सोशल मीडिया पर गंगा स्नान से जुड़े दो वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं. एक वीडियो में महिला बेहद कम कपड़ों में गंगा में स्नान करती दिखाई दे रही है. वहीं, दूसरे वीडियो में महिला पूरे कपड़ों में सलवार सूट पहने हुए गंगा में शालीन तरीके से स्नान करती नजर आ रही है. दोनों वीडियो सामने आने के बाद अब इनके असली होने को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. इन वीडियो को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ये वीडियो कब के हैं और कहां के हैं. अभी तक इनकी तारीख और जगह की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है. इसके साथ ही वीडियो की सत्यता की भी पुष्टि नहीं हुई है. ऐसे में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन वीडियो को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.
पहले वायरल वीडियो में एक महिला गंगा में स्नान करती और डुबकी लगाती दिखाई दे रही है. वीडियो में इसी दौरान एक युवक भी गंगा स्नान के लिए जाते हुए नजर आता है. इसके बाद एक बुजुर्ग व्यक्ति को भी गंगा में स्नान करने के लिए जाते हुए दिखाया गया है. वीडियो को सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावों के साथ शेयर किया जा रहा है. हालांकि, वीडियो कब का है, इसे किस जगह रिकॉर्ड किया गया और इसमें दिखाई दे रहे लोगों की पहचान क्या है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है. यानी फिलहाल वीडियो के साथ किए जा रहे दावों को पुख्ता तथ्य नहीं माना जा सकता.
पहले वीडियो के बाद इसी तरह का एक और वीडियो सामने आया है. इस वीडियो में महिला पूरे कपड़ों में सलवार सूट पहने हुए गंगा में स्नान करती दिखाई दे रही है. महिला का गंगा में स्नान करने का दृश्य पहले वीडियो से अलग है. लेकिन दूसरे वीडियो में भी आगे की गतिविधियां काफी हद तक पहले वीडियो जैसी ही दिखाई देती हैं. इसमें भी एक युवक गंगा स्नान के लिए जाता हुआ नजर आता है और उसके बाद एक बुजुर्ग व्यक्ति को भी गंगा की ओर जाते हुए दिखाया गया है. यही समानता अब इस पूरे मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रही है.
दोनों वीडियो में एक जैसी गतिविधियों ने बढ़ाया शक
अगर दोनों वीडियो को एक साथ देखा जाए तो उनमें कई गतिविधियां एक जैसी दिखाई देती हैं. महिला के बाद युवक का गंगा स्नान के लिए जाना और फिर बुजुर्ग का वहां पहुंचना, दोनों वीडियो में समान नजर आता है. अंतर मुख्य तौर पर महिला के दिखाई देने के तरीके में है. पहले वीडियो में महिला बेहद कम कपड़ों में दिखाई गई है, जबकि दूसरे वीडियो में वही दृश्य शालीन कपड़ों में महिला के साथ दिखाई देता है. इसी समानता और अंतर को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि वीडियो के साथ डिजिटल तरीके से छेड़छाड़ की गई हो सकती है या इसे AI की मदद से तैयार किया गया हो.
हालांकि, यह भी साफ है कि अभी तक इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि वीडियो AI से बनाए गए हैं. इसलिए इसे फिलहाल एक आशंका के तौर पर ही देखा जा रहा है. इन वीडियो के वायरल होने के बाद श्रीगंगा सभा की ओर से भी चिंता जताई गई है. श्रीगंगा सभा ने इस तरह के वीडियो बनाए जाने और सोशल मीडिया पर वायरल किए जाने की कड़ी निंदा की है.
श्रीगंगा सभा के अध्यक्ष और उत्तराखंड सरकार में राज्यमंत्री नितिन गौतम ने कहा कि उन्होंने भी सोशल मीडिया के माध्यम से वीडियो देखा है. उनका कहना है कि यदि AI के माध्यम से हमारी माताओं और बहनों के चित्र इस तरह गंगा के बीच में दिखाए जा रहे हैं तो यह अत्यंत निंदनीय है. उन्होंने कहा कि यह सभी तीर्थ निवासियों के लिए चिंता का विषय है. उनके मुताबिक तीर्थ को बदनाम करने और माताओं-बहनों को बदनाम करने के लिए जिस तरह की साजिश और कुटरचना की जा रही है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है.
नितिन गौतम ने कहा कि इस तरह की गतिविधि धर्म पर सीधा आघात है. उन्होंने शासन और प्रशासन से ऐसे लोगों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि जिन लोगों ने इस तरह का कृत्य किया है और AI चित्र या वीडियो तैयार किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने धार्मिक मर्यादा के उल्लंघन के तहत भी मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग की. नितिन गौतम ने कहा कि इससे हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं और उनके मुताबिक यह कृत्य अपराध की श्रेणी में आता है.
नितिन गौतम ने कहा कि सनातन के ऊपर प्रहार की बात नई नहीं है, लेकिन आधुनिक दौर में तकनीक के कारण इस तरह के कृत्य करना आसान हो गया है. उन्होंने कहा कि छोटे से प्रयास से इस तरह की सामग्री तैयार की जा सकती है और फिर उसे सोशल मीडिया पर फैलाया जा सकता है. उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह सनातन धर्म पर सीधा आघात है. उनका कहना है कि ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए.
वीडियो की सत्यता पर अभी सवाल बरकरार
फिलहाल दोनों वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. यह भी स्पष्ट नहीं है कि दोनों वीडियो वास्तव में एक ही स्थान के हैं या नहीं. इनके रिकॉर्ड किए जाने की तारीख और वास्तविक स्थान की भी पुष्टि नहीं हो सकी है. हालांकि, दोनों वीडियो में दिखाई देने वाली गतिविधियों की समानता और महिला के दृश्य में अंतर ने AI से वीडियो तैयार किए जाने की आशंका को जरूर जन्म दिया है. ऐसे में वायरल वीडियो को लेकर सबसे अहम सवाल यही है कि क्या ये वास्तविक वीडियो हैं या तकनीक की मदद से तैयार किए गए हैं. इसका जवाब आधिकारिक जांच या तकनीकी सत्यापन के बाद ही साफ हो सकेगा. श्रीगंगा सभा ने मामले को गंभीर बताते हुए शासन-प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है. वहीं, जब तक वीडियो की तकनीकी और तथ्यात्मक जांच नहीं होती, तब तक सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को सत्य मानना सही नहीं होगा. आज तक इन वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है. Byte: नितिन गौतम, अध्यक्ष श्रीगंगा सभा एवं राज्यमंत्री, उत्तराखंड सरकार, हरिद्वार