वुडन टाइल्स यानी लकड़ी की बनी टाइल्स आजकल घर की दीवारों और छतों की इंटीरियर डिज़ाइनिंग के लिए काफी ट्रेंड में हैं. इसे शुद्ध लकड़ी जैसे शीशम, सागवान, पाइन और देवदार से तैयार किया जाता है. चलिए जानते हैं इसे लगाने का खर्चा कितना आता है. क्या यह महंगा सौदा होगा या फिर हर साल घर पेंट कराने की खर्चे से मुक्ति मिलेगी ?
लकड़ी से बनी टाइल्स लगाने से दीवार को बार-बार पेंट कराने की झंझट पूरी तरह खत्म हो जाती है. यह दीवारों को एक मॉडर्न, लग्जरी और नेचुरल लुक देती हैं. पेंट की तरह इनमें हर कुछ सालों में पपड़ी पड़ने, रंग फीका होने या दोबारा पेंट कराने का झंझट नहीं होता.
लॉन्ग टर्म के लिए है फायदे का सौदा
लकड़ी की टाइल्स काफी लंबे समय तक चलती हैं, लेकिन इनका जीवनकाल इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस तरह की लकड़ी का इस्तेमाल कर रहे हैं. असली लकड़ी यानी अगर सागवान या शीशम जैसी अच्छी लकड़ी का इस्तेमाल किया जाए, तो यह 20 से 30 साल या उससे भी ज्यादा आसानी से चलती हैं.
लकड़ी की टाइल्स लगाना नॉर्मल पेंट या वॉलपेपर के मुकाबले शुरुआत में महंगा होता है, लेकिन लॉन्ग टर्म के लिए यह एक अच्छा सौदा है. क्योंकि बार-बार के पेंट और मेंटेनेंस के खर्च खत्म हो जाते हैं.
वुडन टाइल्स आमतौर पर 1 × 1 फुट के साइज में आती हैं. इनमें 3D डिजाइनिंग, स्टार प्लस और 50-50 जैसे कई आकर्षक डिजाइन मिलते हैं. असली लकड़ी से बनी ये टाइल्स काफी मजबूत होती हैं और आसानी से टूटती नहीं हैं.
छत और दीवारों में होता है इस्तेमाल
वुडन टाइल्स मुख्य रूप से दीवारों और छतों पर लगाया जाता है. फर्श के लिए ये कम उपयोगी होती हैं. क्योंकि इनमें बनी नक्काशी में कचरा फंस सकता है और यह जल्दी गंदा भी हो जाता है. लकड़ी की टाइल्स काफी लंबे समय तक चलती हैं, लेकिन इनका जीवनकाल इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस तरह की लकड़ी (मटेरियल) का इस्तेमाल कर रहे हैं.
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पाइन और शीशम के मेल से बनी टाइल्स लगभग 150 से ₹170 प्रति पीस/वर्ग फुट तक मिल जाती हैं, जबकि सागवान या देवदार जैसी प्रीमियम लकड़ी से बनवाने पर खर्च 350 से ₹700 प्रति वर्ग फुट तक हो सकता है. एक बार लगाने पर यह थोड़ा महंगा पड़ सकता है, लेकिन इसके बाद 25 से 30 साल के लिए आप निश्चिंत हो जाते हैं.