घर किराए पर देना आसान लगता है, लेकिन असली परेशानी तब शुरू होती है जब किराएदार से घर खाली करने को कहने पर भी वह तैयार न हो. ऐसे में मकान मालिक के मन में कई सवाल आते हैं. क्या उसका सामान बाहर निकाल सकते हैं? क्या ताला बदल सकते हैं? या पुलिस की मदद लेनी होगी? लेकिन गुस्से में कोई कदम उठाने के बजाय पहले यह समझना जरूरी है कि किराएदार को घर से निकालने के भी कुछ नियम होते हैं. ये नियम हर जगह एक जैसे नहीं हैं. किराए का एग्रीमेंट, किराएदारी की अवधि और आपके राज्य के कानून के हिसाब से प्रक्रिया अलग हो सकती है. ऐसे में पहले कागज और एग्रीमेंट देखें, फिर जरूरत के हिसाब से लिखित नोटिस और कानूनी प्रक्रिया अपनाएं. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि किराएदार घर खाली नहीं कर रहा हो तो मकान मालिक को क्या करना चाहिए.
सबसे पहले किराए का एग्रीमेंट देखें
सबसे पहले यह देखिए कि किराए का एग्रीमेंट कब तक के लिए था. उसमें मकान खाली करने, नोटिस देने, किराया न देने और एग्रीमेंट खत्म होने के बाद की शर्तें क्या लिखी हैं. अगर एग्रीमेंट की अवधि खत्म हो चुकी है, तो भी यह जरूरी नहीं कि मकान मालिक खुद से किराएदार का सामान बाहर निकाल दे. मामले के हिसाब से कानूनी प्रक्रिया की जरूरत पड़ सकती है.
किराएदार को लिखित नोटिस दें
अगर आप चाहते हैं कि किराएदार मकान खाली करे, तो उसे लिखित नोटिस देना बेहतर रहता है. नोटिस में साफ लिखा जा सकता है कि किराएदारी खत्म हो गई है और किस तारीख तक मकान खाली करके कब्जा सौंपना है. केंद्रीय कानून के तहत, कुछ ऐसी किरायेदारों में जहां कोई अलग अनुबंध या स्थानीय कानून लागू नहीं है, सामान्य नियम के तौर पर महीने-दर-महीने किराए की स्थिति में 15 दिन का लिखित नोटिस दिया जाता है. लेकिन यह नियम हर किराएदारी पर सीधे लागू नहीं होता, क्योंकि स्थानीय कानून और एग्रीमेंट की शर्तें अलग हो सकती हैं. इसलिए नोटिस भेजने से पहले अपने राज्य के लागू किराया कानून और एग्रीमेंट की शर्तें देखना जरूरी है.
नोटिस भेजने का सबूत रखें
सिर्फ मौखिक रूप से यह कह देना कि 'घर खाली कर दो' बाद में विवाद होने पर काफी नहीं हो सकता. इसलिए नोटिस भेजने और उसके मिलने का रिकॉर्ड संभालकर रखें. किराए का एग्रीमेंट, किराया मिलने की रसीद या बैंक रिकॉर्ड, बातचीत के मैसेज और नोटिस की कॉपी जैसे दस्तावेज आगे काम आ सकते हैं.
किराया नहीं दे रहा है तो रिकॉर्ड संभालें
अगर किराएदार लंबे समय से किराया नहीं दे रहा है, तो कितने महीने का किराया बकाया है, उसका पूरा हिसाब रखें. बैंक स्टेटमेंट, रसीद और किराए से जुड़े मैसेज संभालकर रखें. किराया न देना कई जगहों पर मकान खाली कराने की कानूनी कार्रवाई का आधार बन सकता है, लेकिन इसके लिए लागू स्थानीय कानून और मामले की परिस्थितियां देखी जाती हैं.
जबरदस्ती सामान बाहर न निकालें
यह सबसे जरूरी बात है. किराएदार घर खाली नहीं कर रहा है तो उसका सामान सड़क पर रख देना, ताला बदल देना या खुद से जबरन कब्जा लेना जोखिम भरा हो सकता है. किसी किराएदार को बेदखल करने की प्रक्रिया संबंधित कानून और अदालत या रेंट अथॉरिटी के आदेश के अनुसार हो सकती है. उदाहरण के तौर पर कुछ राज्य किराया कानूनों में साफ तौर पर बताया गया है कि किराएदार को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अलावा बेदखल नहीं किया जा सकता.
जरूरत पड़े तो कानूनी कार्रवाई करें
अगर नोटिस देने के बाद भी किराएदार घर खाली नहीं करता, तो अगला कदम आपके राज्य के कानून और किराएदारी की स्थिति पर निर्भर करेगा. ऐसे मामले में स्थानीय वकील से सलाह लेकर बेदखली या कब्जा वापस लेने की उचित कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा सकती है. अदालत या संबंधित अथॉरिटी के आदेश के बाद ही आगे की कार्रवाई करना ज्यादा सुरक्षित रहता है.
पुलिस के पास कब जाएं?
अगर किराएदार के साथ विवाद के दौरान धमकी, मारपीट, तोड़फोड़ या कोई अन्य आपराधिक घटना हो रही है, तो पुलिस से संपर्क किया जा सकता है. लेकिन केवल इस वजह से कि किराएदार मकान खाली नहीं कर रहा, हर मामले में पुलिस जाकर उसे तुरंत बाहर निकाल देगी, ऐसा जरूरी नहीं है. मकान खाली कराने का विवाद अक्सर किरायेदारी और सिविल कानून की प्रक्रिया से जुड़ा होता है.
किराएदार से मकान खाली कराने का कोई एक तरीका पूरे भारत में लागू नहीं होता. राज्य के किराया कानून, एग्रीमेंट की शर्तें, किराएदारी की अवधि और मकान खाली कराने का कारण इन सबके आधार पर प्रक्रिया बदल सकती है. इसलिए सबसे सुरक्षित तरीका है कि पहले एग्रीमेंट देखें, लिखित नोटिस दें, सभी दस्तावेज संभालकर रखें और जरूरत पड़ने पर स्थानीय कानून के मुताबिक कानूनी प्रक्रिया अपनाएं. जबरदस्ती सामान बाहर निकालने या ताला बदलने के बजाय कानूनी रास्ता अपनाना बेहतर है.