किसी को पसंद करना, उससे लगातार बात करना, फिर यह सोचना कि आखिर दोनों के बीच रिश्ता क्या है, डेटिंग की ये उलझनें नई नहीं हैं, नया है तो इन्हें दिए गए नाम. Gen Z ने डेटिंग की लगभग हर confusing सिच्युएशन के लिए एक terminology खोज ली है. Talking stage, situationship, ghosting, breadcrumbing और benching जैसे शब्द आज सिर्फ slang नहीं हैं, बल्कि रिश्तों के उन phases का परिचय कराते है जिन्हें समझाना कभी मुश्किल हुआ करता था.
दो लोगों के बीच इसकी शुरुआत अक्सर talking stage से होती है. यह वह दौर है जब दो लोग लगातार बात कर रहे होते हैं, एक-दूसरे को जान रहे होते हैं और attraction भी हो सकता है, लेकिन रिलेशनशिप का कोई ऑफिशियल लेबल नहीं होता या यूं कहे इस दौर में दो लोग एक बस एक दूसरे को जानना समझना चाहते है.
सुबह के messages, देर रात की calls और दिनभर memes शेयर करने के बावजूद अगर कोई पूछ ले कि “तुम दोनों के बीच क्या है?”, तो इसका जवाब अक्सर होता है-“पता नहीं, हम बस बात कर रहे हैं.” लेकिन अगर वहीं सवाल किसी जेन-जी से पूछा जाए तो उसे जरूर पता होता है कि वो सिर्फ टॉकिंग स्टेज पर है, या दोनों के बीच कोई सिच्युएशनशिप है, या दोनों में से किसी एक ने दूसरे के घोस्ट कर दिया.
सुनने में शब्द जितने दिलचस्प है, उतनी ही दिलचस्प इनके मतलब भी है. मानिए अगर दो लोग काफी लंबे समय से बात कर रहे है, लेकिन उनके बीच का रिश्ता फिर भी डिफाइन नहीं हो पा रहा, तो मिलेनियल्स शायद इस रिश्ते की उलझन में उलझे रहें ,लेकिन एक जेन-जी को ये जरूर पता होता है कि वो एक सिच्युएशनशिप में है. दोनों एक-दूसरे के करीब होते हैं, साथ समय बिताते हैं और इमोशनल या फिजीकल इंटिमेसी भी हो सकती है, लेकिन कमिटमेंट का नाम आते ही चीजें धुंधली हो जाती हैं. यानी रिश्ता है, लेकिन ऑफिशियली रिश्ता नहीं है.
फिर आता है ब्रेड क्रंबिंग. इसमें कोई व्यक्ति आपको पूरी तरह छोड़ता भी नहीं और कमिटमेंट भी नहीं देता. कभी अचानक मैसेज, कभी स्टोरी पर रिएक्शन और फिर कई दिनों तक गायब. इतना अटेंशन कि उम्मीद बनी रहे, लेकिन इतना नहीं कि रिश्ता आगे बढ़े. आसान भाषा में समझे तो आपकी सुई हमेशा बीच में लटकी रहेगी.
अब बारी घोस्टिंग की. जेन-जी के सबसे प्रचलित शब्दों में से एक. दो लोगों के बीच बात, प्यार, तकरार सब हो और फिर अचानक उनमें से कोई एक भी अगर बिना किसी एक्सप्लेनेशन दिए पूरी तरह गायब हो जाए, तो Gen Z इसे घोस्टिंग कहती है.
बेंचिंग भी कुछ ऐसा ही है. इसमें व्यक्ति आपको रिजेक्ट नहीं करता, लेकिन चुनता भी नहीं. आपको अपने ऑप्शन में बनाए रखता है और जरूरत पड़ने पर वापस आ जाता है. आसान भाषा में कहे तो 'पास रखो पर प्रायोरिटी मत बनाओ' वाली सिच्युएशन.
वहीं लव बॉम्बिंग में शुरुआत इतनी इंटेंस होती है कि सामने वाला कुछ ही समय में जरूरत से ज्यादा प्यार, अटेंशन और प्रॉमिसेज देने लगता है.
लेकिन क्या ये सब सिर्फ Gen Z की कहानी है? शायद नहीं.कहानी ते ये हर पीढ़ी की रही है, जेन-जी के पास बस इन सिच्युएशन के लिए सही शब्द है.
मिलेनियल्स और बूमर्स भी इन फेजेज से गुजरे होंगे. उन्होंने भी किसी को पसंद किया होगा, घंटों फोन पर बात की होगी, किसी रिश्ते को लेकर कन्फ्यूज्ड रहे होंगे या किसी के अचानक दूर हो जाने का सामना किया होगा. फर्क सिर्फ इतना है कि उनके पास इन अनुभवों के लिए इतनी स्पेसिफिक टर्मिनोलॉजी नहीं थी.
शायद Gen Z ने डेटिंग को ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड नहीं बनाया, बल्कि उसकी कॉम्प्लिकेशन्स को नाम दे दिया है. क्योंकि किसी कन्फ्यूजिंग इमोशन को पहचानने के लिए सबसे पहले उसे शब्द देना जरूरी होता है.
पहले लोग कहते थे, “पता नहीं हमारे बीच क्या है।”
आज Gen Z कहती है-“It's a situationship.”
रिश्ते पुराने हैं, उलझनें भी पुरानी हैं. बस उन्हें समझाने की भाषा नई है.