तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के कर्मनघाट इलाके में सिविल सप्लाई विभाग ने खुदरा और थोक चावल व्यापारियों की दुकानों पर औचक छापेमारी की. जांच में चावल के स्टॉक में कई गड़बड़ियां मिलीं. अफसरों के मुताबिक कई बोरों पर 26 किलो लिखा था, लेकिन उनमें असल में 25 किलो चावल निकला. टैक्स बचाने के लिए ऐसा किए जाने की बात सामने आई है. कुछ ब्रांड का माल जब्त किया गया है और नमूने भी लिए गए हैं. दोषियों पर आपराधिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
यह छापेमारी सिविल सप्लाई एनफोर्समेंट टास्क फोर्स की टीम ने की. छापे खुदरा और थोक, दोनों तरह के चावल कारोबारियों की दुकानों पर अचानक मारे गए, यानी दुकानदारों को इसकी पहले से खबर नहीं थी. टास्क फोर्स के सुपरिटेंडेंट शशिधर राजू ने बताया कि टीम उन ठिकानों पर पहुंच रही है जहां चावल की जमाखोरी की जा रही है.
उनके मुताबिक जमाखोरी का मकसद बाजार में चावल के दाम बढ़ाना है. जब किसी चीज का स्टॉक दबाकर रख लिया जाता है, तो बाजार में उसकी कमी दिखती है और कीमतें ऊपर चली जाती हैं.
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छापे में सबसे बड़ी गड़बड़ी बोरों के वजन को लेकर मिली. कई बोरों पर 26 किलो छपा हुआ था, पर अंदर सिर्फ 25 किलो चावल था. अधिकारी ने इसे नियमों का उल्लंघन बताया. उन्होंने कहा कि 26 किलो वाले बोरे पर जीएसटी नहीं लगता, जबकि 25 किलो पर लगता है. यानी बोरे पर ज्यादा वजन लिखकर टैक्स से बचने की कोशिश की जा रही थी. शशिधर राजू के शब्दों में यह एक तरह की धोखाधड़ी है. खरीदार को लगता है कि उसे 26 किलो चावल मिल रहा है, जबकि उसे एक किलो कम मिलता है.
टीम को एक और बड़ी कमी भी मिली. कई दुकानदारों के पास ट्रेड लाइसेंस ही नहीं था. ट्रेड लाइसेंस वह मंजूरी है जो कारोबार चलाने के लिए जरूरी होती है. इसके बिना दुकान चलाना भी नियमों के खिलाफ माना जाता है.
कार्रवाई के तहत मौके पर ही सामान जब्त किया जा रहा है. कुछ ब्रांड का चावल भी जब्त कर लिया गया है. जांच के लिए चावल के नमूने इकट्ठा किए गए हैं. अधिकारी ने साफ कहा कि मामले में आपराधिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी. विभाग की ओर से जब्ती की कार्रवाई अभी जारी है.