गर्मी बढ़ते ही घर को ठंडा रखने के लिए लोग AC, कूलर और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का सहारा लेने लगते हैं. लेकिन क्या हो अगर घर की दीवार ही गर्मी को अंदर आने से रोकने लगे? इसके लिए किसी महंगे या हाईटेक मटीरियल की जरूरत नहीं है. इसके लिए भी लाल ईंट की ही जरूरत पड़ेगी, जिससे आमतौर पर घर की दीवारें बनाई जाती हैं. बस उस ईंट को लगाने का तरीका बदलना होता है.
आमतौर पर ईंटों को दीवार में लंबाई के बल सपाट तरीके से लगाया जाता है, लेकिन रैट ट्रैप बॉन्ड (Rat Trap Bond) तकनीक में ईंटों को उनके किनारे यानी एज पर खड़ा करके लगाया जाता है. इससे दीवार के भीतर छोटे-छोटे खाली हिस्से यानी एयर कैविटी बनती हैं. यही फंसी हुई हवा दीवार के लिए एक तरह का इंसुलेशन तैयार करती है और बाहर की गर्मी को सीधे घर के अंदर पहुंचने से धीमा करती है. चलिए जानते हैं कैसे आप सिर्फ और सिर्फ लाल ईंटों के इस्तेमाल से अपने घर को ठंडा रख सकते हैं.
क्या है Rat Trap Bond तकनीक?
Rat Trap Bond ईंटों से दीवार बनाने की एक ऐसी तकनीक है, जिसमें ईंटों को नॉर्मल तरीके से सपाट रखने के बजाय किनारे पर खड़ा करके लगाया जाता है. बाहर से दीवार लगभग ईंटों वाली आम दीवार जैसी ही नजर आती है, लेकिन इसके अंदर एक खाली जगह बन जाती है.
यही अंदर की खाली जगह तकनीक को खास बनाती है. इसमें मौजूद हवा गर्मी के ट्रांसफर को कम करने में मदद करती है. यानी सूरज की गर्मी दीवार के जरिए उतनी तेजी से कमरे तक नहीं पहुंचती, जितनी ठोस दीवार में पहुंच सकती है.
दीवार के अंदर की खाली जगह ही है असली गेमचेंजर
इस तकनीक को आप दीवार के अंदर बने एक नेचुरल एयर इंसुलेशन की तरह समझ सकते हैं. ईंटों के बीच खाली जगह में हवा फंस जाती है, जो बाहर की गर्मी को सीधे अंदर आने से रोकने में मदद करती है. इससे दीवार के जरिए गर्मी का असर कम होता है और घर अंदर से नॉर्मल घरों की तुलना में ठंडक रह सकती है.
इसी वजह से गर्म इलाकों में ऐसी दीवारें घर के अंदर का टेंपरेचर कंट्रोल रखने में मदद कर सकती हैं. हालांकि घर कितना ठंडा रहेगा, ये सिर्फ दीवार की तकनीक पर निर्भर नहीं करता. मौसम, घर की दिशा, खिड़कियां, छत, वेंटिलेशन, इंसुलेशन और लोकल डिजाइन भी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं.
कम ईंट और कम मोर्टार में तैयार हो जाती है दीवार
Rat Trap Bond का फायदा सिर्फ गर्मी तक ही लिमिटेड नहीं है. इस तरीके में दीवार के अंदर खाली जगह होने के कारण ट्रेडिसनल ठोस ईंट की दीवार की तुलना में ईंट और मोर्टार की खपत कम हो सकती है. इससे कंस्ट्रक्शन में लगने वाला मटीरियल और दीवार का वजन दोनों कम हो सकते हैं. यानी एक ही तकनीक से मटीरियल की बचत, कम डेड लोड और थर्मल इंसुलेशन जैसे कई फायदे मिल सकते हैं. यही वजह है कि इसे लो-कॉस्ट और क्लाइमेट-रिस्पॉन्सिव कंस्ट्रक्शन से भी जोड़ा जाता है.
पाइप और वायरिंग छिपाने में भी काम आ सकती है कैविटी
दीवार के अंदर बनी ये खाली जगह सिर्फ गर्मी रोकने के काम नहीं आती. डिजाइन के हिसाब से इस जगह का इस्तेमाल इलेक्ट्रिकल वायरिंग या सर्विस पाइप्स को ऑर्गनाइज करने के लिए भी किया जा सकता है.
इसका एक फायदा ये है कि हर चीज के लिए दीवार को बाद में ज्यादा तोड़ने की जरूरत कम पड़ सकती है. हालांकि वायरिंग और पाइपिंग को इस तरह छिपाने से पहले स्थानीय बिल्डिंग कोड और स्ट्रक्चरल डिजाइन का ध्यान रखना जरूरी है.
लॉरी बेकर ने भारत में इस तकनीक को दी पहचान
भारत में Rat Trap Bond को मशहूर आर्किटेक्ट लॉरी बेकर ने पॉपुलर बनाया था. केरल में उन्होंने कम लागत और लोकर कंस्ट्रक्शन मैटीरियल पर आधारित निर्माण को बढ़ावा दिया और ईंटों की इस तरह की तकनीकों का इस्तेमाल किया.
उनका फोकस ऐसा कंस्ट्रक्शन करने पर था जिसमें कम संसाधनों में बेहतर डिजाइन और ज्यादा उपयोगिता हासिल की जा सके. आज के समय में भी यह तरीका कम बिजली खर्च करने वाले और टिकाऊ घर बनाने के लिए काफी काम का साबित हो सकता है.
पुरानी ईंट, लेकिन सोच बिल्कुल नई
आज के समय में जहां लोग घरों को ठंडा रखने के लिए महंगे इंसुलेशन मटीरियल्स और मॉडर्न तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं Rat Trap Bond बिना किसी भारी भरकम खर्चे के ही घर को ठंडा करने में मददगार साबित होता है. कई बार सामान्य ईंट को इस्तेमाल करने का तरीका बदलकर भी निर्माण को ज्यादा स्मार्ट बनाया जा सकता है.
हालांकि इसे हर घर में आंख बंद करके लागू करना सही नहीं होगा. दीवार की मजबूती, स्थानीय मौसम, प्लॉट की स्थिति और पूरे स्ट्रक्चरल डिजाइन को देखकर ही आर्किटेक्ट या स्ट्रक्चरल इंजीनियर तय कर सकते हैं कि ये तकनीक कहां उपयोगी साबित हो सकती है. यानी ईंट वही है, बस उसे देखने और लगाने का एंगल बदल गया. और इसी छोटे से बदलाव में कम मटीरियल, कम वजन और बेहतर थर्मल परफॉर्मेंस के बड़े चांस छिपे हैं.