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MP विधानसभा का शीतकालीन सत्र 7 दिसंबर से, 5 दिन चलेगी कार्यवाही; कांग्रेस ने सरकार को घेरा

मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र 7 से 11 दिसंबर तक चलेगा. पांच बैठकों वाले सत्र की अवधि पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा और कई मुद्दों पर चर्चा की मांग की.

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1 दिसंबर से स्वीकार होंगे स्थगन और ध्यानाकर्षण प्रस्ताव.(Photo: Representative)
1 दिसंबर से स्वीकार होंगे स्थगन और ध्यानाकर्षण प्रस्ताव.(Photo: Representative)

मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र 7 दिसंबर से शुरू होगा. यह सत्र 11 दिसंबर तक चलेगा. पांच दिनों के इस सत्र में कुल पांच बैठकें होंगी. विधानसभा सचिवालय ने सत्र बुलाने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है.

विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, राज्यपाल मंगू भाई पटेल के आदेश के पालन में सत्र आहूत किया गया है. सत्र के दौरान प्रश्नकाल भी होगा.

प्राइवेट बिल और प्रस्तावों के नोटिस की तारीख तय

विधानसभा सचिवालय ने सत्र के लिए अलग-अलग प्रस्तावों और सूचनाओं के नोटिस जमा करने की समयसीमा भी तय कर दी है.

निजी सदस्यों के विधेयकों यानी प्राइवेट मेंबर्स बिल के नोटिस 11 नवंबर तक स्वीकार किए जाएंगे. वहीं, निजी सदस्यों के प्रस्तावों यानी प्राइवेट मेंबर्स रेजोल्यूशन्स के नोटिस जमा करने की अंतिम तारीख 26 नवंबर है.

स्थगन प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और नियम 267-A के तहत नोटिस 1 दिसंबर से स्वीकार किए जाएंगे. ये नोटिस विधानसभा सचिवालय में कार्यालय समय के दौरान सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक जमा किए जा सकेंगे.

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पांच दिन के सत्र पर उमंग सिंघार ने उठाए सवाल

शीतकालीन सत्र की अवधि को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि प्रदेश कई गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन सरकार विधानसभा में चर्चा के लिए पर्याप्त समय नहीं दे रही है.

सिंघार ने कहा कि शीतकालीन सत्र केवल पांच दिनों के लिए बुलाया गया है. पिछला मानसून सत्र भी पांच दिनों के लिए तय किया गया था, लेकिन उसे तीन दिनों में ही समाप्त कर दिया गया.

बालाघाट, सागर और देवास की घटनाओं पर सरकार को घेरने की तैयारी

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जनता सरकार से कई गंभीर मुद्दों पर जवाब मांग रही है. इनमें बालाघाट में बच्चों की मौत, सागर और देवास में जहरीली शराब से हुई मौतें, किसानों की समस्याएं, युवाओं की बेरोजगारी और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं.

इसके अलावा आदिवासी अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बढ़ता कर्ज और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी विधानसभा में चर्चा होनी चाहिए.

'विधायक 7 करोड़ से अधिक लोगों की आवाज'

उमंग सिंघार ने कहा कि प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों से चुने गए विधायक 7 करोड़ से अधिक लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं. जब जनता के सामने इतने सवाल हैं, तब विधानसभा में चर्चा का समय बढ़ाया जाना चाहिए, न कि कम किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार सदन की अवधि कम कर सकती है, लेकिन जनता के सवालों को नहीं. कांग्रेस विधायक दल विधानसभा में जनता से जुड़े सभी मुद्दों को मजबूती से उठाएगा और सरकार को जवाबदेह बनाएगा.

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