scorecardresearch
 

डिस्प्ले में सही दिखता है, फिर भी तेल कम! ऐसे होता है पेट्रोल पंप पर खेल

क्या आप जानते हैं पेट्रोल पंप पर कैलिब्रेशन में गड़बड़ी की वजह से ग्राहकों को कम तेल मिलता है और वो पैसे ज्यादा तेल का देते हैं. तो जानते हैं ये कैलिब्रेशन है क्या...

Advertisement
X
पेट्रोल पंप पर कई बार कैलिब्रेशन में गड़बड़ी पाई जाती है. (Photo: PTI)
पेट्रोल पंप पर कई बार कैलिब्रेशन में गड़बड़ी पाई जाती है. (Photo: PTI)

पेट्रोल पंप पर मशीन में 10 लीटर लिखा और डिस्प्ले पर भी 10 लीटर ही दिखा, तो आमतौर पर सब मान लेते हैं कि उसे पूरे 10 लीटर पेट्रोल या डीजल मिल गया. लेकिन कर्नाटक में हुई जांच ने इस सिस्टम पर सवाल खड़े किए हैं.  दरअसल, हुआ ऐसा कि कर्नाटक सरकार ने पेट्रोल पंप पर जांच की और देखा है कि पेट्रोल पंप वाले आखिर ग्राहकों को जितना पैसा ले रहे हैं, उतना पेट्रोल दे रहे हैं या नहीं. फिर जो सच सामने आया वो हैरान कर देने वाला था. इसमें पता चला कि 805 में से 768 पंपों की मशीन गड़बड़ है यानी डिस्प्ले में जितना पेट्रोल दिखता है, उतना आपके फ्यूल टैंक में आता है नहीं. 

कुछ पंपों में तो गड़बड़ी ज्यादा थी, जिसके बाद 101 पंपों पर कार्रवाई की गई और इन पर कुल 6.66 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया. दरअसल, पेट्रोल पंप पर सबसे ज्यादा गड़बड़ होती है कैलिब्रेशन में, जिसकी वजह से डिस्प्ले में दिखे तेल की मात्रा असल में दिए गए तेल से काफी अलग होती है. तो अब आपको समझाते हैं कि आखिर कैलिब्रेशन है क्या और कैसे इसमें गड़बड़ी होती है. 

कैलिब्रेशन होता क्या है?

कैलिब्रेशन का सीधा मतलब है मशीन जितना ईंधन दिखा रही है, वास्तव में उतना ही ईंधन निकल रहा है या नहीं. यानी आपको डिस्प्ले में 10 लीटर तेल दिख रहा है तो 10 लीटर तेल ही मशीन से निकलना चाहिए. अब कई पेट्रोल पंप पर ये ही कैलिब्रेशन गड़बड़ होता है. इसके लिए सरकार समय-समय पर जांच भी करती है और देखती है क्या पेट्रोल पंप वालों की मशीनें सही हैं. इसके लिए अधिकारी मानक माप के जरिए कैलिब्रेशन की जांच करते हैं. 

Advertisement

कितनी कमी को गड़बड़ी माना जाता है?

यहीं पूरी कहानी समझना जरूरी है. हर छोटा अंतर अपने आप में जुर्माना या केस का आधार नहीं बनता. कर्नाटक में हुई हालिया कार्रवाई में मंत्री के मुताबिक 10 लीटर पर 50 मिलीलीटर तक का वैरिएशन अनुमत सीमा के भीतर था. इस सीमा से ज्यादा अंतर मिलने पर कार्रवाई की गई. यानी अगर 10 लीटर का डिस्प्ले है और जांच में करीब 9.95 लीटर के आसपास डिलीवरी होती है, तो यह अनुमत सीमा के भीतर हो सकती है. लेकिन इससे ज्यादा कमी होने पर मामला गंभीर हो जाता है.

फिर गड़बड़ी होती कैसे है?

पेट्रोल पंप की मशीन केवल यह नहीं बताती कि नोजल से वास्तव में कितना तेल निकला. पूरी व्यवस्था में फ्लो मीटर और डिस्पेंसिंग मैकेनिज्म मिलकर मात्रा को मापते और डिस्प्ले पर दिखाते हैं. अगर डिस्पेंसिंग यूनिट की अक्युरेसी में गड़बड़ आ जाए, तो डिस्प्ले पर दिखाई गई मात्रा और वास्तविक डिलीवरी में अंतर हो सकता है. यही वजह है कि सिर्फ स्क्रीन पर दिखाई दे रहे आंकड़े को देखकर ग्राहक यह पक्का नहीं कर सकता कि वास्तविक मात्रा भी उतनी ही है. 

लेकिन, आपको बता दें कि ऐसा नहीं है कि हमेशा पेट्रोल पंप जानकार इसमें गड़बड़ी करते हैं और जानकर पेट्रोल कम देते हैं. कई बार मशीन में और कुछ खराबी की वजह से ये अंतर आ जाता है. ऐसे में इसकी समय समय पर जांच होना जरूरी है. 

Advertisement

शक हो तो क्या करें?

अगर पेट्रोल की मात्रा को लेकर शक है, तो ग्राहक पेट्रोल पंप पर 5 या 10 लीटर के माप से जांच कराने की मांग कर सकता है. आप ऐसा कर सकते हैं. इसलिए अगली बार सिर्फ मीटर पर दिखाई दे रही रकम और लीटर देखकर संतुष्ट होने के बजाय यह भी ध्यान रखें कि पेट्रोल पंप की मशीन की कैलिब्रेशन वैध है या नहीं. वैसे सरकार समय-समय पर ये चेक करती है, लेकिन इसकी टाइम ज्यादा है, ऐसे में ये जांच कम समय अंतराल में होना चाहिए. 
 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement