घर में बिजली की वायरिंग ऐसी चीज है, जिस पर ज्यादातर लोग तब तक ध्यान नहीं देते, जब तक कोई परेशानी न होने लगे. दीवारों के अंदर लगी तारें कई साल तक ठीक दिख सकती हैं, लेकिन उनकी असली हालत का पता बाहर से नहीं चलता. अगर तारों की सुरक्षा परत खराब हो जाए, कनेक्शन ढीले पड़ जाएं या वायरिंग पर जरूरत से ज्यादा बिजली का भार पड़ने लगे, तो शॉर्ट सर्किट और आग लगने का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में सवाल उठता है कि घर की बिजली की वायरिंग आखिर कितने साल में बदलनी चाहिए?
क्या 20, 25 या 30 साल पुरानी वायरिंग को बदलना जरूरी है? इस बारे में केंद्र सरकार ने भी अहम जानकारी दी है. केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री नाइक ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि बिजली की वायरिंग कितने समय तक चलेगी, यह कई बातों पर निर्भर करता है. इसमें तारों की क्ववालिटी से लेकर बिजली के इस्तेमाल और आसपास के वातावरण तक की भूमिका होती है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि घर की वायरिंग कब बदलवानी चाहिए, खराब होने पर कौन से संकेत दिखाई देते हैं और बिजली से जुड़ा काम कराते समय किन नियमों का ध्यान रखना चाहिए.
कितने साल में बदलनी चाहिए घर की वायरिंग?
घर की बिजली की वायरिंग कितने साल तक चलेगी, इसकी कोई एक समय-सीमा सभी घरों के लिए तय नहीं की जा सकती. इसकी वजह यह है कि हर घर में इस्तेमाल होने वाले तारों की क्वालिटी, बिजली के उपकरणों की संख्या और वायरिंग लगाने का तरीका अलग-अलग हो सकता है. कई बार अच्छी क्वालिटी वाली वायरिंग लंबे समय तक चलती है, जबकि खराब तरीके से लगाई गई या जरूरत से ज्यादा बिजली का भार झेल रही वायरिंग जल्दी खराब हो सकती है. इसलिए केवल यह देखकर कि घर की वायरिंग 20, 25 या 30 साल पुरानी है, यह तय नहीं किया जा सकता कि उसे तुरंत बदलना जरूरी है.
हालांकि, अगर घर काफी पुराना है और लंबे समय से वायरिंग की जांच नहीं कराई गई है, तो किसी योग्य बिजली ठेकेदार से उसकी जांच कराना समझदारी है. खासकर तब, जब घर में एसी, गीजर या दूसरे ज्यादा बिजली खपत करने वाले उपकरण बढ़ गए हों. ध्यान देने वाली बात यह है कि सरकार ने वायरिंग बदलने के लिए 20, 25 या 30 साल की कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की है. सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, तारों की उम्र कई बातों पर निर्भर करती है. इसलिए वायरिंग बदलने का फैसला उसकी वास्तविक हालत और सुरक्षा की जांच के आधार पर करना चाहिए.

सरकार के मुताबिक, इन 4 बातों पर निर्भर करती है वायरिंग की उम्र
बिजली की वायरिंग की उम्र को प्रभावित करने वाले कई कारण बताए थे. इनमें मुख्य रूप से ये बातें शामिल हैं.
तारों की गुणवत्ता कैसी है?
बिजली की वायरिंग कितने समय तक ठीक रहेगी, इसमें तारों की गुणवत्ता की अहम भूमिका होती है. अगर तार अच्छी गुणवत्ता के हैं और उन्हें सही तरीके से लगाया गया है, तो उनके लंबे समय तक चलने की संभावना रहती है. वहीं, खराब गुणवत्ता वाले तार या गलत तरीके से की गई फिटिंग के कारण वायरिंग में जल्दी परेशानी आ सकती है. इसलिए घर बनवाते समय या उसकी मरम्मत कराते समय तारों की गुणवत्ता और उन्हें लगाने के तरीके पर ध्यान देना जरूरी है.
स्विच और सॉकेट की क्वालिटी कैसी है?
घर की बिजली व्यवस्था सिर्फ तारों से नहीं बनती. इसमें स्विच, सॉकेट, तारों को सुरक्षित रखने वाली नलियां और दूसरे उपकरण भी शामिल होते हैं. अगर इनमें से कोई हिस्सा खराब हो जाए या उसका कनेक्शन ढीला पड़ जाए, तो बिजली की व्यवस्था में परेशानी हो सकती है. उदाहरण के लिए, अगर किसी सॉकेट में प्लग लगाने पर वह ढीला रहता है या स्विच बोर्ड से जलने की गंध आती है, तो इसकी जांच करानी चाहिए. हालांकि, हर बार ऐसी परेशानी का मतलब पूरी वायरिंग खराब होना नहीं है. जांच के बाद ही पता चलेगा कि समस्या किसी एक हिस्से में है या पूरे बिजली तंत्र में.
घर में बिजली का कितना इस्तेमाल होता है?
वायरिंग की उम्र इस बात पर भी निर्भर करती है कि उस पर कितना बिजली का भार पड़ता है. पुराने समय में कई घरों में पंखे, बल्ब और कुछ सामान्य उपकरण ही होते थे. अब घरों में एसी, गीजर, माइक्रोवेव और दूसरे बिजली से चलने वाले उपकरणों की संख्या बढ़ गई है. अगर पुरानी वायरिंग को बिना जांचे ही ज्यादा बिजली खपत करने वाले उपकरणों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, तो सर्किट पर जरूरत से ज्यादा भार पड़ सकता है. इससे तार गर्म होने और सुरक्षा संबंधी समस्याएं पैदा होने का खतरा रहता है. इसलिए घर में नए उपकरण लगवाने से पहले यह जांचना जरूरी है कि मौजूदा वायरिंग और सर्किट उनका भार संभाल सकते हैं या नहीं.
घर के आसपास का वातावरण भी तारों और बिजली के दूसरे उपकरणों की हालत को प्रभावित कर सकता है. उदाहरण के लिए, दीवारों में लगातार नमी रहना, पानी का रिसाव होना या गर्मी जैसी स्थितियां वायरिंग की सुरक्षा पर असर डाल सकती हैं. अगर दीवारों में सीलन है या किसी जगह पानी के संपर्क में आने से बिजली के उपकरण खराब हो रहे हैं, तो समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे मामलों में सिर्फ तार बदलना ही पर्याप्त नहीं हो सकता. नमी या पानी के रिसाव की वजह भी दूर करनी जरूरी है.
घर की वायरिंग खराब होने के 7 संकेत, जिन्हें न करें नजरअंदाज
वायरिंग की उम्र का अंदाजा सिर्फ साल गिनकर नहीं लगाया जा सकता. इसके बजाय, घर में बिजली से जुड़ी कुछ परेशानियों पर ध्यान देना जरूरी है.
स्विच बोर्ड से जलने की स्मेल आना: अगर स्विच, प्लग या दीवार के किसी हिस्से से बार-बार जलने जैसी गंध आती है, तो यह खराब कनेक्शन या तार गर्म होने का संकेत हो सकता है.
स्विच या सॉकेट का गर्म होना: अगर स्विच बोर्ड सामान्य से ज्यादा गर्म हो रहा है या उसके आसपास का प्लास्टिक काला पड़ने या पिघलने लगा है, तो इसकी तुरंत जांच कराएं.
एमसीबी का बार-बार बंद होना: एमसीबी बिजली के सर्किट में गड़बड़ी होने पर बिजली की आपूर्ति रोक सकती है. इसके बार-बार बंद होने की वजह जरूरत से ज्यादा भार, तारों की खराबी या किसी उपकरण में गड़बड़ी हो सकती है.
लाइट का बार-बार टिमटिमाना: बल्ब की रोशनी बार-बार कम-ज्यादा होना या किसी उपकरण को चालू करते ही रोशनी कम पड़ना ढीले कनेक्शन या बिजली की आपूर्ति में परेशानी का संकेत हो सकता है.
तारों की सुरक्षा परत फटना: अगर तारों पर चढ़ी परत फट गई है या अंदर का धातु वाला हिस्सा दिखाई दे रहा है, तो बिजली का झटका लगने और शॉर्ट सर्किट का खतरा हो सकता है.
पुराने फ्यूज बॉक्स की जांच न होना: अगर घर में बहुत पुरानी बिजली व्यवस्था है और लंबे समय से उसकी सुरक्षा जांच नहीं हुई है, तो उसे योग्य बिजली ठेकेदार से दिखाना चाहिए. सिर्फ पुराना फ्यूज बॉक्स होना पूरी वायरिंग के खराब होने का प्रमाण नहीं है.
एक ही सॉकेट पर कई उपकरण चलाना: एक्सटेंशन बोर्ड या मल्टी-प्लग पर कई ज्यादा बिजली खपत करने वाले उपकरण चलाने से उस पर जरूरत से ज्यादा भार पड़ सकता है. इससे बचना चाहिए और बिजली के सर्किट की क्षमता की जांच करानी चाहिए.
इनमें से कोई संकेत दिखाई देने पर यह जरूरी नहीं कि पूरे घर की वायरिंग बदलनी ही पड़े. कभी-कभी समस्या किसी एक स्विच, सॉकेट या कनेक्शन में भी हो सकती है. लेकिन खराबी की असली वजह जानने के लिए जांच कराना जरूरी है.
क्या पुरानी वायरिंग से लग सकती है आग?
खराब वायरिंग से आग लगने का खतरा हो सकता है. अगर तारों की सुरक्षा परत खराब हो जाए, कनेक्शन ढीले हों या बिजली के सर्किट पर उसकी क्षमता से ज्यादा भार पड़ रहा हो, तो तार गर्म हो सकते हैं और चिंगारी निकल सकती है. आसपास कागज, कपड़ा या दूसरी ज्वलनशील चीजें होने पर आग लगने का खतरा बढ़ सकता है.
अगर स्विच बोर्ड से धुआं निकल रहा है, चिंगारी दिखाई दे रही है या जलने की तेज गंध आ रही है, तो उस हिस्से का इस्तेमाल तुरंत बंद करें. सुरक्षित तरीके से संभव हो तो मुख्य बिजली आपूर्ति बंद करें और योग्य बिजली विशेषज्ञ की मदद लें. धुआं या आग होने पर तारों या उपकरणों को हाथ न लगाएं और पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश न करें.
घर की वायरिंग का काम कौन कर सकता है?
घर की वायरिंग की जांच और मरम्मत के साथ-साथ यह जानना भी जरूरी है कि बिजली से जुड़ा काम किससे कराना चाहिए. बिजली अधिनियम, 2003 के तहत बनाए गए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के 2023 के सुरक्षा नियमों के मुताबिक, नई बिजली की वायरिंग लगाने, पुरानी वायरिंग में बदलाव करने और उसकी मरम्मत जैसे काम सामान्य तौर पर राज्य सरकार से लाइसेंस प्राप्त बिजली ठेकेदार से कराए जाने चाहिए. इन कामों के लिए तय योग्यता वाले व्यक्ति की सीधी निगरानी और परमिट प्राप्त व्यक्ति की जरूरत होती है.
हालांकि, नियमों में कुछ सामान्य कामों को छूट दी गई है. इनमें 250 वोल्ट तक के बल्ब, पंखे, फ्यूज, स्विच और कुछ घरेलू उपकरणों को बदलना शामिल है, बशर्ते इससे बिजली की व्यवस्था की क्षमता या स्वरूप में बदलाव न हो. इसलिए घर की पूरी वायरिंग बदलवाने या उसमें बड़ा बदलाव कराने के लिए योग्य और अधिकृत बिजली ठेकेदार की मदद लेना जरूरी है.
क्या घर की वायरिंग की जांच कराना जरूरी है?
सुरक्षा नियमों के मुताबिक, अधिसूचित वोल्टेज सीमा तक की बिजली की स्थापना के लिए मालिक या उपभोक्ता को स्वयं प्रमाणित करना होता है कि स्थापना सुरक्षा संबंधी शर्तों के अनुरूप है. इसके अलावा, मालिक या उपभोक्ता संबंधित सरकारी विद्युत निरीक्षक से भी जांच और परीक्षण करा सकता है. कुछ स्थितियों में चार्टर्ड इलेक्ट्रिकल सेफ्टी इंजीनियर (CESE) से जांच कराने का विकल्प भी उपलब्ध है.
केंद्र सरकार ने इस उद्देश्य के लिए 11 किलो वोल्ट की सीमा अधिसूचित की है. हालांकि, नियमों के तहत लागू प्रक्रिया और सीमा संबंधित क्षेत्र के नियमों के अनुसार समझनी चाहिए. यहां यह फर्क समझना जरूरी है कि बिजली की स्थापना की सुरक्षा जांच और वायरिंग की उम्र दो अलग-अलग बातें हैं. सुरक्षा नियमों में जांच और प्रमाणन की व्यवस्था बताई गई है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि हर घर की वायरिंग को एक निश्चित संख्या में साल पूरे होने पर बदलना ही होगा.
पुरानी वायरिंग बदलवाने से पहले क्या करें?
अगर आपका घर पुराना है या बिजली से जुड़ी समस्याएं बार-बार आती हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें.
किसी योग्य बिजली ठेकेदार से तारों, स्विच बोर्ड, सॉकेट, अर्थिंग और सुरक्षा उपकरणों की जांच कराएं. अगर घर में एसी या गीजर जैसे नए उपकरण लगाए जा रहे हैं, तो पहले बिजली के सर्किट की क्षमता की जांच कराएं. एमसीबी बार-बार बंद होने पर उसे बार-बार चालू न करें और उसकी जगह खुद से ज्यादा क्षमता वाली एमसीबी न लगवाएं. जले हुए सॉकेट, खराब तारों या चिंगारी निकलने वाले हिस्सों का इस्तेमाल न करें. जांच के बाद ही तय करें कि कुछ हिस्सों की मरम्मत पर्याप्त है या पूरी वायरिंग बदलने की जरूरत है.