उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थल नैनीताल में गांधी जयंती की छुट्टियों और लंबे वीकेंड के चलते पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. आमतौर पर छुट्टियों में गुलजार रहने वाला नैनीताल इस बार सैलानियों की बड़ी आमद के साथ-साथ भीषण ट्रैफिक जाम का भी गवाह बना. सुबह करीब सात बजे से ही सड़कों पर वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ने लगी. कुछ ही देर में हालात ऐसे हो गए कि कई प्रमुख मार्गों पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं.
पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ ही नैनीताल और आसपास के इलाकों में यातायात का दबाव लगातार बढ़ता गया. भवाली से कैंची धाम की ओर जाने वाले मार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लग गई. यही स्थिति गरमपानी और खैरना की ओर जाने वाली सड़कों पर भी देखने को मिली. कारों, बसों और दोपहिया वाहनों की भारी संख्या के कारण सड़क पर आवाजाही बेहद धीमी हो गई. कई स्थानों पर वाहन काफी देर तक एक ही जगह फंसे रहे. कैंची धाम में दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और नैनीताल घूमने आए पर्यटकों की भीड़ ने भवाली क्षेत्र में यातायात का दबाव और बढ़ा दिया. भवाली से कैंची धाम के बीच वाहनों की लंबी कतार लगने के बाद जाम का असर आगे के मार्गों तक पहुंच गया. गरमपानी और खैरना की ओर जाने वाले यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा. जाम में फंसे पर्यटकों के लिए सबसे बड़ी समस्या समय की बर्बादी रही. कई लोग छुट्टियां बिताने के लिए परिवार के साथ नैनीताल पहुंचे थे, लेकिन सफर का बड़ा हिस्सा सड़कों पर ही गुजर गया. हल्द्वानी और काठगोदाम से आगे की यात्रा करने वाले कुछ यात्रियों की ट्रेनें तक छूट गईं. इससे उनकी यात्रा का पूरा कार्यक्रम प्रभावित हुआ. पहाड़ों में सड़कें पहले से ही सीमित चौड़ाई वाली हैं. ऐसे में एक साथ बड़ी संख्या में निजी वाहनों के पहुंचने से यातायात को सामान्य बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है. नैनीताल के आसपास इस बार भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला.
2 से 4 अक्टूबर तक लागू था ट्रैफिक प्लान, फिर क्यों बिगड़े हालात?
पर्यटकों की संभावित भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने पहले से ही 2 से 4 अक्टूबर तक विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया था. इस व्यवस्था के तहत बाहरी वाहनों को निर्धारित पार्किंग स्थलों पर रोकने और वहां से कैंची धाम के लिए शटल सेवा संचालित करने की योजना बनाई गई थी. इसके अलावा भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजने की व्यवस्था भी की गई थी. इस ट्रैफिक प्लान का उद्देश्य शहर और आसपास के प्रमुख पर्यटन मार्गों पर वाहनों का दबाव कम करना था. शुरुआत में निर्धारित पार्किंग और शटल सेवा के जरिए यातायात को नियंत्रित करने की कोशिश की गई, लेकिन जैसे-जैसे पर्यटकों की संख्या बढ़ती गई, व्यवस्थाओं पर दबाव भी बढ़ने लगा. कैंची धाम और भवाली क्षेत्र में पार्किंग की उपलब्ध जगह कम पड़ने लगी. निर्धारित स्थलों पर वाहनों की संख्या बढ़ने से पार्किंग व्यवस्था प्रभावित हुई और कई पर्यटकों के वाहन मुख्य मार्गों पर ही पहुंचने लगे. इससे पहले से धीमी चल रही यातायात व्यवस्था और ज्यादा प्रभावित हो गई.
विशेष ट्रैफिक प्लान लागू होने के बावजूद लंबी कतारें लगने से व्यवस्थाओं की क्षमता और प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे. हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि जाम के दौरान ट्रैफिक प्लान के किन विशेष प्रावधानों को लागू करने में सबसे ज्यादा दिक्कत आई.
नैनीताल शहर में भी घंटों रेंगते रहे वाहन, मालरोड पर बढ़ा दबाव
भवाली और कैंची धाम के आसपास लगा जाम नैनीताल शहर तक भी पहुंच गया. दोपहर बाद हल्द्वानी रोड, भवाली रोड और कालाढूंगी रोड पर वाहनों का दबाव बढ़ने लगा. हल्द्वानी रोड पर हनुमानगढ़ी से रूसी बाईपास तक वाहन बेहद धीमी गति से आगे बढ़ते नजर आए. शहर के अंदर भी हालात सामान्य नहीं रहे. मालरोड, जू रोड और शेरवानी मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें दिखाई दीं. प्रमुख पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले रास्तों पर पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा. नैनीताल में रहने वाले लोगों के लिए रोजमर्रा के काम से घर से निकलना भी मुश्किल हो गया. बाजार, कार्यालय और अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचने में सामान्य से कहीं अधिक समय लगा. पर्यटकों की बड़ी संख्या से जहां पर्यटन कारोबार को फायदा मिला, वहीं शहर के भीतर यातायात की समस्या ने स्थानीय नागरिकों की मुश्किलें बढ़ा दीं.
जाम के बीच नैनी झील, चिड़ियाघर और स्नो व्यू में उमड़ी भीड़
सड़कों पर घंटों जाम के बावजूद पर्यटकों के उत्साह में कमी नहीं दिखाई दी. नैनी झील, नैनीताल चिड़ियाघर, स्नो व्यू और हिमालय दर्शन जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सैलानियों की अच्छी-खासी भीड़ रही. पर्यटक परिवार के साथ झील के किनारे घूमते, नौकायन करते और पहाड़ों के खूबसूरत नजारों का आनंद लेते नजर आए. लंबे वीकेंड की छुट्टियों के कारण बड़ी संख्या में लोगों ने उत्तराखंड के पहाड़ी पर्यटन स्थलों का रुख किया. नैनीताल की खूबसूरत वादियां, ठंडा मौसम, झील और आसपास के धार्मिक स्थल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने रहे. कैंची धाम भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण बना रहा. बाबा नीम करौली के आश्रम में दर्शन के लिए आने वाले लोगों की आवाजाही ने भवाली क्षेत्र के यातायात दबाव को और बढ़ाया. धार्मिक पर्यटन और प्राकृतिक पर्यटन का यह मेल नैनीताल क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या बढ़ने की एक प्रमुख वजह रहा.
होटल और रेस्टोरेंट कारोबार में रौनक, स्थानीय लोगों की बढ़ी परेशानी
पर्यटकों की भारी आमद का सीधा असर नैनीताल के पर्यटन कारोबार पर देखने को मिला. होटल, होमस्टे, रेस्टोरेंट, टैक्सी और अन्य पर्यटन सेवाओं से जुड़े कारोबारियों के लिए लंबा वीकेंड व्यस्त रहा. बड़ी संख्या में पर्यटकों के पहुंचने से बाजारों और पर्यटन स्थलों के आसपास आर्थिक गतिविधियां बढ़ीं. दूसरी तरफ स्थानीय लोगों के लिए यही भीड़ परेशानी का कारण बन गई. सड़कों पर वाहनों की अधिकता, पार्किंग की सीमित जगह और लगातार लगते जाम ने शहर की सामान्य रफ्तार को प्रभावित किया. पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोगों और जरूरी सेवाओं से जुड़े वाहनों को भी यातायात में मुश्किलों का सामना करना पड़ा. पहाड़ी पर्यटन स्थलों में पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ ही बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. नैनीताल जैसे शहरों में सीमित सड़क नेटवर्क और पार्किंग क्षमता के कारण अचानक बढ़ने वाली भीड़ को संभालना आसान नहीं है.
पर्यटकों की भीड़ ने फिर उजागर की पहाड़ों में ट्रैफिक प्रबंधन की चुनौती
नैनीताल में लंबे वीकेंड के दौरान पैदा हुए जाम ने एक बार फिर पहाड़ों में पर्यटन और यातायात प्रबंधन के बीच संतुलन बनाने की जरूरत को सामने ला दिया है. पर्यटकों की बढ़ती संख्या जहां स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए अहम है, वहीं सीमित सड़कें, पार्किंग की कमी और एक साथ बड़ी संख्या में निजी वाहनों का पहुंचना यातायात व्यवस्था के लिए चुनौती बन रहा है. ऐसे में पार्किंग स्थलों की क्षमता बढ़ाने, शटल सेवाओं को प्रभावी बनाने, प्रमुख चौराहों पर यातायात नियंत्रण और पर्यटकों को पहले से ट्रैफिक की जानकारी देने जैसे उपाय महत्वपूर्ण हो सकते हैं. इसके साथ ही कैंची धाम, भवाली और नैनीताल के बीच यातायात के दबाव को अलग-अलग हिस्सों में बांटने की रणनीति भी उपयोगी साबित हो सकती है. गांधी जयंती के लंबे वीकेंड पर नैनीताल में उमड़ी करीब 12 हजार सैलानियों की भीड़ ने पर्यटन कारोबार को तो रफ्तार दी, लेकिन कई किलोमीटर लंबे जाम ने यह भी दिखा दिया कि पहाड़ों में बढ़ते पर्यटन दबाव के अनुरूप यातायात व्यवस्था को लगातार मजबूत करने की जरूरत है.