थे.
शहर में 7 हजार से ज्यादा सफाई कर्मचारी और 400 से अधिक कचरा गाड़ियां इस व्यवस्था का हिस्सा हैं. राजधानी में रोजाना करीब 850 मीट्रिक टन कचरा निकलता है. तीन दिन की हड़ताल के दौरान करीब 2,550 मीट्रिक टन कचरा जमा होने का अनुमान लगाया गया था.
10,500 रुपये वेतन से लेकर नियमितीकरण तक की मांग
सफाई कर्मचारी करीब 10,500 रुपये मासिक वेतन मिलने की बात कहते हुए इसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की मांग कर रहे थे. उनकी प्रमुख मांगों में ठेका व्यवस्था खत्म करना, स्थायी नियुक्ति, सरकारी कर्मचारी का दर्जा और कर्मचारी की मृत्यु होने पर पति या पत्नी में से किसी एक को अनुकंपा नियुक्ति देना शामिल था.
हड़ताल खत्म होने के बाद अब नगर निगम की सफाई व्यवस्था दोबारा सामान्य होने की उम्मीद है. हालांकि, कर्मचारियों की मांगों पर आगे होने वाली कार्रवाई और नियमितीकरण के लिए गठित होने वाली कमेटी की भूमिका पर सबकी नजर रहेगी.