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कैसे बकरी पालकर पैसे कमा रहे लोग? काम शुरू करने के लिए आधे पैसे देगी सरकार

देशभर में बड़ी संख्या में किसान खेती के साथ पशुपालन को अतिरिक्त कमाई के साधन के तौर पर अपनाते हैं. सरकार भी किसानों और पशुपालकों को पशुपालन से जोड़ने के लिए कई योजनाएं चलाती है. ऐसी ही एक योजना बकरी पालन से जुड़ी है.

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गुजरात में 10+1 बकरी इकाई की योजनाएं हैं (Photo:ITG)
गुजरात में 10+1 बकरी इकाई की योजनाएं हैं (Photo:ITG)

अगर आप खेती के साथ पशुपालन करके अपनी आमदनी बढ़ाना चाहते हैं तो बकरी पालन एक विकल्प हो सकता है. देश के अलग-अलग राज्यों में बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकारी योजनाएं चल रही हैं. इन योजनाओं के तहत कहीं छोटी बकरी इकाई शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है तो कहीं बड़े स्तर पर बकरी पालन का व्यवसाय शुरू करने के लिए सब्सिडी का प्रावधान है.

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि पूरे देश में बकरी पालन के लिए कोई एक जैसी राज्य योजना नहीं है. अलग-अलग राज्यों में इकाई का आकार, सब्सिडी, पात्रता और आवेदन प्रक्रिया अलग-अलग है. इसके अलावा केंद्र सरकार की राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) के तहत भी भेड़-बकरी पालन से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट के लिए पूंजीगत सब्सिडी का प्रावधान है.

गुजरात में 10+1 बकरी इकाई की योजनाएं

गुजरात में बकरी पालन से जुड़ी 10+1 इकाई की योजनाएं संचालित हैं. इनमें 10 मादा और 1 नर बकरे की इकाई स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता का प्रावधान है. हालांकि, लाभार्थी की श्रेणी के अनुसार योजना की शर्तें और सहायता की सीमा अलग हो सकती है.

गुजरात में बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए 10+1 बकरी यूनिट से जुड़ी योजनाएं चल रही हैं. इसके तहत पात्र लाभार्थी 10 मादा बकरियों और 1 नर बकरे की यूनिट स्थापित कर सकते हैं. योजना विवरण के मुताबिक यूनिट की लागत 90 हजार रुपये निर्धारित है और पात्र लाभार्थी को लागत का 50 फीसदी यानी अधिकतम 45 हजार रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है. योजना में बकरियों के चारे, पानी, भोजन और रहने की व्यवस्था से जुड़े खर्च भी शामिल हैं. लाभार्थी की श्रेणी के अनुसार पात्रता और नियम अलग हो सकते हैं

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जामनगर जिले के तमाचल गांव के पशुपालक हथाभाई छावालिया ने भी सरकारी योजना का लाभ लेकर 10 मादा बकरियों और एक नर बकरे की इकाई शुरू की है. उनका कहना है कि सरकारी मदद और लोन की वजह से वह बकरी पालन शुरू कर पाए. अब वह इस काम से अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर करने की कोशिश कर रहे हैं.

सिर्फ गुजरात में ही नहीं चल रही ऐसी योजनाएं

बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए सिर्फ गुजरात में ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों में भी योजनाएं चल रही हैं. मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में बकरी पालन से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी संबंधित पशुपालन विभाग की आधिकारिक वेबसाइटों पर उपलब्ध है.हालांकि, इन योजनाओं में मिलने वाली सहायता और पात्रता अलग-अलग है. इसलिए किसान को अपने राज्य की योजना के नियमों के आधार पर ही आवेदन करना चाहिए.

केंद्र सरकार की योजना में बड़ा प्रोजेक्ट जरूरी

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है. केंद्र सरकार की राष्ट्रीय पशुधन मिशन की भेड़-बकरी पालन उद्यमिता योजना सामान्य 10+1 बकरी इकाई से अलग है. यह बड़े व्यावसायिक प्रोजेक्ट के लिए है.आधिकारिक दिशानिर्देशों के अनुसार उद्यमी कम से कम 500 मादा और 10 नर पशुओं की भेड़-बकरी प्रजनन इकाई स्थापित कर सकते हैं.

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इस परियोजना की पूंजीगत लागत पर 50 फीसदी तक बैक-एंडेड सब्सिडी का प्रावधान है.केंद्र सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस योजना में सब्सिडी की अधिकतम सीमा 50 लाख रुपये तक है.

यानी केंद्र की यह योजना छोटी 10+1 बकरी इकाई से अलग है. इसे छोटे किसानों के लिए मिलने वाली राज्य सरकार की बकरी पालन योजनाओं के बराबर नहीं समझना चाहिए.

किस राज्य में कितनी मदद? एक नजर में

गुजरात: 10+1 बकरी इकाई से जुड़ी योजनाएं संचालित हैं. सहायता लाभार्थी की श्रेणी और संबंधित योजना के नियमों पर निर्भर करती है.

मध्य प्रदेश: 10+1 बकरी इकाई के लिए बैंक ऋण और अनुदान आधारित योजना. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए 60 फीसदी और सामान्य वर्ग के लिए 40 फीसदी अनुदान का प्रावधान दर्ज है.

उत्तराखंड: 10+1 बकरी इकाई की 70 हजार रुपये की लागत में 63 हजार रुपये यानी 90 फीसदी राज्य सरकार द्वारा वहन करने का प्रावधान है.

हिमाचल प्रदेश: 11 बकरियों की इकाई समेत अलग-अलग इकाइयों पर 60 फीसदी सब्सिडी का प्रावधान है.

केंद्र सरकार: राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत बड़े भेड़-बकरी प्रजनन प्रोजेक्ट की पूंजीगत लागत पर 50 फीसदी तक सब्सिडी, अधिकतम 50 लाख रुपये तक.

योजना का लाभ लेने से पहले ये बात जरूर समझें

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बकरी पालन योजना में मिलने वाली सहायता को सीधे मुनाफा नहीं समझना चाहिए. बकरी पालन की लागत में पशुओं की खरीद के अलावा चारा, शेड, पानी, दवा, बीमा और देखभाल का खर्च भी शामिल होता है.

इसके अलावा बकरियों की नस्ल, बीमारी, मृत्यु दर, स्थानीय बाजार में कीमत और बिक्री की व्यवस्था का भी आमदनी पर असर पड़ता है. इसलिए योजना का लाभ लेने से पहले किसान को अपने इलाके में बकरी पालन की लागत और बाजार की स्थिति समझना जरूरी है.

आवेदन कैसे करें?

आवेदन की प्रक्रिया हर राज्य में अलग हो सकती है. कहीं ग्राम सभा और पशुपालन विभाग के जरिए चयन होता है तो कहीं ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन किया जाता है.

खेती के साथ अतिरिक्त कमाई का विकल्प

बकरी पालन छोटे और सीमांत किसानों के लिए खेती के साथ अतिरिक्त आय का विकल्प हो सकता है. अलग-अलग राज्यों की योजनाएं किसानों को शुरुआती निवेश में मदद देने के लिए बनाई गई हैं, जबकि केंद्र की राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना बड़े व्यावसायिक भेड़-बकरी पालन प्रोजेक्ट को बढ़ावा देती है.

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