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क्या अमेरिका, इंग्लैंड वाले भी करते हैं जादू-टोना? वहां ऐसे होते हैं टोटके

भारत ही नहीं अमेरिका और इंग्लैंड जैसे विकसित देशों में जादू- टोना और तंत्र- मंत्र, टोटके जैसी चीजें व्यापक रूप से प्रचलित हैं और इनकी जड़ें अतीत में गहराई तक जमी हुई है. आज भी ऐसे मामले कभी- कभी सामने आ जाते हैं.

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इंग्लैंड और अमेरिका जैसे देशों में भी जादू- टोना जैसे अंधविश्वास का काफी प्रभाव है और वहां भी तरह- तरह के टोटके किए जाते हैं (Photo - Pexels)
इंग्लैंड और अमेरिका जैसे देशों में भी जादू- टोना जैसे अंधविश्वास का काफी प्रभाव है और वहां भी तरह- तरह के टोटके किए जाते हैं (Photo - Pexels)

अमेरिका, इंग्लैंड और ऐसे ही पश्चिमी देशों में जादू-टोना का अपना इतिहास रहा है. इंग्लैंड में तो 16वीं और 17वीं शताब्दी में लोगों का जादू टोना पर इतना विश्वास था कि वहां के राजा ने तंत्र- मंत्र करने वालों को सजा देने के लिए अलग से कानून बना रखा था. 

1450 से 1750 के बीच पूरे यूरोप में फैले डायन-विरोधी अभियान और जादू- टोना पर करने वालों पर शिकंजा कसने की कार्रवाईयां इतिहास की सबसे विवादास्पद और भयावह घटनाओं में से एक हैं, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 100,000 लोगों (जिनमें से अधिकतर महिलाएं थीं) पर जादूगरी और तंत्र- मंत्र करने का मुकदमा चलाया गया, जिनमें से लगभग आधे को मौत की सजा दी गई.

इंग्लैंड में लंबे समय तक रहा है जादू टोने का प्रभाव
15वीं और 18वीं शताब्दी के बीच पूरे यूरोप में  जादू- टोना और तंत्र-मंत्र  का उन्माद इतनी तेजी से फैला कि इन अंधविश्वासों को लोग सच मानने लग गए थे. इस दौरान  हजारों लोगों को जादू-टोना और तंत्र- मंत्र करने के शक में मौत के घाट उतार दिया गया था. इंग्लैंड के राजा जेम्स जादू- टोना से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इस पर एक किताब तक लिख दी थी. 

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जेम्स का जादू-टोने के प्रति जुनून उनके बचपन से ही देखा जा सकता है. जब उनकी मां, स्कॉटलैंड की रानी मैरी की हिंसक मृत्यु हुई, तो इसके पीछे की वजह भी उन्होंने तंत्र- मंत्र को बताया था. 

जादू-टोने का सबसे चर्चित मामला ग्लॉसेस्टर की डचेस एलेनोर कोभम का था. 1441 में उन पर रोजर बोलिंगब्रोक नामक एक जादूगर और मार्जरी जॉर्डेमेन नामक एक ज्ञानी महिला को जादू-टोने से हेनरी VI की हत्या करने के लिए नियुक्त करने का आरोप लगाया गया था.

उन्हें दोषी पाया गया, और दूसरों को ऐसी प्रथाओं से आगाह करने के लिए,उनको पुराने सेंट पॉल कैथेड्रल के प्रांगण में बने एक मंच पर खड़ा किया गया.  उनके जादूई सामान, जिनमें मोम की मूर्तियां, राजदंड और जादुई तांबे के ताबीजों से सजी तलवारें शामिल थीं, को भी प्रदर्शित किया गया. उन्हें राजद्रोह का दोषी ठहराया गया और फांसी पर लटकाकर, उनके शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए.

मार्गरी को स्मिथफील्ड में विधर्मी या देशद्रोही होने के आरोप में जला दिया गया था. कोभम ने सार्वजनिक प्रायश्चित किया और दलील दी कि उसने जादूगरों को राजा को मारने के लिए नहीं, बल्कि ड्यूक ऑफ ग्लॉसेस्टर से संतान प्राप्त करने के लिए अपने जादू का उपयोग करने के लिए नियुक्त किया था. उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई.

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15वीं शताब्दी के दौरान, कुलीन वर्गों में जादू-टोने और तंत्र-मंत्र को लेकर बार-बार चिंता व्यक्त की गई, जिसके परिणामस्वरूप राजद्रोह, विधर्म, मानहानि और हत्या के कुछ मुकदमे चले. 

आज भी इंग्लैंड और अन्य यूरोपीय देशों में कभी- कभार ऐसे मामले सामने आ जाते हैं, जिसमें जादू- टोना की वजह से जघन्य अपराध को अंजाम देने के साक्ष्य मिलते हैं. वहां अब भी ऐसे लोग हैं, जो पुरानी दकियानूसी प्रथाओं पर विश्वास कर बैठते हैं.  

अमेरिका में भी है टोने- टोटके का प्रभाव
इसी तरह अमेरिका और लैटिन अमेरिकी देशों में सैंटेरिया नाम का एक पंथ काफी प्रभावी था, जो जादू- टोने पर आधारित थी. दुनिया में कई ऐसे धर्म और परंपराएं हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. सैंटेरिया  ऐसी ही एक अनोखी धार्मिक परंपरा है. इसकी शुरुआत अफ्रीका से हुई, लेकिन बाद में यह क्यूबा पहुंची और फिर धीरे-धीरे लैटिन अमेरिका और अमेरिका के कई हिस्सों में फैल गई.

19वीं सदी की शुरुआत में पश्चिमी अफ्रीका के योरूबा  समुदाय के हजारों लोगों को गुलाम बनाकर क्यूबा लाया गया था. वे अपने साथ अपनी धार्मिक मान्यताएं और पूजा-पद्धति भी लेकर आए. समय के साथ इन मान्यताओं का मेल रोमन कैथोलिक धर्म की कुछ परंपराओं से हुआ और इसी से सैनतेरिया परंपरा का जन्म हुआ.'सैनतेरिया' नाम स्पेनिश शब्द 'सैंटो'यानी 'संत' से निकला है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस धर्म के अनुयायियों ने अपने देवी-देवताओं को कैथोलिक संतों से जोड़कर देखना शुरू कर दिया था.

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सैंटेरिया टोटका क्या है
सैंटेरिया में देवी-देवताओं को ओरिशा कहा जाता है. अनुयायियों का मानना है कि ये दिव्य शक्तियां अपने भक्तों की रक्षा करती हैं, उन्हें बुद्धि देती हैं, सफलता दिलाती हैं और मुश्किल समय में सही रास्ता दिखाती हैं.इस धर्म में माना जाता है कि खास धार्मिक अनुष्ठानों और भविष्यवाणी के जरिए ओरिशा से संपर्क किया जा सकता है.

इसके लिए प्रशिक्षित पुजारी, जिन्हें बाबालावो  कहा जाता है, पवित्र ताड़ के बीज या अन्य धार्मिक वस्तुओं का इस्तेमाल करके भविष्यवाणी करते हैं.कई बार इस प्रक्रिया के बाद किसी खास ओरिशा को संदेश पहुंचाने के लिए बलि भी दी जाती थी. 

अनुयायियों का विश्वास है कि इस दौरान कुछ भक्त आध्यात्मिक अवस्था में पहुंच जाते हैं और उनके शरीर के माध्यम से ओरिशा लोगों से संवाद करते हैं. माना जाता है कि वे लोगों को आशीर्वाद देते हैं, बीमारियों से राहत दिलाते हैं और भविष्य से जुड़ी बातें भी बताते हैं. यह एक तरह से तंत्र- मंत्र और जादू- टोना आधारित पद्धति है. 

वुडू भी है जादू टोने से जुड़ा अंधविश्वासी टोटका
सैंटेरिया की तरह ही वुडू का भी कॉन्सेप्ट यूरोप और अमेरिका में अफ्रीका से आई तंत्र- मंत्र से जुड़ा एक अंधविश्वास था. जब अफ्रीका से गुलाम बनाकर लोगों को लाया गया तो उनके साथ उनकी यह वुडू पद्धति भी स्पेन से होते हुए यूरोप और अमेरिका तक पहुंच गई और फिर इस पर रोमन कैथोलिक धर्म के प्रभाव से तंत्र- मंत्र करने का एक अलग रूप ले लिया. 

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इसमें जिस पर जादू करना होता है. उसका एक छोटा सा पुतला बनाकर उस पर टोटके किए जाते हैं और ऐसा माना जाता है कि उस पुतले को जैसे- जैसे कष्ट दिया जाता है. लक्षित शख्स के साथ भी वैसा ही होता है. 

इस तरह यूरोप और अमेरिका में भी जादू- टोने जैसा अंधविश्वास काफी गहराई तक फैला हुआ है. अभी भी ऐसे मामले सामने आते रहते हैं.  

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