आज के समय में शिक्षक दिवस पर छात्र अपने टीचर्स को फूल, ग्रीटिंग कार्ड, मिठाई और दूसरे गिफ्ट देकर सम्मान जताते हैं. कई जगह शिक्षक के सम्मान में कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पुराने समय में छात्र अपने शिक्षकों को सब्जियां भेंट करते होंगे? सुनने में यह बात थोड़ी अजीब लग सकती है, लेकिन चीन में सदियों पहले ऐसी ही एक परंपरा थी. चीन के पुराने इतिहास में छात्रों के लिए शिक्षक को सब्जियां भेंट करना सम्मान और आदर जताने का एक खास तरीका माना जाता था. यह कोई आम सब्जियां नहीं होती थीं, बल्कि इनके पीछे एक खास सोच और संदेश छिपा होता था.
कब शुरू हुई थी यह अनोखी परंपरा?
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में यह परंपरा झोउ राजवंश (Zhou Dynasty) के समय शुरू हुई थी. यह राजवंश लगभग 1046 ईसा पूर्व से 256 ईसा पूर्व तक रहा था. उस दौर में स्कूल के पहले दिन छात्र अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान जताने के लिए एक खास समारोह में हिस्सा लेते थे. इस दिन छात्र नीले रंग के कपड़े पहनकर स्कूल आते थे. वे अपने साथ जंगल या खुले इलाकों से खुद इकट्ठा करके लाई गई जंगली सब्जियां भी लाते थे. इसके बाद वे अपने शिक्षकों को ये सब्जियां भेंट करते थे.
शिक्षक को कोई भी सब्जी नहीं देते थे छात्र
इस परंपरा की सबसे दिलचस्प बात यह थी कि छात्र अपने शिक्षकों को कोई भी सब्जी नहीं दे सकते थे. इसके लिए खास तरह की जंगली सब्जियां चुनी जाती थीं. इनमें दो पौधों को खास महत्व दिया जाता था.
1. वॉटर सेलेरी (Water Celery): यह एक तरह का खुशबूदार जंगली पौधा होता है, जो पानी के आसपास उगता है.
2. व्हाइट वर्मवुड (White Wormwood): यह एक खास तरह का सुगंधित पौधा है, जिसे उसकी प्राकृतिक खुशबू और विशेषताओं के लिए जाना जाता था.
इन दोनों पौधों को चुनने के पीछे भी एक खास वजह थी. उस समय इन्हें साफ, सुगंधित और पवित्रता का प्रतीक माना जाता था. छात्रों के लिए इन पौधों को शिक्षकों को देना इस बात का संकेत था कि वे ज्ञान हासिल करने के लिए साफ मन और अच्छी सोच के साथ पढ़ाई करना चाहते हैं. यानी इन सब्जियों का महत्व सिर्फ खाने या इस्तेमाल करने तक सीमित नहीं था, बल्कि इनके जरिए छात्र अपने विचार और भावनाएं भी जाहिर करते थे.
सब्जियां देने के बाद करते थे खास रस्म
शिक्षकों को सब्जियां भेंट करने के बाद समारोह खत्म नहीं होता था. छात्र सम्मान के साथ झुककर प्रणाम करते थे. इसके बाद वे प्राचीन विद्वानों और महान गुरुओं की याद में रखी गई स्मृति पट्टिकाओं के सामने भी सिर झुकाते थे. इस रस्म के बाद सभी छात्र मिलकर ग्रुप डांस करते थे. यह डांस भी उनके सम्मान और पढ़ाई के प्रति समर्पण को दिखाने का एक तरीका था.
इस तरह स्कूल के पहले दिन होने वाला यह आयोजन सिर्फ पढ़ाई शुरू करने की औपचारिकता नहीं था, बल्कि छात्रों को शिक्षक, ज्ञान और शिक्षा के महत्व का एहसास कराने का भी एक तरीका था.
आज भी क्यों खास मानी जाती है यह परंपरा?
चीन की यह सदियों पुरानी परंपरा दिखाती है कि अलग-अलग देशों और संस्कृतियों में शिक्षक का सम्मान करने के तरीके भले ही अलग रहे हों, लेकिन गुरु के प्रति आदर की भावना हमेशा महत्वपूर्ण रही है. आज जहां छात्र अपने शिक्षकों को महंगे गिफ्ट देकर सम्मान जताते हैं, वहीं प्राचीन चीन में जंगल से खुद चुनकर लाई गई कुछ खास सब्जियां भी सम्मान का प्रतीक हुआ करती थीं. इन पौधों के जरिए छात्र यह संदेश देते थे कि वे अच्छी सोच के साथ ज्ञान हासिल करना चाहते हैं. इस परंपरा की सबसे खास बात यही थी कि शिक्षक को दिए जाने वाले उपहार की कीमत नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपी भावना और प्रतीकात्मक अर्थ मायने रखता था.