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दशहरा-दिवाली पर किराए के घर में करानी है पेंटिंग, पैसा कौन देगा? मकान मालिक या किराएदार, जानें नियम

दशहरा-दिवाली पर किराए के घर में रंगाई-पुताई कराने का खर्च किसे उठाना होगा? जानिए किरायानामे और किरायेदारी कानून के हिसाब से मकान मालिक और किराएदार की जिम्मेदारी क्या है.

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क्या हर साल किराएदार को अपनी जेब से घर पेंट करवाना होगा या फिर इसकी जिम्मेदारी मकान मालिक की होगी? ( Photo: ITG)
क्या हर साल किराएदार को अपनी जेब से घर पेंट करवाना होगा या फिर इसकी जिम्मेदारी मकान मालिक की होगी? ( Photo: ITG)

दशहरा और दिवाली आते ही बहुत से लोग अपने घर की साफ-सफाई और रंगाई-पुताई शुरू कर देते हैं. लेकिन अगर घर अपना नहीं बल्कि किराए का है, तो एक सवाल अक्सर सामने आता है कि आखिर पेंट कराने का खर्च कौन उठाएगा? क्या हर साल किराएदार को अपनी जेब से घर पेंट करवाना होगा या फिर इसकी जिम्मेदारी मकान मालिक की होगी? दरअसल, किराए के घर की मरम्मत और रखरखाव को लेकर नियमों में मकान मालिक और किराएदार की जिम्मेदारियां अलग-अलग बताई गई हैं. हालांकि सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि दोनों के बीच हुए रेंट एग्रीमेंट में इस बारे में क्या लिखा है.

अगर रेंट एग्रीमेंट में पेंट और रंगाई-पुताई की जिम्मेदारी किराएदार की नहीं दी गई है, तो सामान्य तौर पर घर की सफेदी और पेंटिंग का खर्च मकान मालिक की जिम्मेदारी माना जाता है. उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 की दूसरी अनुसूची में भी दीवारों की सफेदी और दरवाजे-खिड़कियों की पेंटिंग को मकान मालिक की जिम्मेदारी में रखा गया है. उत्तर प्रदेश के लिए भी इस पर स्पष्ट आधार है. यूपी नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 की दूसरी अनुसूची में दीवारों की सफेदी और दरवाजे-खिड़कियों की पेंटिंग को मकान मालिक की जिम्मेदारी में रखा गया है, जब तक रेंट एग्रीमेंट कुछ अलग न कहता हो.

दशहरा-दिवाली पर पेंट करवाना हो तो कौन देगा पैसा?
मान लीजिए कोई परिवार कई साल से किराए के मकान में रह रहा है. समय के साथ दीवारों का रंग फीका पड़ गया है और त्योहार से पहले घर को नया लुक देने के लिए पेंट करवाने की जरूरत है. अगर यह सामान्य इस्तेमाल की वजह से हुआ है और किरायेदार ने दीवारों को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचाया है, तो पेंटिंग का खर्च आम तौर पर मकान मालिक की जिम्मेदारी में आता है. यूपी के कानून में सामान्य टूट-फूट को अलग माना गया है और मकान मालिक तथा किराएदार की जिम्मेदारियां तय की गई हैं. कानून के अनुसार, मकान मालिक पर दरवाजे-खिड़कियों की पेंटिंग जैसी जिम्मेदारियां डाली गई हैं, जबकि किराएदार पर रोजमर्रा की छोटी-मोटी मरम्मत की जिम्मेदारियां हो सकती हैं. 

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किराए का घर लेते समय बनाया गया रेंट एग्रीमेंट इस मामले में बहुत महत्वपूर्ण है. कानून में भी यह व्यवस्था है कि मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी किरायानामे में अलग तरीके से तय की जा सकती है. इसलिए अगर एग्रीमेंट में साफ लिखा है कि किरायेदार को हर साल या किरायेदारी खत्म होने पर पेंट करवाना होगा, तो मामला उसी शर्त के हिसाब से तय हो सकता है.

अगर किराएदार ने दीवार खराब कर दी हो तो?
सामान्य रूप से इस्तेमाल के कारण पेंट का पुराना होना और किरायेदार की लापरवाही से दीवार खराब होना एक जैसी बात नहीं है. सामान्य समय के साथ दीवार का रंग फीका पड़ गया तो इसे सामान्य टूट-फूट माना जा सकता है. लेकिन किरायेदार ने दीवार पर ऐसा नुकसान कर दिया जिसे सामान्य इस्तेमाल का हिस्सा नहीं माना जा सकता, तो उसकी मरम्मत का खर्च किरायेदार पर आ सकता है.

यानी दशहरा-दिवाली पर सिर्फ घर को नया और साफ दिखाने के लिए सामान्य रंगाई-पुताई करानी है, तो सबसे पहले रेंट एग्रीमेंट देखें. अगर उसमें किरायेदार पर इसकी जिम्मेदारी नहीं डाली गई है, तो उत्तर प्रदेश के नियमों के मुताबिक पेंटिंग मकान मालिक की जिम्मेदारी में आती है. इसलिए त्योहार से पहले किराए के घर में पेंट करवाने को लेकर मकान मालिक और किरायेदार के बीच विवाद हो, तो केवल यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर हाल में पैसा किराएदार को ही देना है. 

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