हैदराबाद में एक गर्ल्स हॉस्टल है. पुलिस को शक हुआ कि इस हॉस्टल के भीतर कुछ और ही चल रहा है. ऐसा काम, जिसका संबंध महिलाओं के शरीर और मां बनने की प्रक्रिया से है. पुलिस को शक है कि यहां अलग-अलग राज्यों से महिलाओं को लाया जाता था. फिर कथित तौर पर उनके अंडाणु निकाले जाते थे और उन्हें फर्टिलिटी सेंटर तक पहुंचाया जाता था. यानी उन जगहों तक, जहां बच्चा पैदा करने में परेशानी का सामना कर रहे कपल का इलाज किया जाता है.
इसी शक के आधार पर पुलिस ने हैदराबाद के बेगमपेट इलाके में बने गर्ल्स हॉस्टल पर छापा मारा. वहां बिहार, उत्तर प्रदेश और ओडिशा की करीब 10 महिलाएं मिलीं. पुलिस ने उनसे पूछताछ की. हॉस्टल की तलाशी ली तो सिरिंज और गर्भनिरोधक गोलियां भी मिलीं.
पुलिस को इस जगह पर संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली थी. इसके बाद बेगमपेट पुलिस और मल्काजगिरी की स्पेशल ऑपरेशंस टीम यानी SOT ने छापेमारी की. हॉस्टल में करीब 10 महिलाएं मिलीं.
पुलिस की शुरुआती जांच में शक जताया गया कि हॉस्टल का इस्तेमाल महिलाओं को अलग-अलग राज्यों से लाने और उन्हें यहां ठहराने के लिए किया जा रहा था. इसके बाद उनके अंडाणु निकालकर फर्टिलिटी सेंटरों तक पहुंचाए जाते थे.
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस कथित काम के लिए हॉस्टल संचालकों के साथ कुछ बिचौलिए भी जुड़े हुए थे. क्या किसी फर्टिलिटी सेंटर से इनका संपर्क था? और अगर था, तो वह सेंटर कौन सा था?
अंडाणु निकालने का शक क्यों हुआ?
पुलिस ने हॉस्टल की तलाशी के दौरान सिरिंज और गर्भनिरोधक गोलियां बरामद की हैं. इन्हें मेडिकल जांच के लिए गांधी अस्पताल भेजा गया है. बेगमपेट थाने के SHO पी. सैदुलु ने कहा कि अभी आरोप साबित नहीं हुए हैं. डॉक्टरों और जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी (DHMO) के अधिकारियों को बरामद सामान और दूसरे सबूतों की जांच करनी होगी. उनकी रिपोर्ट के बाद ही पता चलेगा कि वहां अंडाणु निकालने की कोई प्रक्रिया हुई थी या नहीं. SHO के मुताबिक, अब तक हॉस्टल में IVF से जुड़ी स्कैनिंग भी नहीं हुई है.
क्या पुरुषों के स्पर्म सैंपल भी लिए जा रहे थे?
इस मामले में पुलिस एक और पहलू की जांच कर रही है. शक है कि हॉस्टल में पुरुषों के स्पर्म सैंपल लेने का काम भी हो सकता था. स्पर्म यानी पुरुष के वीर्य में मौजूद प्रजनन कोशिकाएं. वहीं महिलाओं के अंडाणु प्रजनन प्रक्रिया का दूसरा जरूरी हिस्सा होते हैं.
IVF जैसी तकनीक में अंडाणु और स्पर्म की मदद से लैब में भ्रूण तैयार किया जाता है, जिसे आगे प्रेग्नेंसी की प्रोसेस में इस्तेमाल किया जा सकता है. पुलिस को शक है कि यह गतिविधि करीब एक साल से चल रही थी. जांच टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि हॉस्टल का संचालन कौन कर रहा था, महिलाओं को यहां कौन लेकर आता था और क्या उन्हें इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी थी.
पुलिस ने केस दर्ज कर शुरू की पूछताछ
अहम सवाल यह है कि क्या महिलाएं अपनी मर्जी से यहां आई थीं? क्या उन्हें बताया गया था कि उन्हें किस काम के लिए बुलाया जा रहा है? या फिर उन्हें किसी तरह के झांसे में रखकर यहां लाया गया? पुलिस इसी कड़ी में हॉस्टल संचालकों, बिचौलियों और संभावित फर्टिलिटी सेंटरों के बीच कनेक्शन की जांच कर रही है.
इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है. फिलहाल करीब 10 महिलाओं से पूछताछ की गई है. पुलिस की जांच जारी है. फिलहाल पुलिस के सामने तीन बड़े सवाल हैं- महिलाओं को यहां कौन लाया? क्या उनकी सहमति से कोई मेडिकल प्रक्रिया हुई? और क्या इस पूरे मामले के तार किसी फर्टिलिटी सेंटर से जुड़े हैं? जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही इन सवालों के जवाब मिल पाएंगे.