कई बार घर के नल में पानी का प्रेशर काफी कम हो जाता है. ऐसे में काम जल्दी निपटाने में परेशानी होती है. नल का प्रेशर बढ़ाने के लिए टंकी में एक पाइप लगानी पड़ती है. इसे लगाने से नल का प्रेशर खुद- ब- खुद बढ़ जाता है. चलिए जानते हैं टंकी में इसके लिए किस तरह की पाइप लगती है.
पानी की टंकी से नल का प्रेशर बढ़ाने के लिए टंकी के आउटलेट यानी टंकी से पानी बाहर निकालने के लिए से 1.5 इंच यानी डेढ़ इंच) की सीपीवीसी या यूपीवीसी पाइप लगानी चाहिए. इतनी पतली पाइप लगाने से पानी का बहाव कम हो जाता है.
इसके बाद धीरे-धीरे नीचे आते हुए उसे रिड्यूसर की मदद से पाइप को और पतला कर देने से प्रेशर और बढ़ जाता है. डेढ़ इंच की पाइप को रिड्यूसर लगाकर इसे 1 इंच और फिर बाथरूम या किचन में जाने के लिए 3/4 इंच मोटी पाइप लगा देनी चाहिए.
इस तरह ओवरहेड टंकी से मुख्य सप्लाई हमेशा 1.5 इंच के मोटे पाइप से शुरू करना बेहतर होता है. जैसे-जैसे पाइपलाइन नीचे की मंजिलों या कमरों की तरफ आए, उसे रिड्यूसर लगाकर 1.25 इंच, 1 इंच, आधा इंच यहां तक की 3/4 इंच तक कर देना बेहतर होता है.
इसमें लोहे की पाइप की बजाय अच्छी क्वालिटी की ब्रांडेड CPVC या UPVC पाइप का इस्तेमाल हमेशा कारगर होता है. लोहे की पाइप में जंग (कचरा) लगने से वह अंदर से ब्लॉक हो जाती है और प्रेशर कम हो जाता है.
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प्रेशर बढ़ाने के लिए एक काम और बहुत जरूरी है. पानी की सप्लाई पाइम में एल्बो यानी मोड़ कम रखना चाहिए. पाइपलाइन में 90 डिग्री के एल्बो कम से कम लगाएं. ज्यादा मोड़ होने पर हर एल्बो पर 5-6% प्रेशर कम हो जाता है. 90 डिग्री एल्बो की जगह 45 डिग्री एल्बो या लॉन्ग बैंड का इस्तेमाल बेहतर होता है.
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इसके अलावा एयर वेंट लगाना नहीं भूलना चाहिए. पाइपलाइन में एयर लॉक होने से पानी का फ्लो रुक जाता है. इससे बचने और लगातार प्रेशर बनाए रखने के लिए एयर वेंट पाइप जरूर लगवाएं, जो टंकी के लेवल से करीब 1.5 फीट ऊंची होनी चाहिए. वाटर टैंक का आउटलेट पॉइंट टंकी के तल से 2 से 2.5 इंच ऊंचा होना चाहिए, ताकि नीचे बैठने वाली मिट्टी या कचरा पाइप में न जाए.