अगर मान लीजिए आप दिल्ली से गोरखपुर जा रहे हैं और आपको एक दिन का या कुछ देर के लिए लखनऊ में काम है... तो आप पहले दिल्ली से लखनऊ की टिकट करवाएंगे, फिर कुछ घंटे बाद की लखनऊ से गोरखपुर की टिकट करवाएंगे. लेकिन, क्या आप जानते हैं रेलवे के एक नियम के हिसाब से आप एक टिकट से भी ऐसा कर सकते हैं और आपको दो टिकट नहीं करवानी होगी और एक टिकट में काम हो जाएगा. तो जानते हैं ट्रेन के नियम हैं क्या...
दरअसल, भारतीय रेलवे में इसके लिए ब्रेक ऑफ जर्नी यानी यात्रा-विराम का नियम है. इसका मतलब है कि यात्री अपनी यात्रा के बीच में किसी स्टेशन पर रुकता है और तय शर्तों के तहत बाद में आगे का सफर जारी करता है. इसके लिए दूसरी टिकट की जरुरत नहीं होती और एक टिकट से ही काम हो जाता है. हालांकि, यह सुविधा हर टिकट और हर ट्रेन पर लागू नहीं होती. इसके लिए रेलवे की कुछ शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं.
कब-कब एक टिकट से चल जाएगा काम?
अब जानते हैं कि इस तरह की सुविधा का फायदा उठाने का क्या नियम है... जर्नी ब्रेक की सुविधा उन यात्रा में मिलती है, जब आपकी जर्नी 500 किलोमीटर से ज्यादा हो. इसके साथ ही पहला ठहराव 500 किलोमीटर बाद ही मिल सकता है. यानी 800 किलोमीटर की यात्रा है तो आप 501 किलोमीटर के बाद यात्रा में ब्रेक ले सकते हैं.
अगर 1,000 किलोमीटर तक की यात्रा है तो आप इसमें एक बार ब्रेक ले सकते हैं. इसके साथ ही एक दिन के अंदर दूसरी ट्रेन पकड़ सकते हैं, जो आगे जा रही है. यानी गोरखपुर जा रहे हैं तो लखनऊ उतरिए और एक दिन के अंदर फिर से गोरखपुर जाने वाली ट्रेन पकड़ लीजिए.
वहीं, अगर यात्रा 1,000 किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा में अधिकतम दो बार यात्रा-विराम की अनुमति है. इस स्थिति में आप दो बार किसी स्टेशन से बाहर जा सकते हैं और फिर अगली ट्रेन पकड़कर आगे की यात्रा पूरी कर सकते हैं. इसके लिए आपको बार-बार टिकट लेने की जरुरत नहीं है. बस आपको जिस स्टेशन पर यात्रा रोकनी है, वहां स्टेशन मैनेजर या अधिकृत रेलवे कर्मचारी से टिकट पर जरूरी एंट्री यानी एंडोर्समेंट कराना होता है.

अब इन नियमों को एक उदाहरण से समझते हैं...
मान लीजिए किसी यात्री ने 600 किलोमीटर की एकल यात्रा का टिकट लिया है. वह शुरुआती स्टेशन से 501 किलोमीटर की यात्रा करने के बाद किसी स्टेशन पर रुकना चाहता है. रेलवे के नियमों के हिसाब से शर्तें पूरी होने पर वह वहां अधिकतम दो दिन का यात्रा-विराम ले सकता है.
इसके उलट, अगर वह 800 किलोमीटर की टिकट पर शुरुआती स्टेशन से केवल 423 किलोमीटर की यात्रा करने के बाद रुकना चाहता है, तो इस नियम के तहत इसकी अनुमति नहीं है. यानी केवल लंबी दूरी का टिकट होना पर्याप्त नहीं है, ठहरने की जगह और बाकी शर्तें भी मायने रखती हैं.
किन स्थितियों में नहीं मिलेगा इसका फायदा?
रेलवे के नियमों के मुताबिक, राजधानी, शताब्दी और जन शताब्दी जैसी ट्रेनों में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है. आरक्षित टिकट पर यात्रा-विराम का इरादा टिकट बुक कराते समय बताना जरूरी है. अगर यात्री ने सीधे अंतिम स्टेशन तक आरक्षण करा लिया है, तो बीच के स्टेशन पर इस सुविधा के तहत यात्रा-विराम की अनुमति नहीं है.
साथ ही इंटरनेट से बुक किए गए ई-टिकट पर जर्नी ब्रेक टिकट बुक करने की सुविधा उपलब्ध नहीं है. इसलिए स्लीपर या AC में सफर करने वाले यात्रियों को यह नहीं मानना चाहिए कि बीच में रुकने के बाद उनकी पुरानी बर्थ अपने आप सुरक्षित रहेगी. आपको ट्रेन में बैठने की इजाजत होगी, सीट की गारंटी नहीं है.