दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पूर्वजों और मृत लोगों को याद करने की अलग-अलग परंपराएं हैं. कहीं लोग अपने दिवंगत परिजनों की कब्रों पर जाते हैं, तो कहीं खास त्योहार मनाकर उन्हें याद किया जाता है. लेकिन क्या आपने कभी ऐसे त्योहार के बारे में सुना है, जिसमें मान्यता है कि साल में एक महीने के लिए अंडरवर्ल्ड यानी मृतकों की दुनिया के दरवाजे खुल जाते हैं और भटकती आत्माएं इंसानों की दुनिया में लौट आती हैं?
इसे हंग्री घोस्ट फेस्टिवल (Hungry Ghost Festival) यानी 'भूखे भूतों का त्योहार' कहा जाता है. इसकी शुरुआत चीन से मानी जाती है, लेकिन अब यह एशिया के कई हिस्सों और दुनिया भर में बसे चीनी समुदायों के बीच मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दौरान मृतकों की आत्माएं धरती पर लौटती हैं. उन्हें खाना, अगरबत्ती और दूसरी चीजें चढ़ाकर शांत और संतुष्ट करने की कोशिश की जाती है.
क्या है हंग्री घोस्ट फेस्टिवल?
हंग्री घोस्ट फेस्टिवल मृत पूर्वजों और भटकती आत्माओं को सम्मान देने का एक खास तरीका है. इसे मनाने वाले लोगों की मान्यता है कि इस दौरान ऐसी आत्माएं धरती पर आती हैं, जो भूखी या परेशान हो सकती हैं और उन्हें शांति की तलाश होती है.
इसी वजह से लोग इन आत्माओं के लिए खाने-पीने की चीजें रखते हैं. फल, मांस, मिठाइयां और दूसरी चीजों का भोग लगाया जाता है. कई जगह अगरबत्ती जलाई जाती है.
इस त्योहार की एक खास परंपरा कागज से बनी चीजों को जलाना भी है. लोग कागज के नोट और कार, टीवी जैसी महंगी चीजों के मॉडल बनाकर जलाते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से ये चीजें आत्माओं तक पहुंचती हैं और उन्हें परलोक में सुख-सुविधाएं मिलती हैं.
कब मनाया जाता है यह त्योहार?
हंग्री घोस्ट फेस्टिवल का सबसे महत्वपूर्ण दिन सातवें चंद्र महीने की 15वीं तारीख होती है. पश्चिमी कैलेंडर के हिसाब से यह आमतौर पर अगस्त या सितंबर में पड़ती है. हालांकि सिर्फ एक दिन ही इसका आयोजन नहीं होता. पूरा सातवां चंद्र महीना ही कई जगह'घोस्ट मंथ' यानी भूतों का महीना माना जाता है. इस दौरान अलग-अलग जगहों पर पूजा, अनुष्ठान और सामुदायिक कार्यक्रम होते रहते हैं.मान्यता है कि इस पूरे महीने में मृतकों की आत्माओं को इंसानों की दुनिया में घूमने की आजादी होती है.
चीन से शुरू होकर कई देशों तक पहुंचा
इस त्योहार की जड़ें चीन में हैं और इसमें ताओ धर्म और बौद्ध धर्म की मान्यताओं का प्रभाव दिखाई देता है. इसके साथ चीन की लोक मान्यताएं भी जुड़ गई हैं. आज यह चीन के अलावा सिंगापुर और ताइवान जैसे चीनी भाषी इलाकों में भी काफी लोकप्रिय है. दक्षिण-पूर्व एशिया के मलेशिया और इंडोनेशिया में रहने वाले बड़े चीनी समुदाय भी इसे मनाते हैं.
इसके अलावा वियतनाम में इससे जुड़ी परंपरा को वु लान फेस्टिवल के नाम से जाना जाता है. थाईलैंड में भी आत्माओं से जुड़ी एक संबंधित परंपरा है, जिसे फी ता खोन कहा जाता है और यह साल में कुछ पहले आयोजित होती है.
यह त्योहार चीन से बाहर जाकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बसे चीनी समुदायों तक भी पहुंचा. उदाहरण के तौर पर अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में चीनी समुदाय के बीच ऐसी परंपराओं ने प्रवासियों को अपने परिवार, पूर्वजों और पुराने दुखों से जुड़ने का एक मौका दिया.
ताओ धर्म में क्या है मान्यता?
हंग्री घोस्ट फेस्टिवल पर ताओ धर्म की अपनी मान्यताएं हैं. इसमें आत्माओं को शांत करने और उनका सम्मान करने पर जोर दिया जाता है. ताओ धर्म में तीन देवताओं को इंसान के भाग्य से जोड़कर देखा जाता है, जो क्रमशः स्वर्ग, धरती और पानी के शासक माने जाते हैं.
घोस्ट मंथ के दौरान ताओ धर्म के पुजारी खास अनुष्ठान करते हैं. वे आत्माओं के लिए खाना चढ़ाते हैं. लोग मंदिरों में जाकर प्रार्थना करते हैं और अपने किए की माफी मांगते हैं. साथ ही वे खुशहाली और बुरी किस्मत से बचने की कामना करते हैं.
इस त्योहार पर बौद्ध परंपरा में माता-पिता और पूर्वजों के प्रति कर्तव्य और सम्मान को खास महत्व दिया जाता है. इससे जुड़ी एक प्रसिद्ध कहानी में मु लियान नाम के एक बौद्ध भिक्षु का जिक्र आता है. कहानी के मुताबिक, मु लियान अपनी मां को तकलीफ में देखकर उन्हें बचाने के लिए अंडरवर्ल्ड तक पहुंचे.
कहा जाता है कि उनकी मां को शाकाहारी होते हुए मांस खाने के कारण नरक की सजा मिली थी. मु लियान ने प्रार्थना और भोजन के भोग के जरिए उनकी पीड़ा कम करने की कोशिश की. इसी कहानी से भूखी आत्माओं को खाना खिलाने की परंपरा को दया, सेवा और अपने पूर्वजों के प्रति समर्पण से जोड़कर देखा जाने लगा.
भूतों के लिए खाना ही नहीं, पैसे और कार भी जलाते हैं
इस त्योहार में सबसे दिलचस्प चीजों में से एक है आत्माओं के लिए चीजों की पेशकश. लोग फल, मांस, मिठाई और दूसरी खाने की चीजें रखते हैं. साथ ही अगरबत्ती जलाई जाती है. लेकिन इसके अलावा कागज से बनी नकली करेंसी और महंगी चीजों के मॉडल भी जलाए जाते हैं.
इन कागजों को आमतौर पर जोस पेपर कहा जाता है. इन्हें पैसे या महंगी वस्तुओं की शक्ल में मोड़ा जाता है. लोगों की मान्यता है कि आग में जलाने से इनका आध्यात्मिक रूप मृतकों तक पहुंचता है. कई जगह इन चीजों को इतनी बड़ी मात्रा में जलाया जाता है कि आग अलाव जैसी दिखाई देने लगती है.
सड़कों पर होते हैं खास कार्यक्रम
हंग्री घोस्ट फेस्टिवल सिर्फ पूजा और भोग तक सीमित नहीं है. कई इलाकों में यह एक बड़े सामुदायिक आयोजन में बदल जाता है. सड़कों पर स्टेज शो, कठपुतली कार्यक्रम, शेरों के नृत्य, नीलामी और सामूहिक भोज आयोजित किए जाते हैं. कई बार बांस से अस्थायी मंच बनाए जाते हैं.
इन कार्यक्रमों में लोककथाओं और पौराणिक कहानियों को नाटक और प्रदर्शन के जरिए पेश किया जाता है. इस दौरान मंच के आगे की कुछ सीटें खाली रखी जाती हैं. मान्यता है कि ये सीटें इंसानों के लिए नहीं, बल्कि वहां मौजूद आत्माओं के लिए हैं.
ताइवान में दिखता है 'भूत भगाने' वाला अनोखा नृत्य
ताइवान में इस दौरान 'एट जनरल्स'नाम का एक खास नृत्य भी देखने को मिलता है. इसमें कलाकार डरावना मेकअप और खास तरह की पोशाक पहनते हैं. वे एक तय तरीके से चलते, पैर पटकते और इशारे करते हैं. इस पूरे प्रदर्शन का मकसद भटकती आत्माओं को काबू में करना और समुदाय को बुरी शक्तियों से सुरक्षित रखना माना जाता है.यानी यहां थिएटर और धार्मिक परंपरा एक साथ दिखाई देती है.
जहां इस त्योहार में मृतकों का स्वागत और सम्मान किया जाता है. वहीं घोस्ट मंथ के दौरान कुछ चीजों से बचने की भी परंपरा है. कई लोग इस महीने में शादी करने, नया घर बदलने या बड़ी खरीदारी करने से बचते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से बुरी किस्मत आकर्षित हो सकती है.यही वजह है कि घोस्ट मंथ कई लोगों के लिए आस्था, श्रद्धा और थोड़े डर का अनोखा मिश्रण होता है.
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हंग्री घोस्ट फेस्टिवल सिर्फ भूतों से जुड़ा कोई डरावना त्योहार नहीं है. इसके पीछे मृत पूर्वजों को याद करने, उनका सम्मान करने और उनके प्रति अपने कर्तव्य को निभाने की भावना भी जुड़ी है. एक महीने तक चलने वाली इन परंपराओं में लोग मानते हैं कि मृतक और जीवित लोगों की दुनिया के बीच की दूरी कुछ समय के लिए कम हो जाती है. इसलिए वे अपने पूर्वजों और भटकती आत्माओं के लिए भोजन, प्रार्थना और दूसरी चीजें अर्पित करते हैं.