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रेंट एग्रीमेंट में ये बातें नहीं लिखी तो बाद में हो सकता है बड़ा झगड़ा, घर लेते समय जरूर रखें ध्यान

किराए पर घर लेते या देते समय सिर्फ किराया और समय लिखना काफी नहीं है. रेंट एग्रीमेंट में सिक्योरिटी अमाउंट, बिजली-पानी का बिल, मरम्मत, किराया बढ़ाने, घर खाली करने और घर में रहने वाले लोगों जैसी जरूरी बातें साफ लिखना जरूरी है.

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एग्रीमेंट में बातें जितनी साफ लिखी होंगी, बाद में झगड़े की संभावना उतनी ही कम होगी. ( Photo: ITG)
एग्रीमेंट में बातें जितनी साफ लिखी होंगी, बाद में झगड़े की संभावना उतनी ही कम होगी. ( Photo: ITG)

किराए पर घर लेना या अपना घर किराए पर देना आजकल आम बात है. लेकिन कई बार मकान मालिक और किराएदार के बीच छोटी सी बात बड़ा विवाद बन जाती है. कभी किराया बढ़ाने को लेकर झगड़ा होता है तो कभी बिजली-पानी के बिल पर बात बिगड़ जाती है. कई मामलों में घर खाली कराने और जमा पैसे लौटाने को लेकर भी विवाद हो जाता है. इन परेशानियों से बचने का सबसे आसान तरीका है कि रेंट एग्रीमेंट बनाते समय हर जरूरी बात पहले ही साफ-साफ लिख दी जाए. सिर्फ किराया और घर का पता लिख देना काफी नहीं है.

1. हर महीने कितना किराया देना है
एग्रीमेंट में यह साफ लिखा होना चाहिए कि किराया कितना है और हर महीने किस तारीख तक देना है. अगर किराया ऑनलाइन देना है या बैंक खाते में देना है तो उसका तरीका भी लिखा जा सकता है. इससे बाद में यह कहकर विवाद नहीं होगा कि किराया कम या ज्यादा तय हुआ था.

2. किराया कब बढ़ेगा
कई बार कुछ महीनों या एक साल बाद मकान मालिक किराया बढ़ाना चाहता है. ऐसे में पहले से यह लिख देना बेहतर है कि किराया कब और किन शर्तों पर बढ़ेगा. अगर किराया बढ़ाने की कोई तय बात नहीं हुई है तो अचानक बढ़े किराए को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हो सकता है.

3. एडवांस या सिक्युरिटी मनी कितनी है
घर लेते समय किराएदार से सुरक्षा राशि यानी सिक्योरिटी डिपॉजिट लिया जाता है. एग्रीमेंट में इसकी रकम जरूर लिखें. साथ ही यह भी साफ करें कि घर खाली करने के बाद यह पैसा कब वापस किया जाएगा और किन परिस्थितियों में इसमें से कोई रकम काटी जा सकती है.

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4. बिजली-पानी का बिल कौन देगा
यह छोटी बात लगती है, लेकिन इसी को लेकर काफी विवाद हो सकता है. एग्रीमेंट में साफ लिखें कि बिजली, पानी, गैस, रखरखाव या दूसरे शुल्कों का भुगतान कौन करेगा. अगर किसी बिल का कुछ हिस्सा मकान मालिक और कुछ किराएदार देगा तो उसका तरीका भी पहले ही लिख दें.

5. घर में टूट-फूट होने पर खर्च कौन उठाएगा
घर में रहने के दौरान छोटी-मोटी चीजें खराब हो सकती हैं. वहीं पाइप, बिजली की लाइन या दूसरी बड़ी खराबी भी हो सकती है. इसलिए एग्रीमेंट में यह साफ करना समझदारी है कि सामान्य रखरखाव और बड़ी मरम्मत की जिम्मेदारी किसकी होगी.

6. घर कब खाली करना होगा
एग्रीमेंट खत्म होने या घर खाली करने की स्थिति में कितने दिन पहले सूचना देनी होगी, यह भी लिखना जरूरी है. अगर किराएदार को घर छोड़ना है तो उसे कितने दिन पहले मकान मालिक को बताना होगा. इसी तरह मकान मालिक घर खाली करवाना चाहता है तो उसे कितनी पहले सूचना देनी होगी, यह भी समझौते में तय किया जा सकता है.

7. घर में कौन-कौन रह सकता है
किराए का घर सिर्फ जिस व्यक्ति के नाम पर दिया गया है, उसके लिए है या परिवार के दूसरे सदस्य भी रह सकते हैं, यह भी साफ होना चाहिए. अगर किराएदार घर किसी दूसरे व्यक्ति को रहने के लिए दे सकता है या नहीं, तो इसकी शर्त भी एग्रीमेंट में लिखी जा सकती है.

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8. घर में बदलाव करने की अनुमति
किराएदार दीवार में छेद करने, पेंट बदलने, कोई स्थायी फिटिंग लगाने या घर में बड़ा बदलाव करने से पहले मकान मालिक की अनुमति लेगा या नहीं, यह भी साफ लिखें. इससे घर खाली करते समय होने वाले विवाद को कम किया जा सकता है.

9. घर में सामान की लिस्ट बनाएं
अगर मकान मालिक घर में पंखा, एसी, गीजर, अलमारी, पलंग या कोई दूसरा सामान दे रहा है तो उसकी सूची एग्रीमेंट के साथ लगाना अच्छा रहता है. घर खाली करते समय यह आसानी से देखा जा सकता है कि कौन सा सामान सही हालत में वापस मिला.

10. रेंट एग्रीमेंट की अवधि
समझौता कितने समय के लिए है, इसकी तारीख साफ लिखें. शुरुआत की तारीख और खत्म होने की तारीख दोनों दर्ज होनी चाहिए. अगर समझौता आगे बढ़ाना है तो उसकी शर्त भी पहले से तय की जा सकती है.

सबसे जरूरी बात- सिर्फ कागज बनाना ही काफी नहीं
रेंट एग्रीमेंट बनाते समय मकान मालिक और किराएदार, दोनों को कागज को ध्यान से पढ़ लेना चाहिए. किराया कितना होगा, सिक्योरिटी कितनी है, बिजली-पानी का बिल कौन देगा, मरम्मत कौन करवाएगा और घर खाली करने से पहले कितने दिन पहले बताना होगा, ये सारी बातें साफ लिखी होनी चाहिए. इसके अलावा अपने राज्य के नियम भी देख लें कि रेंट एग्रीमेंट का पंजीकरण या किसी तरह का सत्यापन जरूरी है या नहीं.

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अलग-अलग राज्यों में इसके नियम अलग हो सकते हैं. एग्रीमेंट में बातें जितनी साफ लिखी होंगी, बाद में झगड़े की संभावना उतनी ही कम होगी. इसलिए मकान मालिक और किराएदार को जरूरी बातें सिर्फ आपस में बोलकर तय नहीं करनी चाहिए, बल्कि उन्हें एग्रीमेंट में लिखवा लेना चाहिए.

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