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कांवड़ियों से बाबा रामदेव की अपील... शराब, सिगरेट, गुटखा, हुक्का, भांग-गांजा से रहें दूर 

हरिद्वार में जड़ी-बूटी दिवस कार्यक्रम के दौरान योगगुरु बाबा रामदेव ने कांवड़ियों और शिवभक्तों से शराब, बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, हुक्का, भांग, गांजा और धतूरा जैसे सभी प्रकार के नशे से दूर रहने की अपील की. उन्होंने कहा कि सच्ची शिवभक्ति संयम, सेवा और शांति में है. साथ ही हिंसा, तोड़फोड़ और किसी भी तरह के उन्माद से बचने का भी संदेश दिया.

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बाबा रामदेव के बयान से सियासी पारा हाई है
बाबा रामदेव के बयान से सियासी पारा हाई है

सावन महीने में कांवड़ यात्रा में लाखों शिवभक्त हरिद्वार और नीलकंठ से गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं. इसी बीच पतंजलि योगपीठ के संस्थापक योगगुरु स्वामी रामदेव ने कांवड़ यात्रा में शामिल शिवभक्तों से एक खास अपील की है. उन्होंने कहा कि सच्ची शिवभक्ति का अर्थ न तो नशा है और न ही हिंसा. शिवभक्तों को शराब, बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, हुक्का, भांग, गांजा और धतूरा जैसे सभी प्रकार के नशे से दूर रहना चाहिए.

स्वामी रामदेव ने कहा कि शिवत्व का मार्ग संयम, सेवा, साधना और आत्मशुद्धि का मार्ग है. उन्होंने यह भी कहा कि जातीय, मजहबी या राजनीतिक उन्माद से न तो हिंदुत्व की प्रतिष्ठा होगी और न ही हिंदू राष्ट्र की. उनका यह बयान हरिद्वार में आचार्य बालकृष्ण के जन्मदिवस पर आयोजित 'जड़ी-बूटी दिवस' कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में आया.

हर हिंदू में हिंदुत्व, रामत्व, कृष्णत्व और शिवत्व होना चाहिए

योगगुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक पहचान उसके आध्यात्मिक मूल्यों से है. उन्होंने कहा कि जब हर हिंदू में हिंदुत्व, रामत्व, कृष्णत्व और शिवत्व का भाव होगा, वीरों का वीरत्व, ऋषियों का ऋषित्व और देवों का देवत्व होगा, तभी भारत अपने सनातन स्वरूप को सशक्त रूप से स्थापित कर सकेगा. हालांकि उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यह मार्ग उन्माद का नहीं, बल्कि आत्मसंयम और सदाचार का होना चाहिए. उन्होंने कहा कि जाति, मजहब या राजनीति के नाम पर फैलने वाला उन्माद समाज को कमजोर करता है.

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कांवड़ियों से नशा छोड़ने की अपील

सावन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु कांवड़ यात्रा करते हैं. इसी संदर्भ में स्वामी रामदेव ने कहा कि शिवभक्तों को यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि बीड़ी, सिगरेट, शराब, गुटखा, हुक्का, भांग, गांजा, सुल्फा और धतूरा जैसी चीजों का सेवन शिवभक्ति के विपरीत है. उनका कहना था कि इन चीजों को भगवान शिव का प्रसाद मानकर स्वयं सेवन करने की धारणा सही नहीं है. स्वामी रामदेव ने कहा कि भगवान शिव से जुड़ी कई परंपराओं को सही संदर्भ में समझने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि शिव स्वयं किसी प्रकार का नशा नहीं करते थे. भांग, गांजा या धतूरा अर्पित करने की परंपरा का एक प्रतीकात्मक अर्थ है, लेकिन इसे नशा करने का आधार नहीं बनाया जा सकता. उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि धार्मिक आस्था के नाम पर किसी भी प्रकार की गलत व्याख्या से बचना चाहिए.

हिंसा और तोड़फोड़ भी शिवभक्ति के खिलाफ

हाल के वर्षों में कांवड़ यात्रा के दौरान कुछ स्थानों पर तोड़फोड़ और हिंसा की घटनाएं भी सामने आती रही हैं. इसी संदर्भ में स्वामी रामदेव ने कहा कि सच्चा शिवभक्त कभी हिंसा का रास्ता नहीं अपनाता. उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की तोड़फोड़, मारपीट या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना शिवभक्ति नहीं हो सकती. शिवभक्ति का मूल संदेश शांति, करुणा और आत्मसंयम है. उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि यात्रा के दौरान अनुशासन बनाए रखें और भगवान शिव के नाम का जाप करते हुए अपनी यात्रा पूरी करें.

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गंगा केवल नदी नहीं, शिव का साकार स्वरूप

स्वामी रामदेव ने गंगा के आध्यात्मिक महत्व पर भी विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि मां गंगा भगवान शिव का साकार स्वरूप हैं. उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि गंगा में स्नान करें, गंगाजल लेकर भगवान शिव का अभिषेक करें और इस यात्रा को आत्मशुद्धि का माध्यम बनाएं. उनका कहना था कि कांवड़ यात्रा केवल पैदल चलने का नाम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के भीतर अनुशासन, धैर्य और आध्यात्मिक चेतना जगाने का अवसर भी है. मीडिया से बातचीत के दौरान स्वामी रामदेव ने बार-बार 'शिवोहम' का मंत्र दोहराया. उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के भीतर शिव का अंश है और उसी चेतना को जागृत करने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने भीतर की पवित्रता, करुणा और संयम को पहचानता है, तभी वास्तविक शिवत्व की अनुभूति होती है.

जड़ी-बूटी दिवस कार्यक्रम में पहुंचे थे रामदेव

स्वामी रामदेव हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ में आचार्य बालकृष्ण के जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित 'जड़ी-बूटी दिवस' कार्यक्रम में शामिल हुए थे. इस दौरान उन्होंने औषधीय पौधों, प्राकृतिक जीवनशैली और योग के महत्व पर भी प्रकाश डाला. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में योग साधक, पतंजलि से जुड़े कार्यकर्ता और श्रद्धालु मौजूद रहे. मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कांवड़ यात्रा को लेकर भी अपने विचार साझा किए.

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