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psychology Facts: टेंशन होते ही घर की सफाई क्यों करने लगते हैं लोग? साइकोलॉजी ने बताई दिलचस्प वजह

क्या आप भी किसी बात की टेंशन होने पर अचानक घर या अपना कमरा साफ करने लगते हैं? ऐसा कई लोगों के साथ होता है. जब हमारी जिंदगी की कोई परेशानी तुरंत ठीक नहीं होती, तब हम अपने आसपास की चीजों को ठीक करने लगते हैं. जैसे बिखरे हुए कपड़े समेटना या टेबल साफ करना.

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हमारा आसपास का माहौल हमारे मन पर असर डाल सकता है. ( Photo: ITG)
हमारा आसपास का माहौल हमारे मन पर असर डाल सकता है. ( Photo: ITG)

कई लोगों के साथ ऐसा होता है कि जैसे ही वे किसी बात को लेकर परेशान, चिंतित या तनाव में होते हैं, अचानक घर की सफाई करने लगते हैं. कोई अलमारी ठीक करने लगता है, कोई बर्तन धोने लगता है, तो कोई पूरे कमरे की चीजें अपनी जगह लगाने में जुट जाता है. पहली नजर में यह सिर्फ सफाई की आदत लग सकती है. लेकिन साइकोलॉजी के अनुसार, कई बार इसके पीछे हमारे दिमाग की एक खास प्रतिक्रिया काम कर रही होती है. जब जिंदगी की कुछ बातें हमारे कंट्रोल से बाहर लगने लगती हैं, तब हम उन चीजों को ठीक करने लगते हैं जिन्हें हम आसानी से कंट्रोल कर सकते हैं. 

साइकोलॉजिस्ट कहते हैं कि मान लीजिए किसी व्यक्ति को नौकरी की चिंता है, परीक्षा का तनाव है या परिवार में कोई परेशानी चल रही है. इन समस्याओं को तुरंत खत्म करना हमेशा संभव नहीं होता. लेकिन वह अपने सामने पड़ा बिखरा हुआ कमरा साफ कर सकता है. वह कपड़े तह कर सकता है, किताबें लगा सकता है या टेबल साफ कर सकता है. कुछ ही समय में उसे अपनी मेहनत का नतीजा दिखाई देने लगता है. यहीं से दिमाग को यह एहसास मिल सकता है कि भले ही जिंदगी की हर चीज उसके हाथ में नहीं है, लेकिन वह अपने आसपास की कुछ चीजों को जरूर ठीक कर सकता है. साइकोलॉजी में इसे कंट्रोल का एहसास वापस पाने की कोशिश से जोड़कर देखा जाता है. 

सफाई करने पर तुरंत दिखता है नतीजा
जिंदगी की बड़ी समस्याएं जल्दी हल नहीं होतीं. नौकरी की परेशानी, पैसों की चिंता या रिश्तों की समस्याओं का जवाब तुरंत नहीं मिलता. लेकिन सफाई में ऐसा नहीं होता. आपने गंदा कमरा देखा और सफाई शुरू की. थोड़ी देर बाद कमरा साफ दिखने लगा. बिखरे हुए कपड़े अपनी जगह पहुंच गए और टेबल चमकने लगी. दिमाग को तुरंत दिखाई देता है कि उसने कुछ काम पूरा कर लिया है. यह काम पूरा होने और कुछ हासिल करने का एहसास व्यक्ति को अच्छा महसूस करा सकता है. इसी वजह से कई लोग तनाव में सफाई करने के बाद थोड़ा हल्का महसूस करते हैं.

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बिखरा हुआ कमरा भी बढ़ा सकता है तनाव
हमारा आसपास का माहौल हमारे मन पर असर डाल सकता है. अगर कमरे में हर तरफ सामान फैला हो, अधूरे काम पड़े हों और चीजें बिखरी हुई दिखाई दें, तो हमारा दिमाग बार-बार उन्हें नोटिस कर सकता है. इससे यह एहसास हो सकता है कि अभी बहुत सारे काम बाकी हैं. एक स्टडी में घर को बिखरा हुआ या अधूरा बताने वाले लोगों में तनाव से जुड़े शारीरिक पैटर्न अलग पाए गए. इससे यह संकेत मिलता है कि घर का माहौल और हमारा तनाव एक-दूसरे से जुड़े हो सकते हैं. इसलिए जब हम आसपास की चीजें व्यवस्थित करते हैं, तो कुछ लोगों को मानसिक रूप से भी शांति महसूस हो सकती है.

सफाई करना दिमाग को कैसे शांत कर सकता है?
सफाई करते समय हमारा ध्यान एक काम पर लग जाता है. जैसे कपड़े तह करना, फर्श साफ करना या चीजों को सही जगह रखना. इस दौरान व्यक्ति कुछ समय के लिए अपनी परेशानियों से ध्यान हटाकर एक आसान और साफ नतीजे वाले काम पर ध्यान देता है. सफाई में एक तरह का क्रम भी होता है. पहले सामान उठाना, फिर उसे सही जगह रखना और आखिर में साफ कमरा देखना. यह क्रम कई लोगों को अच्छा लग सकता है, क्योंकि उन्हें लगता है कि चीजें धीरे-धीरे व्यवस्थित हो रही हैं. 2023 के एक स्टडी में तनावपूर्ण अनुभवों के बाद सफाई से जुड़े व्यवहारों और तनाव की प्रतिक्रिया के बीच संबंध देखा गया. रिसर्चर ने पाया कि वास्तविक सफाई और सफाई की कल्पना करना भी तनाव की मनोवैज्ञानिक और शारीरिक प्रतिक्रियाओं को कम करने में मदद कर सकता है. 

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लेकिन हर तनाव में सफाई करने वाला व्यक्ति एक जैसा नहीं होता. यह जरूरी नहीं है कि हर व्यक्ति चिंता होने पर सफाई करने लगे. कुछ लोग तनाव में सोते हैं, कुछ गाना सुनते हैं, कुछ दोस्तों से बात करते हैं और कुछ बाहर घूमने चले जाते हैं. सफाई करना तनाव से निपटने के कई तरीकों में से सिर्फ एक तरीका हो सकता है. अगर आपको किसी तनावपूर्ण दिन के बाद घर साफ करके अच्छा और शांत महसूस होता है, तो यह आमतौर पर सामान्य व्यवहार हो सकता है.

कब चिंता की बात हो सकती है?
सफाई करना हमेशा किसी मानसिक बीमारी का संकेत नहीं है. लेकिन अगर किसी व्यक्ति को बार-बार सफाई करने की इतनी तेज इच्छा हो कि वह उसे रोक ही न पाए, या उसे डर लगे कि सफाई न करने से कुछ बुरा हो जाएगा, तो यह सामान्य सफाई की आदत से अलग हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, अगर सफाई का व्यवहार व्यक्ति के कंट्रोल से बाहर महसूस हो, बहुत ज्यादा समय लेने लगे या डर और मजबूरी से जुड़ा हो, तो मेंटल हेस्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना जरूरी हो सकता है. 

जब हमारे दिमाग में बहुत सारी चिंताएं चल रही होती हैं और जिंदगी बिखरी हुई लगती है, तब हम कई बार अपने आसपास की चीजों को ठीक करने लगते हैं. हम शायद नौकरी की समस्या तुरंत हल नहीं कर सकते, लेकिन अपनी अलमारी ठीक कर सकते हैं. हम किसी रिश्ते की परेशानी तुरंत खत्म नहीं कर सकते, लेकिन अपना कमरा साफ कर सकते हैं. यही छोटी-सी सफाई दिमाग को यह एहसास दिला सकती है कि सब कुछ मेरे हाथ में नहीं है, लेकिन कुछ चीजें तो मैं ठीक कर सकता हूं. शायद यही वजह है कि कई लोगों को टेंशन के समय अचानक सफाई करने का मन करता है और साफ-सुथरा कमरा देखने के बाद वे पहले से थोड़ा शांत और बेहतर महसूस करने लगते हैं.

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