केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के महंगाई भत्ते (DA) को लेकर तीन पुरानी मांगें एक बार फिर चर्चा में हैं. 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को सौंपे गए कर्मचारी संगठनों के ज्ञापनों में DA को हर 3 महीने में संशोधित करने, इसके 25% होने पर बेसिक सैलरी में जोड़ने और इसे इनकम टैक्स से छूट देने की मांग की गई है.
खास बात यह है कि ये तीनों प्रस्ताव 20 साल से भी पहले 6वें वेतन आयोग के सामने रखे गए थे, लेकिन तब इन्हें स्वीकार नहीं किया गया था. 7वें वेतन आयोग ने भी इन पर कोई सिफारिश नहीं की. अब एक बार फिर इन मांगों पर चर्चा शुरू हुई है. हालांकि, अभी इन्हें लागू करने का कोई फैसला नहीं हुआ है.
DA में हर 3 महीने में बदलाव की मांग
फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते और पेंशनर्स के महंगाई राहत (DR) में आमतौर पर साल में दो बार संशोधन होता है. कर्मचारी संगठनों की मांग है कि महंगाई बढ़ने का असर कर्मचारियों की जेब पर कम करने के लिए DA और DR में हर 3 महीने में बदलाव किया जाए. भारत पेंशनर्स समाज (Bharat Pensioners Samaj) ने 8वें वेतन आयोग को दिए अपने ज्ञापन में तीन महीने के औसत के आधार पर DA/DR में तिमाही संशोधन की मांग की है.
संगठन ने यह भी कहा है कि महंगाई के असर की भरपाई बिना किसी कटौती या राउंडिंग के की जानी चाहिए. यह मांग नई नहीं है. 6वें वेतन आयोग के सामने भी DA को हर छह महीने के बजाय हर तीन महीने में संशोधित करने का प्रस्ताव रखा गया था. लेकिन आयोग ने इसे स्वीकार नहीं किया. उसका कहना था कि हर तीन महीने में DA संशोधित करने का कोई ठोस औचित्य नहीं है. आयोग ने साल में दो बार, 1 जनवरी और 1 जुलाई से DA संशोधन की व्यवस्था जारी रखने की सिफारिश की थी. वही व्यवस्था आजतक चली आ रही है.
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DA 25% होने पर बेसिक-पे में मर्जर
दूसरी बड़ी मांग DA को बेसिक-पे में मर्ज करने से जुड़ी है. फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशंस (FNPO) ने मांग की है कि जब भी DA या DR 25% के स्तर को पार करे, उसे बेसिक-पे या बेसिक-पेंशन में जोड़ने की सिफारिश की जाए. इसका मतलब यह है कि कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि महंगाई भत्ते का एक हिस्सा बेसिक-पे में शामिल करने के लिए 50% तक इंतजार न करना पड़े. हालांकि, यह केवल एक प्रस्ताव है. 8वें वेतन आयोग ने इस पर अभी कोई फैसला नहीं लिया है. इस मांग का इतिहास भी पुराना है.
5वें वेतन आयोग ने DA के 50% हिस्से को बेसिक-पे में जोड़कर महंगाई भत्ता (Dearness Pay) बनाने की व्यवस्था सुझाई थी. बाद में कर्मचारी संगठनों ने इस सीमा को घटाकर 25% करने की मांग की. 6वें वेतन आयोग ने साफ कहा था कि वह किसी भी स्तर पर DA को बेसिक-पे में जोड़ने की सिफारिश नहीं कर रहा है. आयोग का तर्क था कि DA को बेसिक-पे में जोड़ने के साथ महंगाई की गणना के लिए इस्तेमाल होने वाले आधार सूचकांक में भी बदलाव करना पड़ सकता है. उसके प्रस्तावित वेतन ढांचे में इस तरह का बदलाव जरूरी नहीं माना गया था.
DA पर इनकम टैक्स छूट की मांग
तीसरी मांग महंगाई भत्ते पर लगने वाले इनकम टैक्स से जुड़ी है. फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशंस ने DA को महंगाई से होने वाले अतिरिक्त खर्च की भरपाई बताया है और इसे टैक्स के दायरे से पूरी तरह बाहर रखने की मांग की है. संगठन ने HRA और ट्रांसपोर्ट अलाउंस जैसे भत्तों को भी पूरी तरह टैक्स छूट देने का प्रस्ताव रखा है. संगठन का तर्क है कि इन भत्तों का मकसद बढ़ती महंगाई के कारण होने वाले खर्च की भरपाई करना है, न कि कर्मचारी की वास्तविक संपत्ति या आर्थिक क्षमता बढ़ाना.
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ऐसे में इन पर टैक्स लगाने से महंगाई राहत का एक हिस्सा वापस टैक्स के रूप में चला जाता है. यह मांग भी 6वें वेतन आयोग के सामने रखी गई थी, लेकिन आयोग ने इस पर कोई सिफारिश नहीं की थी. अब FNPO ने इसे एक बार फिर 8वें वेतन आयोग के सामने उठाया है. अगर इस मांग को स्वीकार किया जाता है, तो कर्मचारियों की टैक्स देनदारी पर असर पड़ सकता है. फिलहाल DA पर टैक्स छूट देने का कोई नया फैसला नहीं हुआ है.
6वें और 7वें वेतन आयोग में क्या हुआ
DA से जुड़ी इन तीनों मांगों को 6वें वेतन आयोग ने अपनी रिपोर्ट के चैप्टर 4.1 में दर्ज किया था. लेकिन तिमाही संशोधन और DA को बेसिक-पे में जोड़ने के प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए गए, जबकि टैक्स छूट पर आयोग ने कोई सिफारिश नहीं दी. इसके बाद 7वें वेतन आयोग ने भी अपनी रिपोर्ट में इन तीनों मांगों पर अलग से कोई सिफारिश नहीं की. जनवरी 2014 में 6वें वेतन आयोग के आधार पर DA 100% का स्तर पार कर चुका था. उस समय कर्मचारी पक्ष ने DA को बेसिक-पे में नहीं जोड़ने के कारण वेतन की वास्तविक कीमत घटने की दलील दी थी. हालांकि, यह तर्क वेतन संशोधन लागू होने की तारीख के संदर्भ में था, न कि DA को बेसिक-पे में जोड़ने के किसी नए नियम के लिए.
8वें वेतन आयोग से अब क्या उम्मीद?
8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारी संगठनों ने इन तीनों मांगों को फिर से रखा है. इनका मकसद महंगाई के असर की भरपाई जल्दी करना, DA को बेसिक-पे में जोड़ने की सीमा कम करना और भत्तों पर टैक्स का बोझ घटाना है. फिलहाल ये मांगें हैं, कोई स्वीकृत नियम नहीं. आयोग इन्हें स्वीकार करता है, इनमें बदलाव करता है या पहले के आयोगों की तरह खारिज करता है, यह उसकी सिफारिशों और सरकार के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा. इसलिए कर्मचारियों और पेंशनर्स को अभी DA के तिमाही संशोधन, 25% पर बेसिक-पे में मर्जर या टैक्स छूट को लागू व्यवस्था नहीं मानना चाहिए.