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जैसे ही 'हाईजैकिंग' का पता चला... मिनटों में ही इजरायल ने प्लेन के पीछे क्यों भेजे फाइटर प्लेन?

इजरायल जा रहा फ्लाईदुबई का विमान हाईजैक होने का कोड मिलते ही इजरायली सेना ने अपने दो फाइटर जेट को प्लेन के पीछे भेज दिया था. अगर विमान सच में हाईजैक हो गया होता तो फाइटर जेट क्या करते?

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प्लेन हाईजैक होने का अलर्ट कोड मिलते ही इजरायल ने भेजे थे फाइटर जेट्स (Photo - Pexels)
प्लेन हाईजैक होने का अलर्ट कोड मिलते ही इजरायल ने भेजे थे फाइटर जेट्स (Photo - Pexels)

फ्लाई दुबई के विमान में अचानक बनी अपातकालीन स्थिति को कंट्रोल करने और वहां क्या हो रहा है. इस बारे में जानकारी कम होने के कारण, इजरायली सेना ने संभावित प्लेन हाईजैक की स्थित से निपटने की तैयारी शुरू कर दी थी. इसी प्रतिक्रिया के तौर पर इजरायल ने दो फाइटर जेट को संभावित खतरे से निपटने और उसे कंट्रोल करने के लिए भेजा था. 

प्लेन हाईजैक जैसे हालात से निपटने के लिए कई तरह के विकल्प होते हैं. सबसे पहले तो विमान में क्या हो रहा है, यह पता लगाना जरूरी होता है. इसके लिए इजरायली वायु सेना ने अपने दो लड़ाकू विमानों को तुरंत भेज दिया था. अब सवाल उठता है कि क्या ये फाइटर जेट जरूरत पड़ने पर यात्रियों से भरे हाईजैक प्लेन को हवा में उड़ा भी सकते थे? जानते हैं ऐसे हालात से निपटने के लिए क्या- क्या उपाय किए जा सकते थे.   

बुधवार की सुबह फ्लाईदुबई की फ्लाइट में सवार यात्रियों ने जिंदगी के सबसे तनावपूर्ण घंटों का सामना किया. उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि हो क्या रहा है. क्या प्लेन हाईजैक हो गई है या फिर क्रैश होने वाली है. ठीक यही हाल इजरायल के सुरक्षा बलों का था. क्योंकि, शुरुआती परिस्थितियां साफ नहीं थी कि क्या विमान में हो क्या रहा है. 

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क्यों इजरायल ने तुरंत तैनात कर दिए फाइटर जेट्स
YTnews की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार की सुबह 8:31 बजे प्लेन से स्क्वॉक कोड 7700 भेजा गया, जो सामान्य आपात स्थिति के लिए अंतरराष्ट्रीय ट्रांसपोंडर कोड है.  ठीक सात मिनट बाद 8:38 बजे, कोड 7500 एक्टिव हो गया, जो प्लेन हाईजैक  से जुड़ा होता है.

इस अलर्ट के मिलने के तुरंत बाद, इजरायली सेना ने जवाबी कार्रवाई का आकलन करने और विमान को एस्कॉर्ट करने के लिए एयरफोर्स के दो लड़ाकू विमानों को भेजा. फाइटर जेट्स की तैनाती उस प्रोसीजर के तहत की गई थी, जिनका इजरायल की सेना नियमित रूप से अभ्यास करती है. इनमें इजराइल जा रहे किसी नागरिक विमान का अपने मार्ग से भटक जाना, रेडियो कॉल का जवाब देने में विफल रहना, संकट या इमरजेंसी कोड भेजना या हाईजैक होने का संदेह होना शामिल है. 

यदि जरूरी हो, तो विमान की पहचान करने और उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए भी फाइटर जेट को भेजा जाता है. इसके साथ ही देश का हवाई क्षेत्र बंद कर दिया जाता है. फ्लाईदुबई के प्लेन को भी इजरायली फाइटर जेट एस्कॉर्ट करते रहे. सुबह 9:35 बजे इजरायली अधिकारियों को सूचना मिली कि फ्लाई दुबई का प्लेन लड़ाकू विमानों के साथ सऊदी अरब में आपातकालीन लैंडिंग के लिए जा रहा है. दस मिनट बाद, सुबह 9:45 बजे, विमान तबुक हवाई अड्डे पर उतरा. 

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ऐसे हालात में क्या करते हैं फाइटर जेट?
इससे यह साफ हो गया कि ऐसे हालात में फाइटर जेट का पहला काम हाईजैक हुए नागरिक विमान पर निगरानी रखना और उसे एस्कॉर्ट करते रहना होता है. इसके अलावा इन लड़ाकू विमानों का उद्देश्य हाईजैकर या आतंकवादियों पर जवाबी कार्रवाई करना भी होता है. ताकि घटना को बढ़ने से रोका जा सके. इसके साथ ही रणनीतिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ यात्रियों और चालक दल को चोट लगने से बचाया जा सके. 

आसान शब्दों में कहें तो अगर विमान हाईजैक हो गया है तो उसे किसी आबादी वाले जगह पर गिराने या किसी महत्वपूर्ण बिल्डिंग से टकराने जैसी घटना को रोकने का काम फाइटर जेट का होता है. अमेरिका में 9/11 की घटना के बाद से दुनिया के सभी देश ऐसे हालात से निपटने के लिए हमेशा तैयार रहते है. 

फाइटर जेट को तुरंत तैनात करने का सबसे बड़ा मकसद ही होता है कि अमेरिका जैसी कोई घटना न हो. जरूरत पड़ने पर हाईजैक हुए विमान के जरिए आतंकवादी ज्यादा नुकसान पहुंचाए, इससे पहले ही उन्हें मार गिराने का भी एक विकल्प होता है. इससे पहले  वैकल्पिक रूप से विमान को सुरक्षित रूप से किसी  हवाई अड्डे पर उतारने के लिए एस्कॉर्ट करने का भी ऑप्शन मिल जाता है.

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क्या नागरिक विमान को उड़ाने के भी दिए जाते हैं ऑर्डर?
किसी नागरिक विमान को मार गिराने का फैसला सबसे अंतिम और काफी रेयर होता है. यह फैसला केवल किसी भी देश के पॉलिटिकल लीडरशिप के ऑर्डर के बाद सीनियर मोस्ट सिक्योरिटी ऑफिसर या सिक्योरिटी एडवाइजर की सलाह से ही लिया जाता है.

इस तरह किसी नागरिक विमान को उड़ाने की स्थिति का मतलब कहीं अधिक व्यापक और गंभीर नुकसान को रोकना है. जैसे कि विमान में सवार लोगों के अलावा जमीन पर बड़े पैमाने पर अगल लोग हताहत हो सकते हैं या सामरिक, नेशनल या स्ट्रैटजिक प्रॉपर्टी पर हमला किया जा सकता है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को भारी नुकसान हो सकता है.  

क्या इजरायली फाइटर जेट्स को भी मिले थे ऐसे ऑर्डर?
अब सवाल उठता है कि क्या इजरायल के मामले में भी ऐसे ऑर्डर थे. क्या जरूरत पड़ने पर फ्लाई दुबई के विमान के उड़ाया जा सकता था. YTnews की एक रिपोर्ट के मुताबिक,  इजरायली वायु सेना ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के ऑर्डर का एक्टिव से जरूरी नहीं कि ये किसी सुरक्षा घटना का संकेत हो.

यह भी पढ़ें: कैसे यात्रियों की वजह से इजरायल जा रहा प्लेन क्रैश होने से बचा... पैसेंजर ने बताई आंखों देखी कहानी

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इजरायली वायु सेना कई तरह के हवाई खतरों से निपटने और इजरायली हवाई क्षेत्र में अनधिकृत प्रवेश को रोकने के लिए हमेशा तैयार रहती है. इसकी प्रणालियां चौबीसों घंटे आसमान की निगरानी करती हैं. किसी भी अनियमितताओं की पहचान करती हैं और खतरों का पता लगाती हैं. साथ ही कम समय में विमानों को तुरंत तैनात करने की क्षमता रखती है.

यह तैयारी निरंतर हवाई सर्वेक्षण, सतर्क बलों की तैनाती और अलग- अलग हालातों से निपटने के लिए नियमित अभ्यासों पर आधारित है. इसका मकसद किसी भी असामान्य घटना की तुरंत पहचान करना, जल्द फैसला  लेना और घटना के बढ़ने से पहले उस पर एक्शन लेना होता है. 

कैसे एक्टिव हो जाता है फाइटर जेट तैनात करने का ऑर्डर
इन्हीं कार्रवाई में एक स्पेशल ऑर्डर होता है, जो एकदम असामान्य हालात में एक्टिव हो जाता है. इसके तहत सेना उन स्थितियों पर रिएक्ट कर सकती है, जिनमें कोई आसामान्य घटना की आशंका हो. जैसे हवाई आतंकवाद की संभावना, प्लेन हाईजैक या यात्रियों सहित किसी विमान को जानबूझकर दुर्घटनाग्रस्त करने का प्रयास शामिल है. इस स्पेशल ऑर्डर के तहत ही फाइटर जेट तैनात किए जाते हैं. 

यह फाइटर जेट तैनात करने का  स्पेशल ऑर्डर कई परिस्थितियों में एक्टिव हो सकता है. जैसे जब कोई विमान अपने तय मार्ग से भटक जाता है. रेडियो कॉल का जवाब देने में विफल रहता है. इमरजेंसी कोड भेजता है और तकनीकी खराबी या मेडिकल इमरजेंसी जैसी स्थिति के लिए आपातकालीन लैंडिंग की जरूरत होती है. 

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एक बार ऑर्डर एक्टिव हो जाने के बाद, हवाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए उपाय किए जाते हैं. इनमें कभी-कभी पूरे हवाई क्षेत्र को बंद करना भी शामिल होता है. इसका मकसद अधिक गंभीर नुकसान को रोकना होता है.

जैसा कि बुधवार की सुबह हुआ था. फाइटर जेट को नागरिक विमानों की पहचान करने और उन्हें एस्कॉर्ट करने के लिए भेजा गया था. इसके बाद हालात को समझने और समस्या के समाधान होने तक निरंतर निगरानी रखी जानी थी. 

सऊदी में लैंड होने तक फाइटर जेट एस्कॉर्ट करते रहे
कल जब फाइटर जेट तैनात किए गए, तब सीनियर इजरायली अधिकारी स्थिति का लगातार जायजा लेते रहे थे. इनमें आईडीएफ के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर, एयर फोर्स कमांडर एंड ऑपरेशन और सैन्य खुफिया निदेशालयों के प्रमुख शामिल थे.

यह भी पढ़ें: चाकू मारने से लेकर प्लेन बचाने तक... इजरायल जा रहे प्लेन में बैठे 8 यात्रियों ने बताया- आखिर प्लेन में हुआ क्या था?

सुबह 9:20 बजे, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने एक आपातकालीन सुरक्षा परामर्श बैठक बुलाई. सुबह 9:35 बजे, इजरायली अधिकारियों को सूचना मिली कि विमान लड़ाकू विमानों के साथ सऊदी अरब में आपातकालीन लैंडिंग के लिए जा रहा है और 9.45 में विमान तबुक में लैंड कर गया था. तब तक दोनों फाइटर जेट प्लेन को एस्कॉर्ट करते रहे. इसके बाद इजरायली अधिकारियों ने यात्रियों को घर वापस लाने की तैयारी शुरू कर दी. 

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