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Reuse Food Wrappers Smartly: रोटी-बर्गर पैक करने वाले रैंपिंग पेपर को न समझें बेकार, बचाएंगे आपके हजारों रुपये! जानें रीयूज के आसान तरीके

रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाले सैंडविच, वैक्स, पार्चमेंट पेपर और एल्युमिनियम फॉयल कूड़े में फेंकने से पहले यह जान लीजिए कि यह बेकार नहीं होते हैं. अगर वे साफ और सुरक्षित हैं, तो इनका दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है. जानिए फूड सेफ्टी का ध्यान रखते हुए इन्हें रीयूज करने के आसान तरीके, जिससे घर का कचरा कम होगा और पैसों की बचत होगी.

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फूड रैपर्स पेपर का दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है. (PHOTO:AI)
फूड रैपर्स पेपर का दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है. (PHOTO:AI)

Reuse Food Wrappers Smartly:  घरों में रोजाना सैंडविच पेपर, वैक्स पेपर, पार्चमेंट पेपर और फॉयल वाले फूड रैपर का इस्तेमाल किया जाता है. एक बार इस्तेमाल के बाद इनको सीधे कूड़ेदान में फेंक दिए जाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनमें से कई रैपिंग मटेरियल अगर साफ और सही हालत में हों, तो इन्हें दोबारा भी इस्तेमाल किया जा सकता है? इससे न सिर्फ घर का कचरा कम होता है, बल्कि पैसों की भी बचत होती है.

हालांकि, इन्हें दोबारा इस्तेमाल करते समय साफ-सफाई और फूड सेफ्टी का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. सैंडविच पेपर, वैक्स पेपर, पार्चमेंट पेपर और फॉयल वाले फूड रैपर एक बार यूज करने के बाद बेकार नहीं होते हैं और इनका आप अपने घर में कई तरीके से रीयूज कर सकते हैं और इससे आपके काफी सारे पैसे भी बच सकते हैं.

क्या फूड रैपिंग पेपर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है?

फूड रैंपिंग के पेपर का दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि पेपर किस तरह के खाने के संपर्क में आया था. अगर रैपिंग पेपर साफ, सूखा और उस पर तेल, गंदगी या खाने के दाग नहीं हैं, तो उसे दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है.

वहीं, अगर वह कच्चे मांस, खराब हो चुके खाने या बहुत ज्यादा तेल वाले खाने के संपर्क में रहा है, तो उसे दोबारा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इसलिए किसी भी रैपिंग पेपर का इसतेमाल करने से पहले इन बातों का खास ध्यान रखे. 

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सैंडविच पेपर का ऐसे करें दोबारा इस्तेमाल

अगर सैंडविच पेपर साफ है, तो आप इसका इस्तेमाल कई कामों में कर सकते हैं.

  • सूखे स्नैक्स पैक करने के लिए.
  • बिस्कुट, कुकीज या पेस्ट्री की परतों के बीच रखने के लिए.
  • फ्रीजर में खाने की चीजों को आपस में चिपकने से बचाने के लिए.
  • बच्चों के क्राफ्ट प्रोजेक्ट या पेंटिंग के दौरान टेबल ढकने के लिए.
  • नाजुक और कीमती सामान लपेटने के लिए.

वैक्स पेपर के ये हैं स्मार्ट इस्तेमाल

वैक्स पेपर सिर्फ खाना पैक करने के लिए ही नहीं, बल्कि कई दूसरे कामों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

  • मिठाई या कुकीज की लेयर को अलग रखने के लिए.
  • किचन काउंटर को गंदा होने से बचाने के लिए.
  • चिपचिपी चीजों को आपस में चिपकने से रोकने के लिए.
  • कुछ चिकनी सतहों को हल्के से पोंछकर चमकाने के लिए.

इस बाक ध्यान रखें कि वैक्स पेपर को बेकिंग के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसकी वैक्स कोटिंग ज्यादा गर्मी में पिघल सकती है.

पार्चमेंट पेपर को भी कई बार कर सकते हैं यूज

अगर पार्चमेंट पेपर जला हुआ, फटा हुआ या बहुत ज्यादा गंदा नहीं है, तो आप इसको दोबारा इस्तेमाल में ला सकते हैं. 

  • कुकीज या ब्रेड बेक करने में.
  • सब्जियां रोस्ट करने में.
  • छोटे बेकिंग ट्रे की लाइनिंग के लिए.
  • घर के बने स्नैक्स लपेटने के लिए.

फॉयल वाले रैपर का भी करें सही इस्तेमाल

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अगर फॉयल वाला रैपर साफ और सही हालत में है, तो इसका इस्तेमाल सूखी चीजें रखने, छोटे सामान व्यवस्थित करने या किसी सतह को ढकने के लिए किया जा सकता है.

वहीं, एल्युमिनियम फॉयल को अगर सिर्फ साफ खाने को ढकने के लिए इस्तेमाल किया गया हो, तो उसे धोकर कई बार दोबारा उपयोग किया जा सकता है.

दोबारा इस्तेमाल करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

  • रैपिंग पेपर साफ और बिना बदबू का होना चाहिए.
  • उसमें कोई कट या छेद नहीं होना चाहिए.
  • वह सिर्फ सुरक्षित और तैयार खाने के संपर्क में आया हो.
  • अगर उसे साफ किया जा सकता है, तभी दोबारा इस्तेमाल करें.

कच्चे मांस, फफूंदी लगे खाने या किसी असुरक्षित चीज के संपर्क में आए रैपर को कभी दोबारा इस्तेमाल न करें.

किन चीजों को कम्पोस्ट में नहीं डालना चाहिए?

प्लास्टिक कोटिंग वाले सैंडविच रैपर, वैक्स पेपर, फॉयल-लाइन पैकेजिंग और बहुत ज्यादा तेल या खाने के दाग वाले रैपर कम्पोस्ट में नहीं डालने चाहिए. ये आसानी से नहीं गलते और मिट्टी की क्वालिटी पर भी असर डालते हैं.

क्यों जरूरी है फूड रैप्स का दोबारा इस्तेमाल?

छोटी-छोटी आदतें मिलकर बड़ा बदलाव ला सकती हैं. साफ फूड रैप्स का दोबारा इस्तेमाल करने से घर का कचरा कम होता है, पैसों की बचत होती है और पर्यावरण पर भी पॉजिटिव असर पड़ता है. 

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