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भारत के किस शहर को कहते हैं 'Amla Capital?', हजारों हेक्टेयर में होती है खेती

उत्तर प्रदेश का प्रतापगढ़ आंवले की खेती के लिए देशभर में मशहूर है. यहां बड़े पैमाने पर आंवले के बाग हैं और इससे कैंडी, मुरब्बा, जूस, अचार समेत कई प्रोडक्ट तैयार किए जाते हैं. यही वजह है कि प्रतापगढ़ को 'आंवला राजधानी' के नाम से जाना जाता है.

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उत्तर प्रदेश आंवला उत्पादन के मामले में देश के प्रमुख राज्यों में है. ( Photo: ITG)
उत्तर प्रदेश आंवला उत्पादन के मामले में देश के प्रमुख राज्यों में है. ( Photo: ITG)

सर्दियां आते ही बाजार में हरे रंग का छोटा सा फल खूब नजर आने लगता है. यह फल है आंवला. इसका स्वाद खट्टा और कसैला होता है, लेकिन इसका इस्तेमाल सिर्फ फल के तौर पर खाने तक सीमित नहीं है. इससे अचार, मुरब्बा, जूस, कैंडी और पाउडर समेत कई चीजें बनाई जाती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा शहर भी है जिसकी पहचान ही आंवले से जुड़ी हुई है? उत्तर प्रदेश का प्रतापगढ़ देश में 'आंवला राजधानी' के नाम से जाना जाता है. यहां बड़े पैमाने पर आंवले की खेती होती है और इससे जुड़े कई छोटे-बड़े कारोबार भी चलते हैं. 

प्रतापगढ़ को क्यों कहा जाता है आंवले की राजधानी?
उत्तर प्रदेश आंवला उत्पादन के मामले में देश के प्रमुख राज्यों में है. राज्य के कुल आंवला उत्पादन में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी बताई जाती है. वहीं, प्रतापगढ़ को राज्य का सबसे बड़ा आंवला उत्पादक जिला बताया गया है. यहां करीब 20 हजार हेक्टेयर जमीन पर आंवले के बाग हैं. इसी बड़े पैमाने पर होने वाली खेती की वजह से प्रतापगढ़ की पहचान आंवले के प्रमुख केंद्र के रूप में बनी है. जिला प्रशासन भी इसे 'सिटी ऑफ आंवला' यानी आंवले के शहर के तौर पर पहचानता है. 

सिर्फ आंवला बेचने तक सीमित नहीं है कारोबार
प्रतापगढ़ में आंवला सीधे बागों से बाजार तक पहुंचने के बजाय कई तरह के प्रोडक्ट में बदला जाता है. यहां आंवले से कैंडी, मुरब्बा, जूस, अचार, पाउडर और लड्डू जैसे सामान तैयार किए जाते हैं. इसका फायदा यह है कि आंवले को सिर्फ उसके सीजन में बेचने की जरूरत नहीं पड़ती. उसे अलग-अलग प्रोडक्ट में बदलकर लंबे समय तक रखा और बेचा जा सकता है. इससे किसानों के साथ-साथ छोटे कारोबारियों और आंवला प्रोसेसिंग से जुड़े लोगों के लिए भी कमाई के नए रास्ते बनते हैं.

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प्रतापगढ़ के आंवले को मिला GI टैग
प्रतापगढ़ के आंवले की एक और खास पहचान है. इसे मार्च 2023 में GI रजिस्ट्रेशन मिला था. GI टैग किसी खास इलाके में बनने या उगने वाले उत्पाद को उसकी अलग पहचान देता है. यानी प्रतापगढ़ में तय भौगोलिक क्षेत्र में उगाए जाने वाले आंवले को इससे बाजार में अपनी अलग पहचान मिलती है. 

महिलाओं के लिए भी बना कमाई का जरिया
आंवले से जुड़े कारोबार में स्थानीय महिलाएं भी हिस्सा ले रही हैं. स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आंवले से कैंडी, प्रिजर्व, जूस, अचार और पाचन से जुड़े पाउडर जैसे प्रोडक्ट तैयार कर रही हैं. सितंबर 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में प्रतापगढ़ के आंवला उद्योग और यहां काम करने वाले लोगों का जिक्र किया था. उनके मुताबिक जिले में करीब 100 आंवला प्रोसेसिंग यूनिट काम कर रही थीं. 

खेत से निकलकर देशभर तक पहुंच रहा आंवला
प्रतापगढ़ की कहानी सिर्फ ज्यादा आंवला पैदा करने की नहीं है. यहां इस फल को अलग-अलग प्रोडक्ट में बदलकर बाजार तक पहुंचाया जा रहा है. यही वजह है कि आंवला यहां सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि किसानों, छोटे कारोबारियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़ा कारोबार बन चुका है. हजारों हेक्टेयर में फैले आंवले के बाग और इससे बनने वाले अलग-अलग प्रोडक्ट प्रतापगढ़ को देश के प्रमुख आंवला केंद्रों में अलग पहचान देते हैं. 

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